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Movie Review: हाउस कीपर से कंगना के चोर बनने की दास्तां है 'सिमरन'

अगर आप कंगना रनोट को हद से ज्यादा पसंद करते हैं तो एकबार ट्राय कर सकते हैं...

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 30, 2018, 11:38 PM IST

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    कंगना रनोट की सिमरन शुक्रवार को रिलीज हुई है।

    रेटिंग2/5
    स्टार कास्टकंगना रनोट, मार्क जस्टिस, सोहम शाह, मनु नारायण, अनीस जोशी
    डायरेक्टरहंसल मेहता
    म्यूजिकसचिन-जिगर
    प्रोड्यूसरभूषण कुमार, क्रिशन कुरमा, शैलेश आर सिंह, अमित अग्रवाल
    जॉनरकॉमेडी ड्रामा

    - 'शाहिद'(2012), 'सिटी लाइट'(2014) और 'अलीगढ़'(2015) जैसी फिल्मों के बाद डायरेक्टर हंसल मेहता ने कंगना रनोट को लीड रोल में लेकर कॉमेडी ड्रामा फिल्म 'सिमरन' बनाई है। उनकी ये फिल्म सिमेनाघरों में रिलीज हो चुकी है तो कैसी बनी ये फिल्म आइए जानते हैं...

    कहानी
    - फिल्म की कहानी अमेरिका में रहने वाले एक पटेल परिवार की लड़की प्रफुल्ल पटेल यानी कंगना रनोट की है। जो कि तलाकशुदा होती है और फैमिली के साथ रहती है। प्रफुल्ल की इनकम का सोर्स एक होटल है जहां वो हाउस कीपिंग का काम करती है। फैमिली से प्रफुल्ल की कम ही बनती है। कई बार उसकी दोबारा शादी के लिए घरवाले रिश्ते ढूंढते हैं, लेकिन बात नहीं बनती है।

    - इसी बीच प्रफुल्ल की एक फीमेल फ्रेंड्स की शादी लॉस वेगास में होती है। यहां वो जाती है और एक होटल में जुआ खेलते वक्त अपना सारा पैसा हार जाती है। वो यहीं नहीं रुकती, होटल वालों से उधार में पैसे लेकर फिर जुआ खेलती है और ये पैसे भी हार जाती है। जैसा कि प्रफुल्ल की कमाई तो सीमित है ऐसे में वो कर्जा चुकाने के लिए चोरी-चकारी, बैंक लूटना जैसे काम करने लगती है। इसी बीच कुछ लड़के भी लव इंटरेस्ट के तौर पर उसकी लाइफ में आते हैं जिससे उसके अफेयर होते हैं। बात नहीं बनती। तो क्या प्रफुल्ल को सच्चा प्यार मिलता है? क्या वो अपनी उधारी चुका पाती? ये जानने के लिए तो आपको फिल्म देखनी होगी।

    डायरेक्शन
    - फिल्म का डायरेक्शन अच्छा है। जैसा कि फिल्म की शूटिंग विदेश में हुई है ऐसे में यहां काफी अच्छी लोकेशन देखने को मिली हैं। बात अगर कहानी की करें तो ये कहीं-कहीं न सिर्फ कमजोर जान पड़ती है, बल्कि निराश भी करती है।

    - फिल्म का फर्स्ट हाफ दर्शकों को बांधता है, लेकिन सेकंड हाफ में कहानी बिखरती और हिली-डुली नजर आती है। साथ ही, फिल्म के स्क्रीनप्ले को भी काफी बेहतर किया जा सकता था। ये सब बातें हंसल के डायरेक्शन पर सवाल खड़े करती है क्योंकि दर्शकों को उनसे एक बेहतरीन फिल्म की आस थी, लेकिन ये फिल्म उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती है।

    एक्टिंग
    - फिल्म में सिर्फ और सिर्फ कंगना पर फोकस किया गया है। नो डाउट उनकी एक्टिंग काफी अच्छी है, लेकिन अगर उन्हें छोड़ दिया जाए तो किसी और कैरेक्टर की एक्टिंग याद ही नहीं आती है। बेशक कास्टिंग यहां काफी कमजोर रही है जिसे और बेहतर किया जा सकता था।

    म्यूजिक
    - फिल्म का म्यूजिक तो पहले ही रिलीज हो चुका है जो कि कोई खास कमाल नहीं दिखा पाया है। वहीं फिल्म का सबसे उम्दा सॉन्ग 'सिंगल रहने दे' आखिरी में क्रेडिट देते वक्त रखा गया है। इसका बैकग्राउंड स्कोर भी ओके है।

    देखें या नहीं
    - अगर आप कंगना रनोट को हद से ज्यादा पसंद करते हैं तो एकबार ट्राय कर सकते हैं, लेकिन अगर हंसल की फिल्मों के कायल हैं तो ये फिल्म आपको निराश कर सकती है।

    फिल्म रिलीज के मौके पर हाल ही में DainikBhaskar.com ने कंगना रनोट से फिल्म और उनकी पर्सनल लाइफ को लेकर खास बातचीत की। आगे की स्लाइड में पढ़े कंगना का इंटरव्यू...

