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जेल में कैदियों से झाड़ू-पोछा से लेकर चप्पल बनवाने तक करवाए जाते हैं ऐसे ऐसे काम

हम बता रहे हैं जेल में कैदियों से कैसे-कैसे काम करवाए जाते हैं?

dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 07, 2018, 03:38 PM IST

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    यूटिलिटी डेस्क। आखिरकार सलमान खान को 48 घंटे बाद जमानत मिल गई। वे शाम तक जेल से रिहा हो सकते हैं। पिछले 48 घंटों से सलमान जोधपुर सेंट्रल जेल में थे। शुक्रवार को सलमान की जमानत पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी थी। डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज ने ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड मंगवाया था। बता दें कि सलमान खान को शिकार मामले में 5 साल की सजा सुनाई गई है।

    क्या आप जानते हैं कि जेल में कैदियों से क्या-क्या करवाया जाता है? उन्हें काम करने के एवज में कितने रुपए मिलते हैं? हम बता रहे हैं जेल में कैदियों से कैसे-कैसे काम करवाए जाते हैं? हर जेल का अलग मैन्यूअल होता है हालांकि सेंट्रल जेल में एक ही मैन्यूअल लागू होता है।

    स्किल्ड वर्कर को मिलते हैं 61 रुपए

    यरवदा सेंट्रल जेल, पुणे के पूर्व सुपरिंटेंडेंट योगेश के मुताबिक जेल में कैदियों को स्किल्ड, सेमी स्किल्ड और अनस्किल्ड के हिसाब से पेमेंट किया जाता है। स्किल्ड वर्कर को 61 रुपए प्रतिदिन दिए जाते हैं। सेमी स्किल्ड को 55 रुपए और अनस्किल्ड को 44 रुपए दिए जाते हैं।

    अंदर होती हैं फैक्ट्रियां, सिखाते हैं ये सब

    जेल में अलग-अलग फैक्ट्रियां होती हैं। जैसे चप्पल बनाने की फैक्ट्री, गमले बनाने की फैक्ट्री, टाइल्स बनाने की फैक्ट्री, कंबल बनाने की फैक्ट्री, फर्नीचर की फैक्ट्री। यहां पर बाकायदा टीचर्स होते हैं, जो कैदियों को सिखाते हैं। इसके अलावा कुछ स्किल्ड वर्कर होते हैं, वे भी इस काम में कैदियों की मदद करते हैं। काम करने के एवज में हर कैदी को रोजाना भत्ता दिया मिलता है। यह राशि 50 से 60 रुपए प्रतिदिन के बीच होती है। पैसा एक साथ दिया जाता है।


    झाड़ू-पोछा लगाने के लिए लगती है ड्यूटी
    फैक्ट्री में काम करने के अलावा अलग-अलग कामों के लिए भी ड्यूटी लगती है। कैदियों को झाडू-पोछा भी लगाना होता है। इसके लिए शिफ्ट के हिसाब से काम होता है। साफ-सफाई के साथ ही बागवानी, सब्जी लगाना, पानी डालना जैसे काम भी कैदियों को करना होते हैं। प्रिंटिंग प्रेस, सिलाई और कालीन बनाना भी यहां कैदियों को सिखाया जाता है।

    मिलता है एक ही मग, देखिए अगली स्लाइड में....

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    बाहर से कुछ नहीं ले जा सकते अंदर


    > हर राज्य में जेल के नियम-कायदे अलग होते हैं। यह राज्य सरकार निर्धारित करती है। हालांकि अधिकांश जेलों में बाहर से अंदर कुछ नहीं ले जाया जा

    सकता। जेल में आने पर कैदी की पूरी तलाशी ली जाती है। पैसे तक जमा करवा लिए जाते हैं। जेल में ही यूनिफॉर्म, चप्पल, मग, कंबल दिए जाते हैं।

    > एक ही मग का यूज सभी कामों में कैदी को करना होता है। कोई भी मादक पदार्थ अंदर नहीं ले जाए जा सकते। हालांकि कई बार इन नियमों को तोड़ते हुए ये चीजें जेल में अंदर पहुंचा दी जाती हैं। जेल में मोबाइल यूज करने पर भी मनाही होती है।

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    मार्केट में बेचते हैं सामान

    > जेल में कैदी जो सामान तैयार करते हैं, उनमें से अधिकतर का इस्तेमाल जेल प्रशासन ही कर लेता है। जैसे जो चप्पलें कैदी तैयार करते हैं, वही दूसरे

    कैदियों को दे दाती हैं। इसके अलावा कुछ सामान मार्केट में भी सेल किया जाता है। कई बार दूसरे गवर्नमेंट डिपार्टमेंट से कॉन्ट्रैक्ट पर काम मिलता है, इसे कैदियों से पूरा करवाया जाता है। कई जेलों में कैंटीन होती है। यहां कैदी जो पैसे खर्च कर सामान खरीद सकते हैं।

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