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पापा सुनील दत्त की डेथ एनिवर्सरी पर इमोशनल हुए संजय दत्त, कही दिल की बात

6 जून, 1929 को झेलम, पंजाब में जन्मे सुनील दत्त का असली नाम बलराज दत्त था।

DainikBhaskar.com | Last Modified - May 25, 2018, 05:00 PM IST

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    संजय दत्त ने पापा सुनील दत्त के साथ यही फोटो शेयर की है।

    मुंबई।संजय दत्त के पिता और एक्टर सुनील दत्त को गुजरे हुए 13 साल हो चुके हैं। 25 मई 2005 को हार्ट अटैक से उनकी डेथ हो गई थी। 6 जून, 1929 को झेलम, पंजाब में जन्मे सुनील दत्त का असली नाम बलराज दत्त था। एक दौर में संजय दत्त की नशे की आदत और 1993 बम धमाकों में नाम आने की वजह से सुनील दत्त काफी तनाव में रहने लगे थे। इस दौरान यह भी आरोप लगा कि सुनील दत्त अपने बेटे के चलते ही बाल ठाकरे जैसी शख्सियत के पैरों में घंटों बैठे रहते थे। हालांकि अब पापा की डेथ एनिवर्सरी पर संजय दत्त ने खुद एक इमोशनल पोस्ट लिखी है।क्या लिखा संजय दत्त ने...


    - संजय दत्त ने इंस्टाग्राम पर पापा सुनील दत्त और अपनी पुरानी फोटो शेयर करते हुए लिखा- Wish you could see me as a free man. Love you... Miss you. एक इवेंट में संजय दत्त ने कहा- मेरे पापा ने मेरी परवरिश नॉर्मल बच्चों की तरह ही की। मुझे बोर्डिंग स्कूल भेजा और अब मैं भी अपने बच्चों की केयर उसी तरह कर रहा हूं। मैं भी उन्हें जिंदगी की वैल्यूज जैसे बड़ों की रेस्पेक्ट करना और दूसरी चीजें उन्हें सिखा रहा हूं। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि मेरा बेटा मेरे जैसा बिल्कुल ना बने। बता दें कि सुनील दत्त की आखिरी फिल्म 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' थी। इस फिल्म के माध्यम से पहली बार पिता-पुत्र (सुनील दत्त और संजय दत्त) एक साथ पर्दे पर दिखे थे। हालांकि, फिल्म 'क्षत्रिय' और 'रॉकी' में भी दोनों ने साथ काम किया था, लेकिन इन फिल्मों में दोनों का साथ में कोई सीन नहीं था।

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    पापा सुनील दत्त और मां नरगिस के साथ संजय दत्त।

    सुनील दत्त ने झेला था बंटवारे का दर्द...

    सुनील दत्त जब पांच साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था। वे बॉलीवुड के उन कलाकारों में से एक थे, जिन्होंने बंटवारे का दर्द झेला और जमीनी लड़ाई को भी बखूबी देखा। बंटवारे के समय जब हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए, तब उनके पिता के दोस्त रहे याकूब नाम के एक मुस्लिम ने ही उनके परिवार की हिफाजत की थी। उनके परिवार को हरियाणा के यमुनानगर जिले के एक छोटे से गांव मंडौली में बसाया गया। बाद में उनका परिवार लखनऊ शिफ्ट हो गया। ग्रैजुएशन के दौरान अपने सपनों को सच करने सुनील दत्त मुंबई आ गए और जय हिंद कॉलेज में दाखिला ले लिया। इस दौरान उन्होंने बेस्ट ट्रांसपोर्ट डिवीजन में जॉब भी किया।

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    पापा-मम्मी के साथ संजय दत्त।

    फिल्मों में आने से पहले थे रेडियो अनाउंसर...

    बॉलीवुड में डेब्यू से पहले सुनील दत्त साउथ एशिया के सबसे पुराने रेडियो स्टेशन रेडियो सीलोन की हिंदी सेवा में बतौर अनाउंसर काम करते थे। इस दौरान वे काफी पॉपुलर हुए। 1955 में उन्हें पहली बॉलीवुड फिल्म मिली। नाम था 'रेलवे प्लैटफार्म'। इस फिल्म में नलिनी जयवंत उनकी एक्ट्रेस थीं। हालांकि, ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही थी।

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    बाल ठाकरे और सुनील दत्त के साथ संजय दत्त।

    सक्रिय राजनीति में भी रहे...

    सुनील दत्त के जीवन के कई आयाम हैं। उन्होंने रेड़ियो अनाउंसर से अपना करियर शुरू किया, लेकिन अंत समय तक वह एक फिल्मी हस्ती और पॉलिटिशियन की तरह पहचाने जाते रहे। सुनील दत्त ने सक्रिय राजनीति भी की। वे 2004-05 के दौरान मनमोहन सिंह सरकार में युवा मामलों और खेल विभाग में कैबिनेट मंत्री रहे। अब उनकी राजनीतिक विरासत को उनकी बेटी प्रिया दत्त संभाल रही हैं।

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    पेरेंट्स के साथ संजय दत्त।

    100 से ज्यादा फिल्मों में किया काम

    - सुनील दत्त ने अपने करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। इनमें 'साधना', 'सुजाता', 'ये रास्ते हैं प्यार के', 'पड़ोसन', 'वक्त', 'हमराज', 'रेशमा और शेरा' और 'मदर इंडिया' प्रमुख हैं।
    - डायरेक्टर बीआर चोपड़ा के साथ 'गुमराह' (1963), 'वक्त' (1965) और 'हमराज' (1967) जैसी फिल्मों में निभाई गई यादगार भूमिकाओं के लिए सुनील दत्त को आज भी याद किया जाता है।

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    आखिरी फिल्म 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' में सुनील दत्त।

    मिले कई पुरस्कार...

    सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त पर भले ही 1993 बम धमाकों की साजिश जैसे संगीन आरोप लगे हों, लेकिन उनका खुद का दामन हमेशा साफ रहा। शांति, सद्भाव और एकता कायम रखने की कोशिशों के चलते उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। इसमें पद्मश्री पुरस्कार भी शामिल है।

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