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'इंसाफ का तराजू' के रेप सीन की शूटिंग के दौरान नर्वस थे राज बब्बर, जीनत अमान ने कई बार कराई थी रिहर्सल

राज बब्बर ने खुद 2012 में एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में यह किस्सा सुनाया था।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 23, 2018, 01:59 PM IST

'इंसाफ का तराजू' के रेप सीन की शूटिंग के दौरान नर्वस थे राज बब्बर, जीनत अमान ने कई बार कराई थी रिहर्सल

मुंबई. राज बब्बर के 66वें जन्मदिन पर हम आपको उनके शुरुआती करियर का एक किस्सा बताते हैं। बात 1980 में रिलीज हुई फिल्म 'इंसाफ का तराजू' के सेट की है। डायरेक्टर बी. आर. चोपड़ा की इस फिल्म में राज बब्बर के साथ जीनत अमान और पद्मिनी कोल्हापुरे अहम भूमिका में थीं। फिल्म के एक सीन में राज जीनत का रेप करते नजर आते हैं। लेकिन खुद राज की मानें तो वे इस सीन की शूटिंग के वक्त बहुत घबराए हुए थे, तब जीनत ने उनका हौसला बढ़ाया था। कई बार रिहर्सल के बाद की थी शूटिंग...

- बब्बर ने 2012 में एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में कहा था, "मैं न्यूकमर था और वे (जीनत) बड़ी स्टार थीं। मैं अपने मेंटर बी. आर. चोपड़ा साहब को साइड में ले गया और गुजारिश की कि वे सीन में कुछ ऐसा बदलाव कर दें कि वह ज्यादा बेकार न लगे। क्योंकि, जीनत जी के कद को लेकर मैं नर्वस था। मैं नहीं चाहता था कि करियर की शुरुआत में ही मुझपर बदतमीज होने का धब्बा लग जाए। जब जीनत जी ने मेरी नर्वसनेस के बारे में सुना तो मामला उन्होंने अपने हाथ में ले लिया। हमने न केवल उस सीक्वेंस को स्क्रिप्ट के मुताबिक शूट किया, बल्कि शूटिंग से पहले कई बार इसकी रिहर्सल भी की।"

जीनत ने कहा था- सिर्फ सीन की डिमांड को याद रखें

- राज बब्बर के मुताबिक, शूटिंग के दौरान जीनत के साथ हाथापाई करने में उन्हें डर लग रहा था। लेकिन खुद जीनत ने उन्हें कहा था कि वे सिर्फ सीन की डिमांड को ध्यान में रखें और जो जरूरी हो वो करें। बब्बर आगे कहते हैं, "जब सीन शूट होना शुरू हुआ, तो मेरी जीनत के साथ खूब हाथापाई, मारपीट हुई, मैंने उन्हें इधर-उधर फेंका भी, लेकिन उन्होंने उफ्फ तक नहीं किया। सीन का पूरा क्रेडिट उन्हें जाता है। ऐसे इंसिडेंट आपको हमेशा आपके को-स्टार की याद दिलाते रहते हैं।"

उत्तर प्रदेश में हुआ था राज बब्बर का जन्म

- राज बब्बर का जन्म 23 जून, 1952 को टूंडला, उत्तरप्रदेश में हुआ था। वे एनएसडी के 1975 के बैच के स्टूडेंट रहे हैं। एनएसडी में ट्रेनिंग के दौरान राज बब्बर स्ट्रीट थिएटर में इन्वॉल्व हो गए थे। बाद वे मुंबई पहुंचकर उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू किया। 1977 में उनकी डेब्यू फिल्म 'किस्सा कुर्सी का' रिलीज हुई थी। इसके बाद वे 'कलयुग' (1981), 'राज' (1981), 'प्रेम गीत' (1981), 'दूल्हा बिकता है' (1982), 'भीगी पलकें' (1982), 'माटी मांगे खून' (1984), 'एतवार' (1985), 'संसार' (1987), 'जख्मी औरत' (1988), 'खिलाड़ी 786' (2012) और 'तेवर' (2015) सहित कई फिल्मों में नजर आए। फिलहाल, वे कांग्रेस पार्टी के एक्टिव कार्यकर्ता हैं। राज बब्बर तीन बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। मार्च 2018 में करीब डेढ़ साल के कार्यकाल के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया।

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