Home »TV »Latest Masala» TV Actor Rajesh Puri Lesser Known Life Facts

ये TV एक्टर बोला- मिल रहा है मुझे काम, मोहताज नहीं हूं खाने का

नेशनल चैनल के धारावाहिक 'हमलोग' में लल्लू की भूमिका निभाकर राजेश पुरी इतने पॉपुलर हुए कि उन्हें घर-घर में पहचाना जाने लग

उमेश कुमार उपाध्याय | Last Modified - Dec 17, 2017, 07:57 AM IST

  • ये TV एक्टर बोला- मिल रहा है मुझे काम, मोहताज नहीं हूं खाने का
    +3और स्लाइड देखें
    राजेश पुरी।

    नेशनल चैनल के धारावाहिक 'हमलोग' में लल्लू की भूमिका निभाकर राजेश पुरी इतने पॉपुलर हुए कि उन्हें घर-घर में पहचाना जाने लगा। इसके बाद उन्होंने कई धारावाहिकों में काम किया और कर भी रहे हैं। उन्होंने कई फिल्मों में भी अभिनय किया। लेकिन आज राजेश पुरी कहां हैं? किन कामों में व्यस्त हैं? कैसे गुजारा कर रहे हैं? आदि मुद्दों पर उनसे बातचीत:

     

     

     


    लोगों को लगता है कि आज लल्लू जैसी पॉपुलैरिटी नहीं है और उतना काम भी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में खाने-पीने के लिए मोहताज होंगे? आखिर शुभचिंतकों को बताना चाहेंगे कि आज कितनी मजे की लाइफ एंज्वाय कर रहे हैं?
    पहले एक ही चैनल था- दूरदर्शन। अगर उस पर मेरा एक सीरियल प्रसारित हो रहा है, तब दर्शकों को लगता था कि मैं छाया हुआ हूं। आज 200 चैनल हो गए हैं। अभी 10 प्रोग्राम करूं, तब भी लोग कहेंगे कि क्या बात आजकल राजेश पुरी दिखते ही नहीं हैं। काम तो पहले जितना ही कर रहा हूं। इसमें इतना आ जाता है कि मेरा स्टैंडर्ड ऑफ लीविंग मेनटेन रहता है। जिन लोगों को यह गलतफहमी है कि खाने के लिए मोहताज हूं या सड़क पर आ गया हूं... उन्हें बता दूं कि काम बंट गया है, इसलिए मुझे नहीं देख पाते। हां, मेरे काम को फॉलो करेंगे तो उन्हें लगेगा कि आज भी उतना ही काम कर रहा हूं। 

     

     

     

     

     

    राजेश पुरी ने बताया ‘परवरिश’ उसके बाद ‘काला टीका’ फिर ‘तेनालीराम’ में दिख रहा था। अभी मेरा एक सीरियल ‘काल भैरव का रहस्य’ आने वाला है। चांदीवली स्टूडियो में शूटिंग चल रही है। बीच में अमोल गुप्ते की पिक्चर ‘स्निफ’ में था। इसके साथ-साथ ‘सावधान इंडिया’, कमर्शियल थिएटर वगैरह करता रहता हूं। काम उतना ही करता हूं, जिससे बाकी टाइम एन्जॉय कर सकूं। मेरी फैमिली सर्कल में इंडस्ट्री के बाहर के लोग हैं। इनमें डॉक्टर, बिल्डर, नामचीन सीए आदि पढ़े-लिखे हैं। महीने में 5-6 पार्टियां हो जाती हैं। मुझे घूमने का शौक है, इसलिए साल में एक बार फैमिली के साथ वर्ल्ड टूर करता हूं। अंधेरी स्थित शेरेपंजाब में बंगला बनाए 20-22 वर्ष हो गए। दूसरा बंगला इगतपुरी में है। दोस्तों के साथ वहां पार्टी करने जाता हूं। अंदाजा लगा सकते हैं कि खाने के लाले जैसी कोई बात नहीं है।

     

     

     

     


    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें राजेश पुरी से बातचीत के कुछ और अंश...

