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जब 14 साल की लड़की को देख बोले थे अमजद खान-'जल्दी बड़ी हो जाओ,मैं तुमसे ही शादी करूंगा'

अमजद खान का परिवार आज भी बांद्रा-पश्चिम में उसी जगह पर रहता है, जहां उन्होंने अपनी आखिरी सांसें ली थीं।

Dainikbhaskar.com/Sunil Kukreti | Last Modified - Jul 27, 2018, 05:47 PM IST

जब 14 साल की लड़की को देख बोले थे अमजद खान-'जल्दी बड़ी हो जाओ,मैं तुमसे ही शादी करूंगा'

बॉलीवुड डेस्क।अमजद खान का जन्म 21 अक्टूबर 1943 को हुआ था, जबकि गूगल पर 12 नवंबर दिखाया जाता है, जो कि गलत है। दरअसल, 12 नवंबर को उनके ससुर यानी पत्नी शेहला खान के पिता अख्तर-उल-ईमान (बी.आर. चोपड़ा के प्रिय फिल्म लेखक) का जन्मदिन है। बहरहाल, 27 जुलाई को अमजद खान की पुण्यतिथि है। फिल्म ‘शोले’ में गब्बर सिंह का जबरदस्त किरदार निभाकर बॉलीवुड में अमर हो गए। उनकी पत्नी शेहला खान ने एक इंटरव्यू में अपनी लव स्टोरी के किस्से शेयर किए थे।


शेहला के पिता नहीं थे शादी के लिए तैयार: उन दिनों मैं कॉलेज में पढ़ती थी, लेकिन स्कूल के दिनों से ही हमारी पहचान बढ़ी थी। हमारे परिवार आपस में परिचित थे। सन 1972 में हमारी लव-मैरिज हुई। अमजद जी ने ही पहले मुझे प्रोपोज किया था। वे हिल-व्यू वन और मैं हिल-व्यू टू में रहती थी। शेहला के मुताबिक,वह अमजद से पहली बार 14 साल की उम्र में मिली थीं। दोनों एक ही क्लब में खेलने आया करते थे।

-बकौल शेहला,एक दिन मैं बैडमिंटन खेल रही थी और शटल कॉक गिर गया था तब मैंने उन्हें कहा था-अमजद भाई, प्लीज शटल पास कर दीजिये। इतना सुनकर वह गुस्से से भड़क गए थे और कहा था-मुझे भाई बोलने की हिम्मत नहीं करना। मैंने पूछा क्यों? तो उन्होंने कहा-इससे मुझे लगता है मैं बूढ़ा हो गया।

-इस वाकये के पांच महीने बाद मेरी उनसे फिर मुलाकात हुई जब मैं अपने डॉग को घुमाने निकली थी और वह दोस्तों के साथ कैरम खेल रहे थे। उन्होंने मुझे देखा और मुझसे कहा क्या तुम्हें तुम्हारे नाम का मतलब पता है? मैंने कहा-नहीं तो उन्होंने कहा-इसका मतलब होता है,काली आंखों वाला व्यक्ति।

-इसके बाद उन्होंने मुझसे पूछा-तुम्हारी उम्र क्या है? मैंने कहा-14 तो उन्होंने कहा-जल्दी बड़ी हो जाओ क्योंकि मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं। इतना सुनकर मैं सन्न रह गई और घर जाने के बाद मुझे फीवर आ गया। जब मैं 10वीं में पढ़ रही थी तो अमजद ने मुझसे कहा कि वह अपनी मां को उनके घर रिश्ता लेकर भेजेंगे।

-जब उनकी मां मेरा हाथ मांगने आईं तो मेरे पिता जी ने शादी से इंकार कर दिया और मुझे पढ़ने के लिए अलीगढ़ भेज दिया ताकि हम दोनों दूर रहें लेकिन दो हफ़्तों के बाद मैं वापस मुंबई आ गई। काफी सालों तक हम छुपछुपकर मिले और एक दिन मेरे पेरेंट्स हमारी शादी के लिए मान गए और 1972 में हमारी शादी हो गई। शादी के एक साल बाद 1973 में ही बड़े बेटे शादाब का जन्म हुआ था और इसी दिन अमजद को शोले में गब्बर का रोल भी मिला था।


जर्नलिस्ट बनना चाहते थे:जब हमारी शादी हुई थी तो तब वे फिल्मों में काम नहीं करते थे। वे जर्नलिस्ट बनना चाहते थे। उन दिनों अमजद एस.एस.पिल्लई (स्क्रीन एडिटर) के अंडर में काम करते थे। वे उन दिनों थिएटर जाया करते थे। वे बड़े जहीन किस्म के थे और अपनी ही सोच के मद्देनजर उन्होंने कॉलेज के दिनों में दक्षिण अफ्रीका की समस्या पर आधारित नाटक रच कर उसमें अभिनय किया था। उन दिनों कॉलेज में वे भाई इम्तियाज, शबाना आजमी और निर्देशक रमेश सिप्पी जी की बहन सुनीता के साथ मिलकर नाटक किया करते थे।

बच्चे रोते थे तो बेचैन हो जाते थे:फिल्म ‘शोले’ में उनका डायलॉग था कि ‘यहां से 50-50 कोस दूर, किसी गांव में रात को जब बच्चा रोता है तो मां कहती है बेटा सो जा... नहीं तो गब्बर आ जाएगा...!' असल में अमजद बड़े ही नरम-दिल पिता थे। जब शादाब या हमारे किसी बच्चे को कुछ हो जाता था तो वे तुरंत डॉक्टर के पास चलने की जिद्द करने लगते थे।

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