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शादी के लिए क्यों लड़कियां ही बदलें खुद को?

हमारे यहां लड़की की शादी होते ही यानी किसी परिवार की बहू बनते ही उससे बहुत कुछ बदलने की अपेक्षाएं की जाती हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Feb 05, 2018, 11:25 AM IST

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    हमारे यहां लड़की की शादी होते ही यानी किसी परिवार की बहू बनते ही उससे बहुत कुछ बदलने की अपेक्षाएं की जाती हैं। उससे अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी पुरानी पहचान को छोड़कर नई पहचान ओढ़ लें। अगर ससुराल ट्रेडिशनल है तो सिर पर पल्लू रखना, रीति-रिवाजों का पालन करना, तुलसी में पानी चढ़ाना जैसी अपेक्षाएं की जाती हैं। अगर ससुराल थोड़ा मार्डन है तो अपेक्षाएं की जाती हैं कि बहू में टेबल एटिकेट्स हो, अंगेजी आती हों। न आती हो तो उससे तुरंत सबकुछ सीखने की उम्मीद रखी जाती है। यहां हम बता रहे हैं वे अपेक्षाएं जो शादी के बाद पत्नी या नई बहू से की जाती है:

    1.चाहिए ट्रॉफी वाइफ :
    पहले जहां पति और ससुराल के लोगों का जोर एक आइडियल वाइफ और आदर्श बहू पर होता था, माडर्न जमाने में इसमें थोड़ा बदलाव आया है। अपेक्षाओं का तरीका बदल गया है, लेकिन अपेक्षाएं नहीं। अब हस्बैंड को चाहिए ट्रॉफी वाइफ, यानी ऐसी पत्नी जो स्टेटस सिंबल बन सके। यहां पत्नी से अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी पहचान छोड़कर उस पहचान को धारण कर लें जो पति को सूट करती हो।


    2.अगर हसबैंड NRI है तो अंग्रेजी तो आनी ही चाहिए :
    दामाद अगर एनआरआई चाहिए तो फिर एनआरआई पति को भी ऐसी बीवी चाहिए तो फर्राटेदार अंग्रेजी बोल सके। अंग्रेजी बोलने वाली बीवी इसलिए चाहिए ताकि एनआरआई पति अपने स्टेटस को मेंटेन कर सके। फिर भले ही बीवी इसमें कंफर्ट हो या न हो। नहीं आती हो अंग्रेजी की क्लासेस जाएं और वहां से अंग्रेजी सीखकर आएं।


    3.ब्राइडल ग्रूमिंग स्कूल से ट्रेंड हो :
    इन दिनों देश के कई हिस्सों में आइडियल बहू बनने की ट्रेनिंग का भी चलन है। खासकर पंजाब के क्षेत्र में ऐसे ब्राइडल ग्रूमिंग सेंटर काफी मिल जाते हैं जहां लड़कियों को टेबल एटिकेट्स, पर्सनल डेवलमेंट आदि की ट्रेनिंग दी जाती है। ये सेंटर एक तरह से लड़की की ओरिजिनल आइडेंटिटी को छीनकर एक नकली पहचान का आवरण चढ़ा देते हैं। कई तथाकथित आधुनिक परिवारों को ऐसी ही पत्नी या बहू चाहिए जो ब्राइडल ग्रूमिंग स्कूल से ट्रेंड हो।

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    4. इंटरनेशनल कूजिन में एक्सपर्ट हों :

    भले ही पत्नी को सारी इंडियन डिशेज अच्छी से बनानी आती हों, लेकिन इसका कोई मतलब नहीं है अगर उसे इंटरनेशनल कूजिन का नॉलेन न हो। अगर हसबैंड NRI हैं तो पत्नी को हसबैंड के फ्रेंड्स की पार्टी के लिए इंटरनेशनज कूजिन में एक्सपर्ट होना ही चाहिए। किस कूजिन में क्या डलता है, कौन-सी कूजिन कैसे प्रजेंट की जाती है, इस सब की सारी जानकारी उसे चुटकियों में होनी चाहिए।


    5. पार्टियों में जाना है तो महंगी साड़ीज पहननी होगी…

    पत्नी को भले ही साड़ी पहननी न आती हो या उसे पहनना अच्छा न लगता हो, लेकिन चूंकि पति चाहता है कि वह साड़ी ही पहनें। इसलिए पत्नी को अपनी इच्छाओं को ताक पर रखकर साड़ी पहननी पड़ती है।


    6. सास-ससुर को रखें खुश :

    नई बहू के लिए यह बहुत जरूरी है कि वह अपने सास-ससुर ही नहीं, घर में मौजूद अन्य सदस्यों जैसे देवर, ननद आदि को हमेशा खुश रखें। सास-ससुर को माता-पिता का स्टेटस दें। हालांकि नए घर में आकर प्रत्येक व्यक्ति को प्रैक्टिकली खुश रखना संभव नहीं है।

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    लड़कियों से ऐसी ही अपेक्षाओं पर आधारित कहानी है - कलीरें

    ZEE टीवी पर एक नया सीरियल ‘कलीरें’ शुरू होने जा रहा है। यह पंजाब की एक युवा लड़की ‘मीरा’ की कहानी है। उसका परिवार चाहता है कि उसकी एक अच्छी फैमिली में शादी हो जाए। वो चाहते हैं कि मीरा ब्राइडल ट्रेनिंग सेंटर में भर्ती हो जाए ताकि वहां उसे ‘आइडियल’ बहू बनाने की ट्रेनिंग मिल सके और उसकी शादी एक अच्छे परिवार में हो सके।

    लेकिन मीरा शादी के लिए अपनी पहचान खोना नहीं चाहती। इसलिए सदियों से चली आ रही लड़कियों से की जाने वाली Unfair अपेक्षाओं का विरोध करती है। और ये सवाल उठाती है कि क्यों लड़कियों को वे जैसी हैं, वैसे ही पसंद नहीं किया जा सकता? क्यों उन्हें शादी के लिए अपनी पहचान से समझौता करने की जरूरत है?

    इस सीरियल में मीरा के इसी पूरे संघर्ष को दिखाया गया है और दिखाया गया है कि कैसे कोई लड़की अपने अस्तित्व को बचाए रख सकती है।

    देखिए मीरा की कहानी ZEE टीवी पर....यह सीरियल 5 फरवरी से ZEE टीवी पर सोमवार से शुक्रवार तक शाम 7.30 बजे से प्रसारित होगा।

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