Home »News» Marathi Film Sairat Director Nagraj Manjule Failed In 10th Class Know His Struggle Story

10वीं में दो बार फेल हुए थे सैराट के डायरेक्टर, कहा था- परीक्षा में पास होना नहीं बल्कि खुश रहना कामयाबी है

कई मराठी फिल्मों को डायरेक्ट कर चुके नागराज मंजुले को मराठी में 100 में से सिर्फ 42 नंबर ही मिले थे।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 15, 2018, 01:50 PM IST

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    बॉलीवुड डेस्क। मराठी फिल्म 'सैराट' का हिंदी में रीमेक 'धड़क' का ट्रेलर हाल ही में रिलीज किया गया है। इस फिल्म में जाह्नवी कपूर और ईशान खट्टर हैं और इसका डायरेक्शन शशांक खेतान ने किया है। करण जौहर के प्रोडक्शन हाउस धर्मा प्रोडक्शन में बनीं धड़क फिल्म जल्द ही बड़े पर्दे पर आने वाली है। सैराट फिल्म 2016 में रिलीज की गई थी, जिसे काफी पसंद किया गया था। इस फिल्म में वो सबकुछ था जो एक परफेक्ट फिल्म में होता है और यही कारण है कि इसका हिंदी रीमेक भी बनाया गया। इस फिल्म को नागराज मंजुले ने डायरेक्ट किया था और ये अभी तक एक से बढ़कर एक मराठी फिल्मों को डायरेक्ट कर चुके हैं, लेकिन इस बात को बहुत कम जानते हैं कि मराठी फिल्मों का डायरेक्शन करने वाले नागराज को 10वीं में मराठी में सिर्फ 100 में से 42 नंबर ही मिले थे। इतना ही नहीं नागराज 10वीं में दो बार फेल भी हुए थे।

    फेसबुक पर लिखा- पास होना नहीं बल्कि खुश रहना कामयाबी

    - नागराज मंजुले की 10वीं की मार्कशीट सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई। जबकि 3 साल पहले ही फेसबुक पर बने नागराज मंजुले के पेज पर भी इस मार्कशीट को शेयर किया गया था।
    - मार्कशीट शेयर करते समय लिखा गया कि 'मैं 10वीं में दो बार फेल हुआ था। ऐसा नहीं है फेल होने से सबकुछ खत्म हो गया। मैंने कोशिश की होती तो अगली क्लास में गया होता, पर ऐसा नहीं हुआ।'
    - इसमें आगे लिखा गया '10वीं,12वीं, एमपीपीएससी, यूपीएससी जैसी परीक्षाएं आखिरी नहीं है। संसार में खुशी से रहना ही सबसे बड़ी कामयाबी है।'
    - यही मार्कशीट की फोटो इंस्टाग्राम पर भी नागराज मंजुले के पेज पर शेयर की गई और यही लिखा गया।

    गणित में 150 में से 32, अंग्रेस में 100 में से 06

    - नागराज मंजुले की मार्कशीट के मुताबिक, उनको गणित और अंग्रेजी में सबसे कम नंबर मिले थे, जबकि विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में उन्हें काफी अच्छे नंबर आए थे।
    - नागराज को 10वीं गणित में 150 में से 32 नंबर मिले थे तो वहीं अंग्रेजी में उन्हें 100 में से सिर्फ 06 नंबर ही मिले थे।
    - उनको मराठी में 100 में से 42, हिंदी में 100 में से 40, विज्ञान में 150 में से 75 और सामाजिक विज्ञान में 100 में से 73 नंबर आए थे।
    - उन्हें 10वीं में 700 में से कुल 268 नंबर ही मिले थे और 38.28% ही आए थे।

    मैं फेल हुआ, इसलिए सफल हो पाया

    - नागराज एक इंटरव्यू में अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि 10वीं क्लास में फेल होना, मानो जिंदगी खत्म हो जाना। उस जमाने में 10वीं फेल होने पर लोग तंज कसते थे, कहते थे कि ये कुछ नहीं कर पाएगा।
    - लेकिन मेरे पिता ने मुझे समझाया कि परीक्षा आखिरी नहीं है। तुम भी जीवन में कामयाबी हासिल करोगे।
    - उन्होंने कहा कि अच्छा हुआ मैं फेल हो गया। क्योंकि अगर पास हो जाता तो आज जो मैंने हासिल किया है क्या वो कर पाता?
    - उन्होंने बताया कि फेल होने के बाद उनके सारे दोस्त अपने-अपने रास्तों पर चल पड़े और मैं अकेला ही रह गया। मैं अकेला बैठकर खूब सोचता था, किताबें पढ़ता था और इन्हीं सब चीजों के कारण मैं डायरेक्टर बन पाया।

    शिक्षा हमें स्कूल से नहीं बल्कि जिंदगी से मिलती है

    - नागराज इस इंटरव्यू में आगे बताते हैं कि फेल होना कोई शर्म की बात नहीं है और न ही पास होकर हम कोई बड़ा तीर मार मार लेते हैं। असल शिक्षा हमें स्कूल नहीं बल्कि जिंदगी से मिलती है।
    - उन्होंने बताया कि अगर हम अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो उसके लिए आइडिया हमें स्कूल से नहीं बल्कि हमारे तजुर्बे और बुद्धि से आता है।

    क्या है फिल्म सैराट की कहानी?

    - नागराज द्वारा डायरेक्ट की गई सैराट फिल्म की कहानी एक अमीर और गरीब लड़के की इमोशनल प्रेम कहानी है। लड़का गरीब है, उसे ऊंची जाति वाली जमींदार की लड़की से प्रेम हो जाता है। जमींदार को प्रेम का पता चल जाता है। इसके बाद सोसाइटी और जमींदार से भागते हुए प्रेम और उसके संघर्ष को दिखाया गया है।
    - इस फिल्म में रिंकु राजगुरु, आकाश ठोसर मुख्य किरदार में है। सिर्फ 4 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 110 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की थी।

    कौन हैं नागराज?

    - नागराज का जन्म सोलापुर जिले के करमाला तहसील के पिछड़े गांव जेऊर में हुआ था।
    - घर में गरीबी होने के कारण नागराज के पिता पोपटराव से उनके भाई बाबुराव मंजुले ने उन्हें गोद लिया।
    - बचपन से ही नागराज को फिल्में देखने और कहानियां सुनने का शौक था।
    - इसलिए स्कूल बंक कर वे अक्सर अपने दोस्तों के साथ फिल्म देखने जाते थे।

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