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Movie Review: कमजोर कहानी वाला एक्शन ड्रामा, कमल हासन के फैन्स को भी निराश करेगी विश्वरूपम -2

एक्टर-डायरेक्टर कमल हासन की फिल्म 'विश्वरूपम-2' शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Aug 10, 2018, 02:00 PM IST

Movie Review: कमजोर कहानी वाला एक्शन ड्रामा, कमल हासन के फैन्स को भी निराश करेगी विश्वरूपम -2

क्रिटिक रेटिंग2/5
स्टार कास्टकमल हासन, पूजा कुमार, राहुल बोस, शेखर कपूर, वहीदा रहमान
डायरेक्टरकमल हासन
प्रोड्यूसरकमल हासन
जोनरइंडियन एक्शन ड्रामा
अवधि145 मिनट

बॉलीवुड डेस्क. सुपरस्टार कमल हासन विश्वरूपम-2 के साथ सिल्वर स्क्रीन पर वापस आए हैं। पहला पार्ट 2013 में रिलीज हुआ था। जिस पर कई विवाद भी हुए थे। विश्वरूपम 2 वहीं से शुरू होती है जहां पहली विश्वरूपम खत्म हुई थी। रॉ एजेंट विजाम अहमद कश्मीरी (कमल हासन), डॉ. निरूपमा ( पूजा कुमार), एजेंट असमिता (एंड्रिया जेरेमिया) के साथ सीनियर कर्नल जगन्नाथ (शेखर कपूर) लंदन जा रहे होते हैं। इस शक के साथ कि वहीं आतंकवादी उमर (राहुल बोस) छुपा हुआ है। उमर और उसके समर्थकों को न्यूयॉर्क पर अटैक करने से रोकना ही इनका मिशन है।

- जल्द ही उन पर हमला होता है। विजाम सिचुएशन पर कंट्रोल कर लेता है। फिल्म में कमल की स्टाइल की झलक मिलती है लेकिन पहली फिल्म की तुलना में फिल्म कमजोर लगती है।

कमजोर कहानी, कुछ एक्शन सीन दमदार :फिल्म में कई सांसें रोकने वाले एक्शन सीक्वेंस हैं। जो आपको सीट से चिपका रहने पर मजबूर करते हैं। लेकिन सिर्फ इतना ही काफी नहीं है। फिल्म की स्टोरी लाइन, कहानी में आने वाले ट्विस्ट और टर्न रोमांचित नहीं करते जैसा कोई जासूसी नाटक करता है। पहली फिल्म में कमल हासन ने पहचान छिपाने के लिए तीन अवतार लिए थे। जिसमें से एक कथक इंस्ट्रक्टर का था जिसने स्टोरी में वेल्यू एड किया था। इस पार्ट में ऐसा कुछ भी एंटरटेनिंग नहीं है।

- कहानी इतनी बेतरतीब है कि समझ में नहीं आता कि क्या हो रहा है। अगर आपने पहली फिल्म नहीं देखी तब तो आप और भी कन्फ्यूज हो जाएंगे। VFX सीन भी उतना प्रभाव नहीं छोड़ते।

एक्टिंग में बेजोड़ कमल हासन : कमल हासन का रोल उनकी उम्र के हिसाब से नहीं है। लेकिन परफॉर्मेन्स हमेशा की तरह बेहतर है। पूजा कुमार ने उनकी वाइफ के रोल में अच्छा काम किया है। पूजा और जेरेमिया के बीच का ट्रेक जबरन जोड़ा गया लगता है। जेरेमिया ने अच्छे एक्शन सीन किए हैं। जयदीप अहलावत जो कि आतंकवादी सलीम के रोल में हैं, उनका काम ठीक है। उनके पास करने को कुछ ज्यादा नहीं था।

- राहुल बोस जिन्होंने अलकायदा के आतंकवादी उमर कुरैशी का किरदार निभाया है, जिसे कॉमिक विलेन कहा जा सकता है। बोस अपने कैरेक्टर में फिट बैठने के लिए बहुत मेहनत करते हैं लेकिन उनका कृत्रिम अभिनय उनकी मेहनत को खराब कर देता है।

- वहीदा रहमान ने कमल हासन की मां का रोल किया है जिन्हें अल्जाइमर है। उनका रोल फिल्म में मिसिंग इमोशन फैक्टर को पूरा कर सकता था लेकिन इसे फिल्म में गलत समय पर लाया गया है।

क्लाइमैक्स ने बचायी लाज: क्लाइमैक्स में दिखाए गए एक्शन सीक्वेंस फिल्म के ग्रेस को बचा लेते हैं बाकी पूरी फिल्म अव्यवस्थित, कन्फ्यूजिंग है। फिल्म पहले पार्ट से 5 साल बाद रिलीज हुई है लेकिन फिल्म के कैरेक्टर पहली फिल्म से बहुत अलग दिखते हैं। फिल्म का म्यूजिक अच्छा है जो फिट बैठता है।

- अगर आप कमल हासन के फैन है और उनकी कैसी भी फिल्म देखते हैं तो इसे देख सकते हैं। लेकिन बहुत सारी उम्मीदों के साथ फिल्म देखने न जाएं।

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