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Movie Review: मजाकिया लहजे में चुनाव सिस्टम पर कई सवाल उठाती है 'न्यूटन'

dainikbhaskar.com | Sep 21, 2017, 02:11 PM IST

Movie Review: मजाकिया लहजे में चुनाव सिस्टम पर कई सवाल उठाती है 'न्यूटन'
Critics Rating
  • Genre: ब्लैक कॉमेडी ड्रामा
  • Director: अमित मसूरकर
  • Plot: 'न्यूटन' डायरेक्टर अमित मसुरकर की दूसरी फिल्म है।
रेटिंग3.5/5
स्टार कास्टराजकुमार राव, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा, अंजलि पाटिल, रघुबीर यादव
डायरेक्टरअमित मसूरकर
म्यूजिकनरेन चंदावरकर, बेनेडिक्ट टेलर
प्रोड्यूसरमनीष मुंद्रा
जॉनरब्लैक कॉमेडी ड्रामा

डायरेक्टर अमित मसूरकर ने 'सुलेमानी कीड़ा'(2013) नामक फिल्म बनाई थी जिसकी क्रिटिक ने काफी तारीफ की थी। अब अमित भारत के चुनाव सिस्टम पर बेस्ड 'न्यूटन' लाए हैं। कैसी बनी ये फिल्म आइए जानते हैं।

कहानी
ये कहानी नूतन कुमार (राजकुमार राव) की है। जो 10वीं बोर्ड के एग्जाम में दौरान अपना नाम बदलकर न्यूटन कर लेता है। बात में वो फिजिक्स से M.sc करता है और इलेक्शन बोर्ड में काम करने लगता है। इसी बीच उनकी ड्यूटी छत्तीसगढ़ के जंगली इलाके में वोटिंग के लिए लगाई जाती है। ये ऐसा इलाका होता है जहां कभी भी वोटिंग नहीं हुई। लोकनाथ(रघुवीर यादव) के साथ पूरी टीम इलाके में जाती है। पुलिस आत्मा सिंह (पंकज त्रिपाथी) टीम की मौजूदगी में वोटिंग की कोशिश करते हैं। साथ ही वो कहते हैं कोई वोटिंग के लिए नहीं आएगा। मगर न्यूटन को विश्वास रहता है कि वोटिंग होगी। कुछ वक्त के बाद चीजें बदलती हैं और एक खास तरह का रिजल्ट सामने आता है जिसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

डायरेक्शन
डायरेक्शन रॉ और रियल जैसा है। जंगलों में शूट करने का तरीका उम्दा है। एडिटिंग शार्प है, जिसमें कोई जर्क नहीं आता। संवाद और खासकर स्क्रीनप्ले बहुत दमदार है, जिसके लिए राइटर मयंक तिवारी की सराहना की जानी चाहिए। ये अमित मसूरकर की दूसरी फिल्म है, लेकिन अनुभव साफ दिखाई देता है। खासियत यह है कि फिल्म मजाक में बहुत बड़ी कह जाती है। ये ठीक वैसा ही है जैसा सिनेमा राज कपूर साहब दिखाया करते थे। लोकेशंस, सिनेमेटोग्राफी अच्छा है हालांकि क्लाइमेक्स को बेहतर किया जा सकता था।

एक्टिंग
राज कुमार का एक बार फिर बहुत बढ़िया परफॉर्मेंस रहा है। उनके अपोजिट पंकज त्रिपाठी ने बहुत बढ़िया काम किया है दोनों के बीच अच्छी केमिस्ट्री देखने को मिलती है। संजय मिश्रा यहां रघुवीर किरदार के साथ अहम छाप छोड़ जाते हैं। अंजलि पाटिल के साथ-साथ बाकी सह कलाकारों का काम भी सहज है।

म्यूजिक
संगीत बढ़िया और बैकग्राउंड स्कोर उससे भी अच्छा है। फिल्म में रघुवीर यादव की आवाज में एक ही गीत है जो कि समय-समय पर आता रहता है।

देखें या नहीं
अगर आप चुनाव जैसे अहम मुद्दे पर हंसी मजाक के साथ बढ़िया कास्टिंग के की कहानी देखना चाहते हैं तो फिल्म को मिस मत करिएगा। हालांकि आइटम नंबर वाली मसाला फिल्म की तलाश है तो यह फिल्म आपके लिए नहीं है।

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Web Title: Newton Movie Review
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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