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Movie Review: SEX ADDICT 'वासु' की कहानी है हंटर

डायरेक्टर हर्षवर्धन कुलकर्णी की सेक्स कॉमेडी फिल्म 'हंटर' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 20, 2015, 11:23 AM IST

  • फिल्म का नाम

    हंटर

    क्रिटिक रेटिंग

    2/5

    स्टार कास्ट

    गुलशन देवैया, राधिका आप्टे, साई तम्हंकर और वीरा सक्सेना

    डायरेक्टर

    हर्षवर्द्धन कुलकर्णी

    प्रोड्यूसर

    कृति नाखवा, केतन मारू, अनुराग कश्यप, विकास बहल और विक्रमादित्य मोटवाने

    संगीत

    खामोश शाह

    जॉनर

    सेक्स कॉमेडी

    डायरेक्टर हर्षवर्द्धन कुलकर्णी की सेक्स कॉमेडी फिल्म 'हंटर' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। हंटर का मतलब होता है शिकारी और यह फिल्म एक ऐसे इंसान की कहानी है, जो सेक्स के लिए लड़कियों और महिलाओं को शिकार बनाता है। फिल्म में सेक्स है, कॉमेडी है और कहीं न कहीं आज के पुरुष समाज की सच्चाई भी है। आज के समाज में ऐसे कई पुरुष मिल जाएंगे, जो अक्सर सेक्स संबंधों के बारे में ही सोचते रहते हैं। हर्षवर्द्धन ने आज की इसी मानसिकता को फिल्म के जरिए दिखाने की कोशिश की है।

    क्या है फिल्म की कहानी

    फिल्म का एक डायलॉग है 'तृप्ति मैं वासु हूं...मेरे टाइप के लोगों को वासु कहते हैं।' यह डायलॉग ही फिल्म की कहानी का सार है। वासु का मतलब फिल्म में बताया गया है, जो अपनी सेक्स भावनाओं पर नियंत्रण न कर सके। कहानी है मंदार (गुलशन देवैया) नाम के एक शख्स की, जो तब से सेक्स का शौक़ीन है, जब वह 12-13 साल का स्कूल स्टूडेंट था। ब्लू फिल्में देखना, लड़कियों और महिलाओं का पीछा करना और उनके साथ सेक्स संबंध बनाना उसकी फितरत में शामिल है। मंदार किस सोच का इंसान है, वह उसके डायलॉग 'जैसे शौच करना हमारी दैनिक क्रिया है, ठीक उसी तरह सेक्स भी कुछ वैसी क्रिया है, जिसे पूरा करना चाहिए' से पता चल जाती है। वह पड़ोस में रहने वाली एक बच्चे की मां ज्योत्स्ना (साई तम्हंकर) से लेकर होटल में तैराकी सिखाने वाली पारुल (वीरा सक्सेना) तक कई महिलाओं के साथ हमबिस्तर होता है। मंदार के लिए ये सभी महिलाएं सिर्फ सेक्स पूर्ति का साधन हैं, इसके अलावा कुछ नहीं, लेकिन ये महिलाएं कहीं न कहीं मंदार से प्यार करने लगती हैं। एक समय वह आता है, जब मंदार शादी कर घर बसाने के बारे में सोचता है। वह तृप्ति (राधिका आप्टे) के सामने शादी का प्रस्ताव रखता है, लेकिन यहां दांव उलटा पड़ जाता है। तृप्ति मंदार के प्रपोजल को सीरियसली नहीं लेती और न ही उसे उसमें शादी करने लायक कोई बात दिखाई देती है। क्या मंदार वासुगिरी से निकल पाता है और क्या तृप्ति उससे शादी के लिए तैयार होती है, यह सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

    कैसा है डायरेक्शन

    कहानी पर डायरेक्टर हर्षवर्द्धन कुलकर्णी की पकड़ कमजोर रही है। कई सीन्स को बेवजह लंबा खींचा गया है। उदाहरण के लिए मंदार और ज्योत्स्ना के बेड सीन्स जरूरत से ज्यादा लंबे हैं। हालांकि, उन्होंने फिल्म के मुख्य किरदार मंदार पर काफी मेहनत की है।12 से 35 साल की उम्र तक उसकी सोच में आए बदलाव को उन्होंने बखूबी दिखाया है। कहानी कई बार फ्लैशबैक में जाती है, जिससे इसकी लय टूटती है। कुल मिलाकर निर्देशन को न ज्यादा अच्छा कहा जा सकता है और न ही खराब।

    आगे की स्लाइड में पढ़ें शेष रिव्यू...

  • कैसी है एक्टिंग

    गुलशन देवैया मंदार के कैरेक्टर में एकदम फिट बैठे हैं। उन्होंने बड़े ही सहज ढंग से काम वासना में फंसे शख्स का किरदार निभाया है। राधिका आप्टे ने अपने रोल के मुताबिक अच्छा काम किया है। साई तम्हंकर और वीरा सक्सेना के हिस्से में जितना अभिनय आया, उसे ईमानदारी से करने की कोशिश उन्होंने की है। बाकी किसी अन्य स्टार के करने लायक फिल्म में कुछ नहीं है।

    संगीत

    फिल्म का संगीत कुछ खास नहीं है। फिल्म की जैसी कहानी है, वैसा ही हल्का-फुल्का संगीत इसमें डाला गया है। कोई भी सॉन्ग ऐसा नहीं है, जिसे दर्शक सिनेमा हॉल से निकलते समय गुनगुनाते नजर आएं।

    देखें या नहीं

    'हंटर' के बोल्ड सीन्स और अश्लील संवाद इसे फैमिली के साथ देखने की इजाजत नहीं देते। हां, जो लोग बोल्ड फिल्में देखना पसंद करते हैं, वे इसे एक बार देख सकते हैं।
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