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मां ने कहा था - जान बचाकर भाग,और गांव छोड़कर मुंबई आ गए रवि किशन

रवि की जिंदगी में एक समय ऐसा भी था जब उन्हें भूखे पेट रात बितानी पड़ती थी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 18, 2018, 04:38 PM IST

    • बॉलीवुड डेस्क- रवि किशन न सिर्फ फिल्म इंटस्ट्री बल्कि देश की राजनीति में भी जाना पहचाना नाम है। भोजपुरी सिनेमा के सुपर स्टार की जिंदगी में एक समय ऐसा भी था जब उन्हें भूखे पेट ही रात बितानी पड़ती थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और एक्टिंग के अपने शौक को कामयाबी का जरिया बनाया। 17 जुलाई को रवि किशन का जन्मदिन है। उनके जिंदगी से जुड़े कुछ ऐसे किस्सों पर नज़र डालते है जिनका जिक्र उन्होंने अपने कई इंटरव्यूज में किया है।

      पिता चाहते थे दूध बेचे रवि

      -17 जुलाई 1969 में जन्में रवि का बचपन में नाम रविंद्र नाथ शुक्ला था। उनके पिता पंडित श्याम नारायण शुक्ला सांताक्रूज में दूध की डेयरी चलाते थे और वो चाहते थे कि रवि भी इसी काम को करे। लेकिन रवि के पिता और चाचा के बीच मतभेद की वजह से डेयरी बंद करनी पड़ी और पूरा परिवार वापस जौनपुर, यूपी लौट आया।उस समय रवि 10 साल के थे। यहां मिट्टी के कच्चे मकानों में रवि का बचपन बीता। उस समय रवि 10 साल के थे।

      बेल्ट से पीटते थे पिता, मां बोली जान बचाकर भाग जा

      -रवि ने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें एक्टिंग का शौक था, इसलिए गांव में ही रामलीला में रोल किया करते थे। रवि ने बताया था कि,' मैं रामलीला में सीता का रोल करता था, लेकिन पिता को ये बिल्कुल पसंद नहीं था। वे डांटते और मारते थे। मैं गांव में ही नाटकों में महिला किरदार भी प्ले करता था। इस पर पिता ने बेल्ट से पिटाई की थी और बोला था, ये नचनिया क्या बन रहे हो? इंटरव्यू के मुताबिक रवि के पिता एक्टिंग को लेकर आए दिन रवि की पिटाई किया करते थे। एक दिन मां ने 500 रुपए देकर रवि को बोला जान बचाकर घर से भाग जा। बस फिर क्या था, रवि गांव छोड़कर मुंबई आ गए।

      भूखे पेट गुजारी कई रातें

      -रवि ने एक इंटरव्यू में बताया था, जब मुंबई आए थे तो पैसों की काफी दिक्कत थी। बस का टिकट खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे, इसलिए ज्यादा से ज्यादा पैदल चलता था। इसके बाद काम ढूंढा और पैसे कमाना शुरू किया। कुछ समय बात मुंबई की एक चॉल में डेरा जमा लिया। काम करते थे तो पैसा मिलता, पैसा मिलता तो खाना की जुगाड़ होती। कई बार रात को भूखे ही सोना पड़ा। ज्यादातर रात का भोजन वड़ा-पाव ही होता था। करीब एक साल तक मुंबई में संघर्ष करने के बाद 1991 में एक बी ग्रेड फिल्म 'पितांबर' में काम करने का मौका मिला।

      जल्द ही नजर आएंगे एन.टी.आर की बायॉपिक में

      -आंध्र प्रदेश में 'भगवान' की तरह पूजे जाने वाले ऐक्टर एवं नेता एन. टी. रामाराव की बायोपिक आने वाली है। करीब सौ करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस फिल्म में भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार रवि किशन रामाराव के करीबी दोस्त रवि कांत नगाइच की भूमिका में नजर आएंगे । फिल्म की शूटिंग पिछले दिनों हैदराबाद में शुरू हो चुकी है। इसमें ऐक्ट्रेस विद्या बालन भी नजर आएंगी। वह एन. टी. आर. के पत्नी का किरदार निभाएंगी।

      इन भोजपुरी फिल्मों में किया काम

      -उन्होंने 'सइयां हमार' (2003), 'पंडित जी बताई ना बियाह कब होई' (2004), 'दूल्हा मिलल दिलदार' (2005), 'अब त बनजा सजनवा हमार' (2006), 'राम-बलराम' (2009), 'सत्यमेव जयते' (2010), 'पियवा बड़ा सतावेला' (2011), 'प्रेम विद्रोही' (2012), 'धुरंधर' (2013), 'पंडित जी बताई ना बियाह कब होई 2' (2015), 'लव और राजनीति' (2016) सहित अन्य भोजपुरी फिल्मों में काम किया है। भोजपुरी और हिंदी फिल्मों के साथ ही दूसरी भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया है

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