Home »News» Death Anniversary 18th July Superstar Rajesh Khanna Aka Kaka Last Recorded Message

'आनंद' की तरह मौत से पहले राजेश खन्ना ने रिकॉर्ड किया था मैसेज, बोला था-पत्थर तो बहुत मिलते हैं लेकिन दिल नहीं मिलता

राजेश खन्ना की आखिरी फिल्म रियासत उनके निधन के दो साल बाद 18 जुलाई 2014 को रिलीज हुई थी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 18, 2018, 04:42 PM IST

    • राजेश खन्ना की अंतिम यात्रा में 9 लाख से ज्यादा फैन्स शामिल हुए थे।
    • काका ने कुल 163 फिल्माें में काम किया, जिसमें 105 फिल्में सुपरहिट रहीं।

    बॉलीवुड डेस्क.राजेश खन्ना की आज 6वीं पुण्यतिथि है। 18 जुलाई 2012 काे लम्बी बीमारी के बाद राजेश खन्ना ने अपने घर आशीर्वाद में आखिरी सांस ली थी। बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना ने अपने निधन से पहले परिवार, दोस्तों और चाहने वालों के लिए फिल्म आनंद की तरह ही एक वॉइस मैसेज रिकॉर्ड किया था। जिसे उनके चाैथे पर मौजूद सभी लोगों के सामने सुनाया गया था।

    थिएटर में मिला था जूनियर आर्टिस्ट का रोल :काका को पहला रोल थिएटर में मिला था। जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर उन्हें केवल एक डायलॉग बोलने मिला था, लेकिन वे आधा डायलॉग ही बोल पाए और भूल गए। लेकिन इसके बाद उन्होंने ठान लिया था कि कुछ कर दिखाना है।

    - 1965 में हुए यूनाईटेड प्रोड्यूसर्स फिल्मफेयर टैलेंट कॉन्टेस्ट में 10 हजार लड़कों ने हिस्सा लिया। चुने गए 8 फाइनलिस्ट के बीच राजेश खन्ना ने यह कॉन्टेस्ट जीता था।

    अपने पहले स्क्रीन टेस्ट की सुनाई थी कहानी :इस मैसेज के दौरान राजेश खन्ना ने टैलेंट हंट में चुने जाने की कहानी शेयर की थी। उन्होंने मैसेज में कहा- "बड़े बड़े प्रोड्यूसर्स थे। चोपड़ा साहब, बिमल रॉय, शक्ति सामंत। मैं सामने एक कुर्सी पर बैठा था, वे बड़ी सी टेबल के पार बैठे थे। ऐसा लग रहा था कोर्ट मार्शल हो रहा है, क्योंकि सामने अकेली एक कुर्सी थी। मैंने कहा- मैंने डायलॉग तो पढ़ा है, लेकिन आपने नहीं बताया कि इसका कैरेक्टराइजेशन क्या है। यह सुनने के बाद चोपड़ा साहब ने मुझसे कहा कि- तुम थिएटर से हो।"

    - बाद में जजेस के पैनल ने उनसे अपना कोई डायलॉग सुनाने को कहा। तब राजेश ने थिएटर में किए एक प्ले 'मुझको यारों माफ करना' का डायलॉग सुनाया।

    इस डायलाॅग के कारण जीते थे काका :राजेश खन्ना जिस डायलॉग को बोलकर जीते थे, वह कुछ ऐसा था- "हां मैं कलाकार हूं। हां मैं कलाकार हूं। क्या करोगे मेरी कहानी सुनकर। आज से कई साल पहले होनी के बिकाने से एक ऐसा प्याला पी चुका हूं, जो मेरे लिए जहर था औरों के लिए अमृत। एक ऐसी बात जिसका इकरार करते हुए मेरी जुबां पर छाले पड़ जाएंगे, लेकिन फिर भी कहता हूं कि जब मैं छोटा था तो एक खौफनाक वाकया पेश आया।

    भयानक आग में मैं फंस गया, जब जिंदा बचा तो मालूम हुआ कि मैं बदसूरत हो गया हूं। जैसे सुहानी सुबह डरावनी रात में पलट गई हो। मैं बाहर जाने से घबराने लगा। घर पर बैठकर गीत बनाने लगा। जितना ही भयानक था मेरा चेहरा, उतने ही मधुर थे मेरे गीत। दुनिया ने मुझे दुत्कारा लेकिन मेरे गीतों से प्यार करने लगी। अौर मैं चिल्लाता रहा कि तुम्हें चांदनी रातों से है मोहब्बत और मैं आंखों से बरसाता हूं सितारे। मेरे गीतों ने हजारों को लूटा, मेरी मुलाकात की मिन्नतें होती रहीं। पर मैं, मैं किसी से मिलता।

    एक दिन एक खत आया, मैंने तुम्हारे गीतों में शांति पाई है, अगर मुलाकात न दोगे, न जाने क्या कर बैठूंगी। मुझे लगा, ये खूबसूरत हसीना इसे भुना हुआ अपना ये बदसूरत चेहरा दिखाकर पूरी ताकत से इंतकाम लूं। मैंने उसे बुलाया और वो आई। कितनी खूबसूरत और हसीन, शबनम से भी मुलायम, मैं जैसे मासूम के सामने मायूसी।

    मैं चेहरा छुपाकर बातें करता रहा। मैंने शादी का प्रस्ताव पेश किया आैर वह खुशी से बोली हां मुझे मंजूर है। मैं खुद सहम गया, मैंने चिल्लाकर पूछा कौन हो, कहां से आई हो तुम। उसने धीरे से आंसू बहाते हुए कहा - मैं तो एक अंधी हूं। मैंने उसकी आंखों में देखा, उसकी आंखों में इश्क था। तब मैंने कहा- जो तेरी निगाह का बिस्मिल नहीं, वो कहने को दिल तो है लेकिन दिल नहीं। "

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