Home »News» Manisha Koirala Was Not Ready To Play Ranbir Kapoor's Mother Role

सिर्फ 10 साल छोटे रणबीर की मां का रोल नहीं करना चाहती थीं मनीषा कोइराला,फिर होना पड़ा राजी

फिल्म 'संजू' में नरगिस दत्त का रोल प्ले कर रही हैं मनीषा कोइराला। 29 जून को रिलीज़ होगी फिल्म।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 12, 2018, 12:08 PM IST

सिर्फ 10 साल छोटे रणबीर की मां का रोल नहीं करना चाहती थीं मनीषा कोइराला,फिर होना पड़ा राजी

संजय दत्त की बायोपिक ‘संजू’ में नरगिस दत्त का रोल मनीषा कोइराला प्ले कर रही हैं। फिल्म रिलीज की दहलीज पर है। इसके अलावा मनीषा ने 'प्रस्थानम’ की रीमेक की शूटिंग भी शुरू कर दी है। वे चैरिटी के काम और कैंसर अवेयरनेस को लेकर अकसर नेपाल भी आती-जाती रहती हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने फिल्म को लेकर दिलचस्प बातें बताईं...

यह फिल्म आपको कैसे मिली?

पिछले साल की बात है। मैं नेपाल में थी। राजकुमार हिरानी ने मुझे अप्रोच किया और बताया कि वे मुझसे नरगिस जी का रोल करवाना चाहते हैं। इस पर मेरे मन में मिक्सड रिएक्शन आए। खुशी इस बात की थी कि नरगिस दत्त जैसी लेजेंड्री एक्ट्रेस का रोल प्ले करने का मौका किस्मत से ही मिलता है। डर इस बात का था कि मैं कहीं ‘मां’ वाले रोल के लिए जल्दी तो नहीं कर रही। वैसे भी यह इंडस्ट्री हीरोइनों को बहुत जल्दी मां के रोल में सेट कर देती है। ऊपर से तुर्रा यह कि रणबीर कपूर से मैं बस दस साल बड़ी हूं। ऐसे में उनकी मां का किरदार निभाना सही रहेगा, लिहाजा बाद की मीटिंग के लिए मैं राजकुमार हिरानी जी को ना कहने गई थी। जब मैं उनके ऑफिस गई तो वहां के पॉजिटिव माहौल ने मेरा मन बदल दिया। उनकी टीम में सभी बड़े अच्छे और शांत स्वभाव के हैं। नतीजतन, मैंने मन बना लिया कि यह रोल और फिल्म तो करनी ही है।

सुनील दत्त की मां का रोल खुद नरगिस जी ने प्ले किया था, मतलब यह कि कैपेबल कलाकारों को तो इस तरह के चैलेंजिंग रोल मिलते ही रहे हैं निभाने को। लिहाजा दिक्कत की तो कोई बात नहीं थी?

वह तो है, मगर हम एक्ट्रेसेज के मामले में जरा संभल कर चलना पड़ता है। वरना यह इंडस्ट्री तो बहुत जल्दी मां बना देती है हम जैसों को। एक्टर्स को तो खुद से तीन दशक छोटी उम्र की हीरोइनों के साथ भी रोमांस करने का मौका दे दिया जाता है। इसलिए थोड़ा संभल कर चलना पड़ता है।

बहरहाल, इस कैरेक्टर की स्किन में जाने के लिए किन चीजों से मदद मिली?

बुनियादी तौर पर तो डायरेक्टर साहब की रिसर्च ने सारी मुश्किलें हल कर दीं। उनके पास इतना रिसर्च था कि कैरेक्टर का सुर पकड़ने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। रही सही कसर प्रिया दत्त से मिली मदद ने पूरी कर दी। मैं उन्हें अच्छी तरह से जानती हूं। मैंने उनके एनजीओ के लिए काम भी किया है। आगे भी करती रहूंगी।

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