  • Movie Review: हाउस कीपर से कंगना के चोर बनने की दास्तां है 'सिमरन'
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    फिल्म का डायरेक्शन हंसल मेहता ने किया है।
    फिल्म रिलीज के मौके पर हाल ही में DainikBhaskar.com ने कंगना रनोट से फिल्म को लेकर खास बातचीत की। पेश हैं उस परिचर्चा अंश।
    Q. क्या आप एक अच्छी कहानी साफ-साफ बता सकते हैं तो सब कुछ ठीक हो जाता है?
    R. कंगना बताती हैं, "देखिए, ये बात मैं हमेशा महसूस करती हूं कि अगर `क्वीन-2' बने तो ये उसी लड़की की कहानी नहीं हो सकती। रानी की कहानी तो अब हो चुकी, लेकिन दूसरी `क्वीन' आए तो उसमें नई दुनिया की किसी और औरत की कहानी होगी। पर लोगों को पता होना चाहिए कि इसमें रानी जैसा कुछ नहीं है। क्या फिल्में एक जैसी होती हैं? नहीं, लेकिन क्या संदेश समान हो सकते हैं? हां! इसके साथ ही, अगर वे स्पष्ट न हों तो हमारे विरुद्ध भी काम कर सकते हैं। रानी एक आकर्षक किरदार है। वो संकोची, लेकिन मूल्यों और संस्कारों का भंडार है। एक इंसान के रूप में वो सरल है पर डरपोक भी है। सिमरन (नई फिल्म का कैरेक्टर) इसके विपरीत है। वो चंचल, चमक से भरपूर, आजाद ख्याल और कई बार उग्र भी होती है। वह जो करना चाहती है, उसे अंजाम देने से पहले अपने दिमाग को एक बार भी भटकने नहीं देती। जो चाहती है, वही करती है। इसे ऐसे सोच सकते हैं कि वह अपराधी है तो क्या हम एक ही किरदार को आगे बढ़ा रहे हैं? नहीं... लेकिन ये एक और स्वतंत्र व्यक्तित्व की कहानी है - तो जवाब है - हां! क्वीन की दिक्कत थी - प्रेम और प्रफुल्ल की समस्या पैसा है।"

    Q. रंगोली काफी लंबे समय तक आपकी मैनेजर रही हैं, ये सवाल आपकी ओर से शुरू की गई नेपोटिज्म की बहस से जुड़ा है। क्या आप ऐसे नहीं सोचतीं कि टैलेंट मैनेजमेंट में ट्रेंड किसी और व्यक्ति को ये मौका मिलना चाहिए था?
    R.(बीच में ही रोकते हुए) वो (रंगोली) मेरी मैनेजर नहीं थी। जब रंगोली मेरे साथ काम कर रही थी, तब मैंने एक मैनेजमेंट टीम - ब्लिंग हायर कर रखी थी। वहां एक लड़की थी - नेहा, एक और व्यक्ति थे, जो पब्लिक रिलेशन देखते थे। मेरे पास पांच-छ: लोगों की टीम है, लेकिन हर अभिनेत्री के साथ घर का कोई व्यक्ति होता ही है। जो साथ में ट्रैवल करता है - मां या फिर बहन। मेरी बहन वही करती थी। उसे मेरी मैनेजर कहना... वो कोई फर्म नहीं चलाती, न ही उसके पास एक्टर्स का जमावड़ा है, न ही वो मौके (फिल्मों में काम दिलाने के) जुटाती है। वो मेरी बहन है और फिलहाल, वो मेरे साथ भी नहीं है। मां अब मेरे साथ ट्रैवल करती है। ये बेहद बुरा है कि लोग उसके बारे में बात करते हैं। वो एक एसिड अटैक सर्वाइवर है और आप लोग उसे भी नहीं छोड़ रहे।"

    Q. आपकी नजर में सेक्सी होने के क्या मायने हैं?
    R. "वो व्यक्ति, जिसमें आत्मविश्वास हो। जिसमें धर्म और आस्था की गहरी समझदारी हो।"

    Q. कंगना आप क्या हैं - ज़िद्दी, बागी, जुनूनी?
    R. "तीनों!"

    Q.जब शादी के बारे में कोई पूछता है तो आपके मन में क्या आता है? स्माइल, ब्लिंक या स्लैप?
    R. "शादी के बारे में - स्माइल!"

