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100 से ज्यादा फिल्में करने के बाद भी किराए के घर में रहने को मजबूर हैं संजय मिश्रा

फिल्म 'गोलमाल' के एक्टर संजय मिश्रा ने फिल्मों में कैरेक्टर रोल निभाकर अपनी अलग पहचान बनाई है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 19, 2018, 12:25 PM IST

    • संजय मिश्रा।

      * 2 दशकों से फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे संजय मिश्रा

      * 1989 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से ग्रैजुएट हैं संजय

      मुंबई। करीब दो दशकों से फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे संजय मिश्रा ने एक इंटरव्यू में अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वो 20 साल से फिल्मों में काम कर रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके आज भी किराए के घर में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास एक घर खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।

      - संजय मिश्रा ने कहा- 'पिछले कुछ वक्त से सपोर्टिंग एक्टर्स की फीस कुछ बेहतर जरूर हुई है, लेकिन अब भी जितनी फीस की डिमांडमैं करता हूं, उतनी मुझे नहीं मिल सकती।इसके पीछे एक वजह मेरा एटिट्यूड भी है। दरअसल, मैं मेकर्स से पहले ही कह देता हूं कि पहले उनका (लीड एक्टर्स का)काम दिखाओ, इसके बाद ही मैं काम करूंगा।'

      - संजय के मुताबिक, जब आप लीड रोल में होते हैं, तो आप पर पैसा इन्वेस्ट किया जाता है। प्रोडक्शन टीम भी आपके साथ अलग तरीके से ट्रीट करती है। वहीं दूसरी ओर, सपोर्टिंग रोल वालों से कहा जाता है- आपकी वजह से फिल्म बिक रही है, लेकिन ज्यादा बड़ी वजह हीरो है। यही फर्क है एक लीड एक्टर और सपोर्टिंग एक्टर के काम में।

      कभी एक्टिंग छोड़ ढाबे पर करने लगे थे काम...

      कम ही लोग जानते हैं कि NSD से ग्रैजुएट संजय की लाइफ में एक वक्त ऐसा भी आया था, जब उन्होंने एक्टिंग को बॉय कह दिया था और एक छोटे से ढाबे पर जाकर नौकरी करने लगे थे। दरअसल, पिता की डेथ के बाद संजय एक्टिंग छोड़कर ऋषिकेश चले गए थे, जहां वो एक ढाबे पर काम करने लगे। संजय 100 से भी ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके थे लेकिन बावजूद इसके उन्हें वो सफलता नहीं मिली, जिसके वो हकदार थे। शायद इसी वजह से ढाबे पर संजय को किसी ने पहचाना भी नहीं। दिन बीतते गए और उनका वक्त ढाबे पर सब्जी बनाने, आमलेट बनाने में कटने लगा था।

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      रोहित शेट्टी ने दोबारा दिया काम...
      अगर रोहित शेट्टी ना होते, तो संजय अपनी पूरी जिंदगी उस ढाबे पर काम करने में ही निकाल देते। रोहित और संजय फिल्म 'गोलमाल' में साथ काम कर चुके थे। वो अपनी अगली फिल्म 'ऑल द बेस्ट' पर काम कर रहे थे और उसी दौरान उन्हें संजय का ख्याल आया। संजय फिल्मों में लौटने को तैयार नहीं थे, लेकिन रोहित शेट्टी ने उन्हें मनाया और फिल्म में साइन किया। इसके बाद तो संजय ने कभी बॉलीवुड छोड़ने का मन नहीं किया।
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      फिल्मी करियर की शुरुआत और संघर्ष...

      1991 में संजय मुंबई आ गए। यहां 9 साल स्ट्रगल करने के बाद उन्हें पहला ब्रेक मिला। ‘चाणक्य' सीरियल से शुरुआत करने वाले संजय ने पहले दिन की शूटिंग में 28 बार रिटेक दिया था। बाद में उन्होंने अपने दोस्त तिग्मांशु धूलिया के सीरियल 'हम बम्बई नहीं जाएंगे' में आर्ट डायरेक्टर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। कुछ दिनों बाद वो 'सॉरी मेरी लारी' में भी नजर आए।
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      ऐसे हुई संजय के फिल्मी करियर की शुरुआत...

      1995 की हिंदी फिल्म 'ओह डार्लिंग ये है इंडिया' में काम किया। इस फिल्म में उन्होंने एक हार्मोनियम प्लेयर की छोटी सी भूमिका अदा की थी। उसके बाद उन्होंने फिल्म ‘सत्या’, ‘दिल से’, 'फंस गए रे ओबामा', ' मिस टनकपुर हाजिर हो', 'प्रेम रतन धन पायो', 'मेरठिया गैंगस्टर्स', 'दम लगाके हायेशा', गोलमाल और बादशाहो जैसी कई फिल्मों में काम किया है। वर्क फ्रंट की बात करें तो संजय जल्द ही मंगल हो और टोटल धमाल जैसी फिल्मों में नजर आएंगे।

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