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सलमान खान ने भरा था 'डॉ. हाथी' का हॉस्पिटल बिल, वजन घटाने के लिए हुई थी सर्जरी

मुंबई के सैफी अस्पताल में हुए ऑपरेशन से डॉ. हाथी का वजन 140 किलो कम हुआ था

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 14, 2018, 11:56 AM IST

सलमान खान ने भरा था 'डॉ. हाथी' का हॉस्पिटल बिल, वजन घटाने के लिए हुई थी सर्जरी

एंटरटेनमेंट डेस्क: सलमान खान अपनी दरियादिली के लिए मशहूर है। सलमान ने ऐसी ही मदद 2010 मे कवि कुमार के लिए की थी। दरअसल, 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के डॉ. हंसराज हाथी यानी कवि कुमार आजाद की 8 साल पहले बैरियाट्रिक सर्जरी हुई थी। उस वक्त डॉ. हाथी की फाइनेंशियल कंडीशन अच्छी नहीं थी, जब ये बात सलमान खान को पता चली तो उन्होंने उनके हॉस्पिटल का बिल भरा था। हालांकि, इस बात की जानकारी उपलब्ध नहीं है कि सलमान ने कितना बिल पे किया था। इतना ही नहीं मुंबई के सैफी अस्पताल के बैरियाट्रिक सर्जन डॉ. मुफ्फी लकड़ावाला ने डॉ. हाथी की सर्जरी फ्री में की थी। ऑपरेशन के बाद डॉ. हाथी सलमान खान से मिले थे और उनको थैंक्स कहा था। डॉ. हाथी का निधन 9 जुलाई को हार्ट अटैक की वजह से हुआ था।

कवि कुमार नहीं देते थे अपनी हेल्थ पर ध्यान..

- डॉ. लकड़ावाला ने एक एंटरटेनमेंट पोर्टल को दिए इंटरव्यू में डॉ. हाथी की हेल्थ से जुड़े कई खुलासे किए। उन्होंने बताया- डॉ. हाथी अपनी हेल्थ को लेकर सीरियस नहीं थे। उन्हें कई बार आगाह भी किया था कि अपनी सेहत का ध्यान रखो, लेकिन वे इग्नोर कर देते थे। एक्टिंग के लिए खुद को खतरे में डाल रहे थे डॉ. हाथी।

- डॉ. मुफ्फी ने बताया- '8 साल पहले मैंने उनकी सर्जरी की थी। उस वक्त उनका वजन 265 किलो था। जब उन्हें मेरे पास लाया गया था तब वे तकरीबन मृत हालत में थे। उनको 10 दिनों तक वेंटीलेटर पर रखना पड़ा था, वे वेंटीलेटर बिना सांस नहीं ले पा रहे थे।

- बैरियाट्रिक सर्जरी के जरिए उनका 140 किलो वजन कम किया गया। कुछ दिन बाद वे ठीक हो गए। वे शूटिंग के लिए सेट पर जाने लगे थे और एक नॉर्मल लाइफ जीने लगे थे। इसके बाद उन्‍हें फिर बैरियाट्रिक सर्जरी की सलाह दी गई, इससे उनका 90 किलो वजन कम हो सकता था, लेकिन वे राजी नहीं हुए। उन्‍हें लगा यदि वजन कम हो गया तो उन्हें काम नहीं मिलेगा।

- डॉ मुफ्फी ने बताया कि उन्‍होंने आजाद को पैडिंग का इस्‍तेमाल कर कैमरा फेस करने की सलाह दी थी लेकिन वे नहीं माने। सर्जरी के कुछ महीनों बाद उनका 20 किलो फिर बढ़ गया। वे 160 किलो के हो गए थे। इसके बावजूद वे बैरियाट्रिक सर्जरी नहीं कराना चाहते थे। अगर वे सर्जरी करा लेते तो शायद आज जिंदा होते।




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