    Q. आप खुद को क्या टैगलाइन देंगी?
    R. "द माउंटेन गर्ल।"

    Q. जब उदास होती हैं तो उस खराब मूड से बाहर निकलने के लिए क्या करती हैं?
    R. "मैं खाने पर टूट पड़ती हूं। कुछ अच्छा, जिसे मैं प्यार से खा सकूं, पकाती हूं।"

    Q. कंगना, आप पर रिश्ते और साझेदारियां तोड़ने के ढेरों आरोप हैं - इन सबके बीच,खुद को टूट जाने से कैसे बचाती हैं?
    R. "कभी-कभी टूट जाना भी ठीक होता है। हर वक्त डटे रहना जरूरी नहीं है। कई बार लगता है कि आप खुद से ही अलग हो रहे हैं, लेकिन फिर ये भी समझ में आता है कि दुनिया जिस रफ्तार से और जिस तरह, आगे बढ़ रही है, उसमें स्थिर रहना बेहद मुश्किल है। आप कुछ देर तक महसूस करते हैं कि सब कुछ बेहद बेकार और अर्थहीन है और फिर आप अपने पैरों पर खड़े होकर महसूस करते हैं - ठीक है। ये एक और दिन भर है। आप ही बताएं, ऐसी स्थिति में क्या करते हैं? लंबे समय तक आप निराशा की हालत में नहीं रह सकते हैं, जैसे कि आप लंबे समय तक खुश नहीं हो सकते। आप तंग होने से तंग आ जाते हैं। जैसे बीमार होने की सोचकर बीमार पड़ जाते हैं या कि लगातार नाखुश होने को लेकर नाखुश हो जाते हैं... तो ऐसी हालत में आप निराशा को दूर भगाने की हर मुमकिन कोशिश करते हैं।"

    Q. क्या बॉलीवुड में आपके दोस्त हैं?
    R. "देखिए, मैं जहां काम करती हूं, वहां दोस्त बनाना पसंद नहीं करती। इससे और मुश्किलें बढ़ती हैं। काम के वक्त मैं पूरी तरह एक कामकाजी इंसान हूं, लेकिन इसके साथ ही मैं पारिवारिक व्यक्ति भी हूं। जब परिवार के साथ होती हूं तो पूरी तरह उनकी ही होती हूं। मेरा एक छोटा भाई और बहन हैं। हम एक-दूसरे के काफी करीब हैं। भाई के साथ बियर पीना और बहन के साथ गप्पें मारना पसंद है। पैरेंट्स के साथ वक्त बिताना अच्छा लगता है। आप मेरे घर पर फिल्म इंडस्ट्री के दोस्त आते और घूमते या फिर ड्रिंक करते कभी नहीं देखेंगे।"

    Q. कुछ अरसा पहले, एक नेशनल पब्लिकेशन ने आपको एडिटोरियल स्पेस बेचने से इनकार कर दिया था...
    R. "ओह! ये बात बाहर आ चुकी है, क्या इस तरह का कोई प्रोमो आया है?"

    Q. पब्लिकेशन की ओर से कहा गया कि राकेश रोशन उनके ग्राहक थे। क्या आपको लगता है कि इंकार इसलिए किया गया, क्योंकि आप एक महिला हैं?
    R. "उनके पास अधिक पैसा है! बेशक तकलीफ हुई, आप ही सोचिए। मेरा ओपन लेटर इतना अच्छा था, फिर भी उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया।"

    Q. हॉलीवुड में, जेनिफर लॉरेंस ने हीरोइनों के लिए पुरुष कलाकारों के बराबर फीस की मांग की है। इसी तरह आप भी हीरो की तरह एक्ट्रेस को भी पारिश्रमिक देने की लड़ाई लड़ रही हैं। आप किस हॉलीवुड अभिनेत्री में खुद को देखती हैं?
    R. "मैं खुद में किसी हॉलीवुड एक्ट्रेस को क्यों देखूं? मैं खुद में एक व्यक्ति हूं। दरअसल, मैं समानांतर रेखा नहीं खींचना चाहती। मैं अपनी चीजें कर पा रही हूं, बात बता रही हूं, खुद का पैसा अपने हिसाब से खर्च कर रही हूं। शायद ये फिल्म इंडस्ट्री के लिए नया बेंचमार्क है। मुझे नहीं लगता कि किसी तरह की समानता खोजने की जरूरत है।"

    Q. क्या आप उन कलाकारों जैसी हैं, जो रोल के लिए ऑडिशन देने से डरते हैं?
    R. "ऑडिशन देने में मुझे कोई समस्या नहीं है। मुझे सारा काम ही ऑडिशन की वजह से मिला है। मैं किसी स्टार किड की तरह नहीं हूं, लेकिन हॉलीवुड को मैं एक अवसर की तरह नहीं देखती। सच तो ये है कि उनका सिनेमा बिजनेस पूरी तरह डूब गया है। वे सिर्फ फॉरेन टेरिटरी की वजह से बच सके हैं। यही नहीं, उनका डिजिटल प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर बढ़ रहा है और वहां पर टीवी इंडस्ट्री काफी बड़ी है। अगर हम अच्छी फिल्में बनाएंगे तो वह दिन दूर नहीं, जब हमारा सिनेमा महान संभावनाओं का साक्षात्कार करेगा। हमें बस अच्छी सामग्री के साथ सामने आना चाहिए। वैसे भी, मैं एक ऐसी इंसान हूं, जिसे अपने देश से प्यार है और मैं अपने लोगों के लिए काम करना चाहती हूं।"
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