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जेल में उतरवा दिए गए थे संजय दत्त के कपड़े, फिर की थी जान लेने की कोशिश

संजय दत्त की बायोपिक 'संजू' के ट्रेलर में रणबीर कपूर न्यूड नजर आए हैं।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - May 30, 2018, 03:00 PM IST

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    'संजू' के ट्रेलर में न्यूड दिखें रणबीर कपूर।

    मुंबई. संजय दत्त की बायोपिक 'संजू' का ट्रेलर रिलीज हो गया है। 3.4 मिनिट के इस वीडियो में रणबीर कपूर, संजय दत्त की पूरी लाइफ हिस्ट्री बताते नजर आ रहे हैं। ट्रेलर में रणबीर फुली न्यूड भी दिखे हैं। दरअसल जब वे जेल के तो पूछताछ कर रहे अधिकारियों में उनके पूरे कपड़े उतवा लिए थे। यही नहीं जब वे जेल में थे संजय ने सलाखों में सिर मार-मार कर जान लेने की कोशिश भी की थी। ये सभी सीन 'संजू' के ट्रेलर में डाले गए हैं और रणबीर ने इस बखूबी प्ले किया है। आइए एक नजर डालते हैं संजू की जेल जर्नी पर।इस वजह से जेल गए थे संजय दत्त...


    - 1993 में 12 मार्च को मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इसके पीछे कई बॉलीवुड हस्तियों का नाम भी सामने आया। संजय दत्त को अबू सलेम और रियाज सिद्दीकी से अवैध बंदूक़ों की डिलीवरी लेने, उन्हें रखने और फिर नष्ट करने का दोषी माना गया था।
    - टाडा अदालत में पेश सुबूतों के आधार पर ये हथियार उस जखीरे का हिस्सा थे, जिन्हें बम धमाकों और मुंबई पर हमले के दौरान इस्तेमाल किया जाना था।
    - संजय ने अदालत को दिए अपने बयान में कहा था, "मैं अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित था। इन हथियारों को रखने का यही कारण था, मैं घबरा गया था और कुछ लोगों के कहने में आकर मैंने ऐसा किया।"

    जमानत के बीच संजय ने किया फिल्मों में काम
    - 1993 तक संजय 'थानेदार', 'सड़क', 'साजन' और 'खलनायक' जैसी फिल्मों से सुपरस्टार बन चुके थे। इसी साल अप्रैल में गिरफ्तार किया गया और फिर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 1995 में बेल पर रिहा किया लेकिन दो ही महीने बाद दिसंबर 1995 में उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया गया।
    - संजय के पिता सुनील दत्त के उनकी रिहाई की बहुत कोशिश की। समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह, शिव सेना सुप्रीमो बाल ठाकरे और कई बॉलीवुड नेताओं ने उनके पक्ष में बयान दिए। लंबी कानूनी जद्दोजहद के बाद 1997 में उन्हें फिर जमानत मिली।
    - दो साल का यह समय लंबा था और इस दौरान संजय ने करियर और पिता सुनील दत्त ने राजनीति में काफी कुछ खो दिया। संजय के केस की सुनवाई अब साल 2006 में होनी थी।
    - 1997 से 2006 के बीच संजय ने कई बड़ी फिल्मों में काम किया। इनमें 'दुश्मन', 'वास्तव', 'कांटे', 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' और 'परिणीता' जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड की पहली पंक्ति में पहुंचा दिया।
    - 31 जुलाई, 2007 को जब टाडा कोर्ट ने अभिनेता संजय दत्त को छह साल की सजा सुनाई, तो उन्होंने परिवार की सुरक्षा के लिए हथियार रखने की दलील दी। लेकिन इसके बावजूद अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया।

    जब जेल जर्नी के बीच संजय के करियर में आया डाउनफॉल
    - संजय दत्त का जेल जाने और आने का ऐसा सफर शुरू हुआ, जिसकी आलोचना सभी जगह हुई। 31 जुलाई को सजा सुनाए जाने के बाद संजय 2007 में दो बार जेल से जमानत पर बाहर आए और वापस गए। यह सिलसिला तब थमा, जब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी।
    - 2007 वही समय है, जब संजय की फिल्म 'लगे रहो मुन्नाभाई' सुपरहिट हो गई थी और वो 'शूटआउट एट लोखंडवाला' में एक ईमानदार एसीपी का किरदार निभा रहे थे। 2009 में उन्हें समाजवादी पार्टी की ओर से लोकसभा चुनाव लड़ने का भी प्रस्ताव मिला लेकिन अपने मामले को लेकर अनिश्चित संजय ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया।
    - इसके बाद उनके फिल्मी करियर में भी एक 'फॉल' आया। संजय की फिल्में लगातार फ्लॉप होने लगीं और फिर खराब फिल्मों से जूझते संजय को 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने टाडा अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए पांच साल की सजा सुनाई।
    - इसके बाद एक बयान में संजय ने कहा, "जो भी सजा मिली है, मैं उसे भुगतने को तैयार हूं। मैं कोई राजनेता नहीं हूं लेकिन एक राजनीतिक परिवार से हूं, शायद इसीलिए निशाने पर हूं।"
    - संजय को दी गई इस सजा के खिलाफ बॉलीवुड के कई निर्माताओं ने अपील की बात भी रखी थी क्योंकि उन पर कई करोड़ की फिल्मों का भविष्य टिका था।
    - संजय के जेल जाने से विधु विनोद चोपड़ा, राजकुमार हिरानी (पीके), के एस रविकुमार (पुलिसगिरी), रेन्सिल डिसिल्वा (उंगली) और अपूर्वा लाखिया (जंजीर) जैसे फिल्म निर्माता-निर्देशकों को भारी नुकसान होता।
    - राजकुमार हिरानी ने कहा था, "कानून सबसे ऊपर है, लेकिन इसका भी ख्याल रखा जाना चाहिए कि किसी फैसले से फिल्म निर्माताओं के पैसे खराब न हों या किसी तरह से इसकी भरपाई हो।"
    - अदालत ने ऐसी किसी भी अपील को मान्यता नहीं दी और संजय दत्त को सरेंडर के लिए एक महीने का समय दिया। इस दौरान संजय दत्त ने अपनी रुकी हुई फिल्मों की शूटिंग पूरी की।

    जब पत्नी की खराब तबीयत के लिए पैरोल पर बाहर आए संजय
    - संजय जेल जाने के बाद भी विवादों में रहे। यह विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने पैरोल पर बाहर आना शुरू किया। संजय दिसंबर 2014 को अपनी पत्नी मान्यता की खराब तबीयत की बात कहकर बाहर आए और फिर उनकी यह पैरोल तीन बार बढ़ाई गई।
    - इसे लेकर मीडिया में काफी सवाल उठे और यह विवाद इतना बढ़ा कि महाराष्ट्र सरकार ने पैरोल के नियम सुधारने के लिए प्रस्ताव भी सदन में रखा। वहीं संजय के जीवन पर बायोपिक बना रहे राजकुमार हिरानी उनसे लगातार चिट्ठियों और दूसरे माध्यमों से संपर्क में रहे।
    - फाइनली फरवरी 2016 में संजय को निर्धारित सजा से 105 दिन पहले पुणे की यरवदा जेल से अच्छे आचरण की वजह से रिहा कर दिया गया।

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