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संजय दत्त की खबर ब्रेक करने वाले रिपोर्टर बलजीत परमार ने नहीं देखी संजू, सच लिखा तो हुए ट्रोल

15 अप्रैल 1993 को संजय के पास हथियार होने की खबर 'डेली' अखबार में सबसे पहले बलजीत ने ही पब्लिश की थी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 12, 2018, 01:45 PM IST

संजय दत्त की खबर ब्रेक करने वाले रिपोर्टर बलजीत परमार ने नहीं देखी संजू, सच लिखा तो हुए ट्रोल

बॉलीवुड डेस्क.अप्रैल 1993 में हुए बम धमाकों के बाद क्राइम रिपोर्टर बलजीत ने सबसे पहले खबर ब्रेक की थी- कि संजय के पास एके-56 है। बलजीत की खबर के बाद संजय दत्त को टाडा आैर आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया। बलजीत ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपनी यादों को ताजा करते हुए ब्लास्ट केस के कुछ किस्से शेयर किए, जिस पर ट्रोलर्स ने उन्हें आड़े हाथों लिया। कई लोगों ने उन्हें गालियां भी दी हैं।

मुझे फर्क नहीं पड़ता, मैंने सच का साथ दिया :ट्रोलर्स के एक मैसेज के बारे में बलजीत ने बताया कि- "मैंने जब यह लिखा कि मैं कैसे ब्लास्ट केस की खोजबीन करते हुए संजय दत्त तक पहुंचा तो लोगों ने सोचा मैं झूठ बोल रहा हूं। मुझे छोटा राजन ने मारने की कोशिश थी, इस बात पर किसी ने कहा था कि तुम कोई तुर्रम खां हो, जो छोटा राजन तुम्हें मारने आएगा।

- ट्रोलर्स का काम सिर्फ कहना है, वे कुछ भी बोलते रहें, मुझे फर्क नहीं पड़ता। मैंने संजय दत्त को भी सही सलाह दी थी कि वह हथियार सरेंडर कर दे, लेकिन उसने मेरी बात नहीं मानी थी। "

- बलजीत ने यह भी बताया कि ब्लास्ट से 10 दिन पहले भी संजय दत्त के घर पर हथियारों से भरी गाड़ी पहुंची थी। जिसे बाद में अबू सलेम के साथियों ने हटा लिया था।

बलजीत ने नहीं देखी संजू: बलजीत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि - संजू की रिलीज के बाद से ही उनके पास सैकड़ों मैसेज और फोन कॉल्स आए। जिनमें यह कहा गया कि फिल्म 'संजू' पर मैं रिएक्ट करूं। तो उन सभी लोगों को बताना चाहूंगा कि लेकिन मैं फिल्में देखता ही नहीं हूं। मैंने पिछली फिल्म 1997 में देखी थी।

- संजू में मीडिया को जमकर कोसा गया है। बलजीत को यह भी उन दोस्तों ने बताया जो फिल्म देखकर आए थे।

- बलजीत फेसबुक पर अपनी एक पोस्ट के आखिर में लिखा है- "ड्रग्स लेना, सैकड़ों महिलाओं के साथ सोना, सिस्टम या समाज में गलतियां को ढूंढना, मर्जी से या जानबूझकर आपराधिक गतिविधि में शामिल होना, पिछले कामों का कोई पछतावा न होना, सिम्पैथी कार्ड खेलना। अगर फिल्म संजू में यही सब दिखाया गया है, तो मुझे सिनेमाघरों से दूर रहने के अपने फैसले पर अफसोस नहीं है।"

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