  • ये TV एक्टर बोला- मिल रहा है मुझे काम, मोहताज नहीं हूं खाने का
    +3और स्लाइड देखें
    जॉनी लीवर के साथ राजेश पुरी।

    अभिनय के प्रति रुचि-रुझान कब आया?
    मेरे खानदान में कोई एक्टिंग लाइन में नहीं था। चार्ली चैपलिन की पिक्चरें बहुत देखता था, कुछ हद तक वहीं से प्रेरणा मिली। फिर तो पांच साल की उम्र से मोनो एक्टिंग करने लगा। स्कूल-कॉलेज के दिनों में मेरा ऑर्केस्टा था, उसमें गिटार बजाता था। कॉलेज डेज में प्ले डायरेक्टर और एक्टर, दोनों था। कमर्शियल थिएटर करके कमाई कर लेता था। टेलीविजन और पढ़ाई एक साथ जारी था। बावजूद इसके कभी फेल नहीं


    पहले मनोरंजन जगत में आना वर्जित था? क्या आपको भी कोई दिक्कत हुई?
    कोई पढ़ाई-लिखाई न करे, घर छोड़कर जाए, माता-पिता के खिलाफ जाए, टैलेंट न हो, ऐसे बच्चों का विरोध होता था। मेरे माता-पिता को मेरा टैलेंट दिख रहा था। कॉलेज में अच्छी पढ़ाई के साथ स्पोर्ट्स में नेशनल लेवल का हॉकी प्लेयर था। खेलकूद में इतना अव्वल था कि अखबारों में मेरा नाम छपता था। हर दिशा में अच्छा कर रहा था, इसलिए माता-पिता ने कभी रोका-टोंका नहीं, बल्कि इनकरेज किया। मैंने बड़ी ईमानदारी से एक्टिंग करियर को आगे बढ़ाया।

  • ये TV एक्टर बोला- मिल रहा है मुझे काम, मोहताज नहीं हूं खाने का
    +3और स्लाइड देखें
    राजेश पुरी।

    दिल्ली से मुंबई कब आए और शुरुआत कैसे हुई?

    सन् 1982 में मुंबई आ गया था। नादिरा बब्बर का जो ‘एकजुट’ ग्रुप का फाउंडर मेंबर था। ग्रुप में प्ले करने के लिए मुंबई आया। यहां पहली बार ‘जाने भी दो यारो’ पिक्चर में काम करने का मौका मिला, फिर यहीं रुक गया। उसके बाद वी. शांताराम की ‘झंझार’, शेखर कपूर की ‘जोशीले’ पिक्चर आई। इन फिल्मों के साथ-साथ ‘पृथ्वी’ थिएटर और सेल्स मैनेजर की नौकरी भी करता था, ताकि अपना खर्च खुद निकाल सकूं।


    जो फिल्में और थिएटर करते थे, क्या उनमें इतने पैसे नहीं मिलते थे कि अपना खर्च चला सकें?
    पैसे मिलते थे, लेकिन उस लायक नहीं मिलते थे, जिससे अपनी दिल्ली वाली लाइफ स्टाइल जी सकूं। मुंबई आते ही 1982-83 में घर ले लिया था, उसकी किश्तें भी भरनी पड़ती थी। उसके बाद 1984 में ‘हमलोग’ आया। इससे पहले ऑलरेडी अपने घर में रहने लगा था।

  • ये TV एक्टर बोला- मिल रहा है मुझे काम, मोहताज नहीं हूं खाने का
    +3और स्लाइड देखें
    रंजीत और जॉनी लीवर के साथ राजेश पुरी।

    अभी कितनी पेमेंट मिलती है। पेमेंट को लेकर कितने संतुष्ट हैं?
    आजकल हमसे ज्यादा पेमेंट लेने वाले बच्चे आ गए हैं। मुझे काम का पैशन ज्यादा है। उस हिसाब से कमर्शियल नहीं बन पाया। पैसे के पीछे कभी नहीं भागा। अभी जो ‘काल भैरव का रहस्य’ कर रहा हूं, इसके लिए बड़े-बड़े प्रोपोजल छोड़ दिए, क्योंकि इसमें चैलेंजिंग रोल है। कहना नहीं चाहिए, आज जो लोग डिजर्व भी नहीं करते, उन्हें चार गुना ज्यादा पैसा मिलता है। हैरानी होती है, पर अफसाेस नहीं होता।


    परिवार के बारे में बताएंगे?
    एक बेटी है। वह मीडिया एंटरटेनमें से ही एमबीए कर रही है। निर्देशन-प्रोडक्शन काम देखेंगी। उन्हें हमेशा याद दिलाता हूं कि पुराने लोगों को, पुराने संस्कार को, पुरानी फिल्मों और सीरियल्स को रिस्पेक्ट देना मत भूलना।​

आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: TV Actor Rajesh Puri Lesser Known Life Facts
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

Trending

Top
×