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स्कूल फीस के लिए बर्तन मांजे, पंक्चर बनाए, ऐसी है इस एक्टर के संघर्ष की कहानी

एक्टिंग में नाम कमा चुके यशपाल शर्मा अब फिल्म डायरेक्ट करने जा रहे हैं।

उमेश कुमार उपाध्याय | Last Modified - May 18, 2018, 09:37 AM IST

स्कूल फीस के लिए बर्तन मांजे, पंक्चर बनाए, ऐसी है इस एक्टर के संघर्ष की कहानी

एंटरटेनमेंट डेस्क : साइकिल के पंचर बनाए, कोठियों में बर्तन धोए, किराने की दुकान पर काम किया और आटे की चक्की चलाई। ये है लगान और 'गंगाजल' जैसी हिट फिल्मों में काम कर चुके यशपाल शर्मा के संघर्ष की कहानी। एक्टिंग में नाम कमा चुके यशपाल शर्मा अब फिल्म डायरेक्ट करने जा रहे हैं। ये फिल्म हरियाणआ के शेक्सपीयर कहे जाने वाले फोक आर्टिस्ट और कवि लखमीचंद के जीवन पर आधारित होगी। यशपाल शर्मा खुद भी हरियाणा से हैं। DainikBhaskar.com से एक्सक्लूसिव बातचीत में यशपाल शर्मा ने अपने करियर, संघर्ष और कामयाबी के बारे में बताया। एक नाटक देखने घऱ से भाग गए थे यशपाल शर्मा...

यशपाल शर्मा ने बताया कि 22 साल की उम्र में वे हरियाणा के हिसार में अपने घर से भागकर दिल्ली आ गए थे। एक्टिंग को लेकर ऐसी धुन थी कि अखबार में नाटक 'अंधा युग' के मंचन की खबर पढ़कर इसे देखने का मन बना लिया और निकल पड़े। ये नाटक उन्हें इतना पसंद आया था कि 4 महीने तक लौटकर घर नहीं गए। चार महीने बाद जब वे घर लौटे तो लोगों ने पूछा -भई कहां गया था? क्या करने गया था? जब यशपाल ने पूरी कहानी बताई और कहा कि एक्टिंग लाइन में जाना चाहते हैं तो घर में कोई खुश नहीं हुआ। घरवालों को लगता था कि एक्टिंग नौटंकी है, इसमें कोई पैसा नहीं मिलेगा।

पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए किए पार्ट टाइम जॉब

यशपाल ने बताया कि 10वीं पास करने के बाद उनकी मदर की डेथ हो गई थी। पिताजी लापरवाह थे तो आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए खुद पार्ट टाइम काम करना शुरू किया। कोठियों में बर्तन मांजे, साइकिलों में पंचर लगाए, आटे की चक्की और किराने की दुकान में भी काम किया। ऐसे ही संघर्ष करते-करते यशपाल दिल्ली में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) पहुंचे। NSD में पढ़ाई पूरी करके जब यशपाल घर पहुंचे तो गांव वाले पूछने लगे-फिल्मों में कब आओगे? लोग चिढ़ाते थे, पूछते थे कि जब फिल्म की ट्रेनिंग ले ली तो फिल्मों में क्यों नहीं आते? उन्हें सब कुछ झूठ लगता था। खैर, पढ़ाई के बाद 3 सितंबर, 1996 को मुंबई आ गए।

फिल्म कर रहे हैं, किसी को यकीन नहीं हुआ
यशपाल की पहली फिल्म थी 'हजार चौरासी की मां'...फिर उन्हें 'शूल' मिली। तीसरी फिल्म थी फिल्म 'अर्जुन पंडित' । यशपाल शर्मा को जब इसमें काम मिला तो उन्होंने घर पर फोन कर बताया कि सनी देओल के साथ फिल्म की शूटिंग कर रहा हूं। लेकिन किसी को यकीन नहीं हुआ। बस इतना ही कहा- अपना ध्यान रखना। जब पर्दे पर दिखने लगे तब जाकर घर वालों को विश्वास हुआ।

2018 में आएंगी 3 फिल्में
इस साल कौन सी फिल्में आने वाली हैं इस सवाल पर यशपाल ने बताया -'मैंने तीन-चार फिल्मों की शूटिंग की है। वे इस साल रिलीज होंगी। मेरी और जिम्मी शेरगिल स्टारर बायोपिक फिल्म 'एसपी चौहान एन अनटोल्ड स्टोरी' अगस्त में रिलीज होगी। इसकी कास्टिंग मैंने की है। मनोज झा ने डायरेक्ट की है। दूसरी फिल्म विजय भोला निर्देशित 'मिस्टर पानवाला' है, इसमें लखनऊ के पानवाले का रोल मेरा है। तीसरी बांग्ला फिल्म 'फागुन हवाएं' है। इसके अलावा एक तिग्माशूं धूलिया की फिल्म 'मिलन टाकीज' है, जो अगले साल आएगी।

डायरेक्शन में डेब्यू कर रहे यशपाल
यशपाल शर्मा अब डायरेक्शन करने जा रहे हैं। वे इसकी तैयारी डेढ़ साल से कर रहे हैं। ये हरियाणवी कवि पंडित लखमीचंद के जीवन पर आधारित बायोपिक, हिस्टोरिकल ड्रामा फिल्म है। यशपाल ने बताया कि चूंकि कहानी सौ-सवा सौ साल पहले की है इसलिए उन्हें इसके लिए बहुत रिसर्च करना पड़ा। अब कहानी लिखी जा चुकी है। म्यूजिक पर काम चल रहा है। म्यूजिक खत्म होते ही दो महीने कास्ट्यूम और लोकेशन पर काम होगा। उसके बाद शूटिंग शुरू होगी। इसके लेखक राजू मान हैं, प्रोड्यूस खुद यशपाल कर रहे हैं। लखीमचंद की भूमिका यशपाल ही निभाएंगे। रणदीप हुड्‌डा और रघुवीर यादव की गेस्ट अपीयरेंस होगी। यशपाल के मुताबिक अब उनका फोकस डायरेक्शन पर ही होगा। हालांकि बीच-बीच में एक्टिंग भी करते रहेंगे।

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