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स्कूल में रोते-रोते बीते थे संजू के कई दिन, करना पड़ता था 30 जोड़ी जूतों पर पॉलिश

पिता ने नाराजगी की कहानी संजय दत्त के सनावर (हिमाचल प्रदेश) स्थित बोर्डिंग स्कूल से शुरू होती है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - May 30, 2018, 06:56 PM IST

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    पेरेंट्स के साथ संजय दत्त।

    मुंबई.'संजू' के ट्रेलर में यह बताया गया है कि संजय दत्त ने पहली बार ड्रग्स पिता से नाराज होकर लिया और दूसरी बार मां के बीमार हो जाने पर। लेकिन क्या आप जानते हैं कि संजय दत्त पिता सुनील दत्त से नाराज क्यों रहते थे। इस बात का खुलासा ऑथर यासेर उस्मान ने संजय दत्त की बायोग्राफी में किया है। पिता ने नाराजगी की कहानी उनके सनावर (हिमाचल प्रदेश) स्थित बोर्डिंग स्कूल से शुरू होती है। जब पहली बार सुनील दत्त और नरगिस दत्त ने संजू को सनावर के बोर्डिंग स्कूल छोड़ा, तब उनके मन में ख्याल आता था कि ऐसा उन्होंने क्या किया है, जिसकी वजह से पेरेंट्स ने उन्हें दूर कर दिया। बोर्डिंग स्कूल के बच्चे चिढ़ाते और धमकाते थे...

    - बुक में बताया गया है कि जब सुनील दत्त और नरगिस संजय को बोर्डिंग स्कूल में छोड़कर गए तो वे कई दिन तक रोते रहे थे। वे मां को पत्र लिखते थे कि उन्हें वापस घर बुला लिया जाए। बोर्डिंग स्कूल के दूसरे बच्चे उन्हें एक्टर-एक्ट्रेस के बेटे होने की वजह से चिढ़ाते थे, धमकाते थे और गाली देते थे। संजय दत्त के पापा, मम्मी और बहनों के साथ मारपीट की धमकी भी देते थे। तब संजय दत्त मां को फोन करके कहते थे कि वे उन्हें अपने साथ ले जाएं। लेकिन नरगिस और सुनील यह कहकर खुद को समझा लेते थे कि संजय का कठिन वक्त है। कुछ समय बाद वे हॉस्टल लाइफ में ढल जाएंगे।

    दो साल थे बहुत ही कठिन

    - यासेर उस्मान की बुक में बोर्डिंग स्कूल में संजय दत्त द्वारा बिताए गए दिनों का जिक्र किया है। इसमें बताया गया है कि शुरुआती दो साल संजय दत्त के लिए बहुत कठिन थे। इस दौरान उन्हें हर दिन 30 जोड़ी व्हाइट शूज पर पॉलिश करना पड़ता था और सीनियर्स के 15-20 बेड तैयार करते पड़ते थे। संजय दत्त के मुताबिक, यह सिर्फ इसलिए होता था, क्योंकि वे सुनील दत्त और नरगिस दत्त के बेटे थे।

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    पिता सुनील दत्त के साथ संजय दत्त।

    पिता से नफरत करने लगे थे संजय दत्त

    - भले ही पेरेंट्स ने उनके अच्छे भविष्य के लिए फैसला लिया हो, लेकिन संजय दत्त बोर्डिंग स्कूल की लाइफ को सजा के तौर पर ले रहे थे। उन्होंने पेरेंट्स को लेटर लिखा और माफी मांगी। संजू ने लेटर में लिखा, "माफ कर दीजिए कि मैंने आपके साथ दुर्व्यवहार किया। आपको पलटकर जवाब दिए।" लेकिन जब किसी तरह पेरेंट्स नहीं रीझे तो संजू को पिता पर गुस्सा आने लगा। बाद में उन्होंने कहा भी था, "मैं उनसे नफरत करने लगा था। मुझे अपने आप पर तरस आने लगा था और मन में लगने लगा था कि मैं उनका बायलॉजिकल बेटा नहीं हूं।"

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    मां नरगिस के साथ संजय दत्त।

    जब घर लौटे तो सब कुछ बदला-बदला था

    -1977 में संजय दत्त 5 साल तक बोर्डिंग स्कूल में रहने के बाद घर वापस लौटे तो उन्हें सब कुछ बदला-बदला नजर आया। उनकी बहनें (प्रिया और नम्रता) बड़ी हो गई थीं। मां की उम्र भी ढल चुकी थी और वे सोशल वर्क में लग गई थीं। पिता फिल्मों में पहले से ज्यादा व्यस्त हो चुके थे। इस दौरान संजय को अटेंशन नहीं मिल पा रहा था। घर लौटने के बाद जब पेरेंट्स किसी बात के लिए टोकते तो उनको बुरा लगता था। वे सोचते थे, क्यों उनके पेरेंट्स बताते हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं? जबकि वे सनावर में सारे काम खुद करते थे। उनके साथ बच्चों जैसा व्यव्हार क्यों किया जाता है? क्यों कहा जाता है कि शाम 6 बजे के बाद घर से बाहर नहीं जाना? डिनर फैमिली के साथ करना और रात 10 बजे तक सो जाना।

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    संजय दत्त मां नरगिस के साथ।

    कॉलेज में लग गई थी ड्रग्स की लत

    - संजय दत्त को मुंबई के Elphinstone College में एडमिशन दिला दिया गया था। पिता सुनील दत्त चाहते थे कि संजय पढ़ाई कर अच्छी डिग्री हासिल करें। लेकिन खुद संजय का पढ़ाई में मन नहीं लगता था। संजय दत्त ने खुद यासेर उस्मान की बुक में बताया है, "मैं एक साल के लिए कॉलेज गया। वहां मैंने ड्रग्स लेना शुरू किया, जिसकी वजह कॉलेज के ही कुछ दोस्त थे।" संजय दत्त के मुताबिक, वे कोकीन और हेरोइन लेते थे। 1981 में मां नरगिस की डेथ के बाद संजय की ड्रग्स की लत और ज्यादा बढ़ गई थी। 1982 में ड्रग्स रखने के केस में उन्हें 5 महीने की जेल भी हुई थी। ऐसे में पिता सुनील दत्त ने उन्हें यूएस के रिहैब सेंटर में स्पेशल ट्रीटमेंट के लिए भेज दिया था। इसके लगभग तीन साल बाद 1985 में संजय फिल्म 'जान की बाजी' से बॉलीवुड में वापसी कर पाए थे।

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Web Title: When Sanjay Dutt Hated His Father
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