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'डॉन' में अमिताभ का बॉडी डबल बना था ये विलेन, कैसे हुई मौत आज भी है रहस्य

अजीबोगरीब हेयर स्टाइल, दांत, बालों के रंग के साथ विचित्र तरीके से हंसते हुए डायलॉग बोलना ही माणिक की पहचान थी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 18, 2018, 06:00 AM IST

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    एक फिल्म के सीन में अमिताभ के साथ माणिक ईरानी उर्फ बिल्ला।

    मुंबई।80 और 90 के दशक की फिल्मों में कई ऐसे विलेन भी नजर आए, जिन्होंने छोटे रोल करने के बावजूद अपनी पहचान दर्शकों के जेहन में छोड़ी है। इन्हीं में से एक हैं माणिक ईरानी, जिन्हें लोग 'बिल्ला' के नाम से भी जानते हैं। अजीबो-गरीब वेशभूषा, हेयर स्टाइल, दांत, बालों के रंग के साथ विचित्र तरीके से हंसते हुए डायलॉग बोलना ही माणिक की पहचान थी। माणिक अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन उनकी मौत कैसे हुई, इस बारे में साफतौर पर कोई जानकारी मौजूद नहीं है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि 90 के दशक में ज्यादा शराब पीने की वजह से उनकी मौत हुई, तो कुछ इसे एक्सीडेंट बताती हैं। वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में ऐसा दावा भी किया गया कि उन्होंने सुसाइड किया था।'डॉन' में थे अमिताभ बच्चन के बॉडी डबल...


    1978 में डायरेक्टर चंद्रा बारोट की फिल्म 'डॉन' रिलीज हुई थी। अमिताभ बच्चन, प्राण, जीनत अमान, इफ्तेखार, कमल कपूर और जगदीश राज जैसे एक्टर्स ने इसमें काम किया था, जिन्हें क्रेडिट भी दिया गया था। लेकिन कहा जाता है कि माणिक ईरानी इस फिल्म के एक्शन सीन्स के लिए अमिताभ बच्चन के बॉडी डबल थे। हालांकि, उन्हें क्रेडिट नहीं दिया गया था।


    सुभाष घई की 'कालीचरण' से मिली पहचान...
    माणिक को असली पहचान मिली सुभाष घई की फिल्म कालीचरण से। इसमें उन्होंने गूंगे हत्यारे का रोल प्ले किया था। यह रोल इतना पॉपुलर हुआ कि 'नटवरलाल' में भी उन्हें गूंगे का किरदार ही मिला। बाद की दो-तीन और फिल्मों में भी माणिक जब सिर्फ लड़ते ही नजर आए तो लोगों को लगने लगा था कि शायद यह रियल लाइफ में भी गूंगा ही है। माणिक ने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।


    ऐसे पड़ा था 'बिल्ला' नाम...
    माणिक फ़िल्मी दुनिया का जाना-पहचाना चेहरा तो थे, लेकिन वे असली नाम की बजाय 'बिल्ला' नाम से पॉपुलर हुए। दरअसल, माणिक ने डायरेक्टर सुभाष घई की फिल्म 'हीरो' में बिल्ला नाम का किरदार निभाया था, जिसे लोगों ने इतना पसंद किया कि यह नाम ही माणिक की पहचान ही बन गया। 1983 में रिलीज हुई इस फिल्म में जैकी श्रॉफ, मीनाक्षी शेषाद्रि, शम्मी कपूर, संजीव कुमार, शक्ति कपूर और मदन पुरी का भी अहम रोल था।


    ज्यादातर फिल्मों में बने भाड़े के गुंडे...
    माणिक ईरानी को 'पाप और पुण्य' (1974), 'त्रिशूल' (1978), 'जॉनी आई लव यू' (1982), 'नास्तिक' (1983), 'कर्मा' (1986), 'जख्म' (1989) और 'शानदार' (1990) जैसी कई फिल्मों में भाड़े के गुंडे के किरदार में देखा गया था। माणिक ने 1976 में फिल्म 'कालीचरण' में मदन पुरी के बेटे का रोल किया था। इसके अलावा, 'शान' (1980) में वे शाकाल (कुलभूषण खरबंदा) के असिस्टेंट के रोल में दिखाई दिए थे।


    जबरदस्त डायलॉग्स भी बोले...
    माणिक को उनके किरदार ही नहीं, डायलॉग डिलीवरी के लिए भी जाना जाता था। फिल्मों में उन्होंने कई फेमस डायलॉग्स भी बोले। उनके फेमस डायलॉग्स में 'हीरो' फिल्म का 'आशिक की जगह जमीन पे नहीं...ऊपर होती है' के अलावा फिल्म 'पाप को जलाकर राख कर दूंगा' में 'मैं इस हरामजादे की वो हालत बनाऊंगा कि वैद और हकीम भी परेशान हो जाएंगे और सोचेंगे कि थोबड़ा कौन-सा है और हाथ पैर कौन-से हैं?

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