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Movie Review: हॉलिडे

dainikbhaskar.com | Jun 06, 2014, 05:18 PM IST

Critics Rating
  • Genre: एक्शन थ्रिलर
  • Director: ए. आर, मुरुगदास
  • Plot: हॉलिडे! मतलब फुल टू एंटरटेनमेंट... न कहीं आपको दिमाग लगाने की जरूरत महसूस होगी, न कहीं फिल्म देखते हुए ऊब ही होगी।
स्टार्ट टू एंड फिल्म के डायरेक्टर ए.आर. मुरुगदॉस ने एक ऐसी बेसिर-पैर की कहानी को साउथ के सिनेमा स्टाइल में हिंदी दर्शकों के सामने रख दिया, जिसमें सोनाक्षी सिन्हा और गोविंदा को जबरदस्ती दर्शकों पर बोझ डालने के लिए छोड़ दिया गया है।
बॉक्स ऑफिस पर कमाई और कामयाबी के नए रिकॉर्ड बना चुके 'गजनी' के डायरेक्टर ए.आर. मुरुगदॉस इससे पूर्व इस फिल्म को तमिल में 'थुप्पकी' नाम से बना चुके हैं। साउथ में फिल्म सुपरहिट रही, लेकिन यहां मुरुगदॉस कई बातें भूल गए। सबसे पहले कि क्या हिंदी दर्शक क्या इस कहानी को पचा सकेंगे, यह सोचने की जहमत नहीं उठाई गई। दूसरा सवाल, सोनाक्षी सिन्हा और गोविंदा को फिल्म में क्या केवल फिलअप के लिए लिया गया?
इस फिल्म में आपको मुरुगदॉस के स्टाइल की झलक तो जरूर मिलेगी, लेकिन निर्देशक ने हिंदी फिल्मों की कई परिभाषाओं को भूलकर इस फिल्म को पूरा किया है। इस फिल्म को आप वन मैन शो कह सकते हैं, जिसमें एक नायक बीसियों गुंडों को धूल चटा देता है। इस बीच पुलिस की भूमिका महज नायक को लोकेशन बताने तक की ही नजर आती है, जो बचकानी लगती है।
शुरुआती दस-पंद्रह मिनट के बाद ही कट टू कट सीन से अंदाज मिल जाता है कि फिल्म किस रफ्तार से भागने वाली है और ऐसा होता भी है। फिल्म पूरी तरह से अक्षय के कंधों पर टिकी हुई है। जिस तेजी से फिल्म खत्म हो जाती है, उसे हिंदी सिनेमा के हार्डकोर दर्शक शायद ही पचा सकें। जब तक दर्शक असल सरगना से नायक की भिड़ने की उम्मीद पाले बैठे रहते हैं, तब तक फिल्म खत्म भी हो जाती है।
सोनाक्षी की भूमिका फिल्म में तीन गानों और महज विराट की एक बोझिल गर्लफ्रेंड के रूप में ही सिमटी है। इससे ज्यादा उनके पास कुछ करने को भी नहीं है। 'लुटेरा' के बाद सोनाक्षी का ये नया अवतार आपकी उम्मीदों पर पानी फेर सकता है। फिल्म मुंबई अटैक की पृष्ठभूमि पर जरूर बनी है, लेकिन कहानी एकदम अलग ढंग से बुनी गई है। इस फिल्म में स्लीपर सेल कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया है। ऐसा पहली दफा किसी फिल्म में नजर आया है, जहां फिल्म की पटकथा का बेस ही स्लीपर सेल हो।
कहानी: कैप्टन विराट बख्शी (अक्षय कुमार) जम्मू में तैनात है। लंबे अरसे बाद वह हॉलिडे लेकर अपनी फैमिली के पास मुंबई आया है। विराट की फैमिली ने पहले से उसके लिए एक लड़की देखी हुई है, इसलिए स्टेशन से उसके पापा आर्मी ड्रेस में ही उसे लड़की दिखाने ले जाते हैं। साहिबा (सोनाक्षी सिन्हा) को देखकर विराट को लगता है कि उसमें ऐसी खूबियां नहीं जो उसे अपनी लाइफ पार्टनर के लिए चाहिए। दरअसल, हाथों में चाय की ट्रे लिए लंबे बालों वाली सीधे-सादे लुक वाली साहिबा विराट को पसंद नहीं आती और वह इस रिश्ते से साफ इनकार कर देता है।
अगले दिन विराट मुंबई पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (सुमित राघवन) के साथ शहर में हो रही लड़कियों के इंटर कॉलेज बॉक्सिंग मुकाबले में पहुंचता है। यहां आकर बॉक्सिंग रिंग में खड़ी साहिबा को देख विराट की आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। विराट को अब लगने लगता है कि उसे ऐसी ही लड़की तो चाहिए थी। साहिबा की इस शख्सियत को देखने के बाद विराट फैसला करता है कि अब उसकी लाइफ पार्टनर साहिबा ही बनेगी।
इसी बीच मुंबई में आतंकवादी एक बेहद खतरनाक साजिश रच रहे होते हैं। इंडियन आर्मी में स्पेशल एजेंट विराट की आंखों के सामने एक जबरदस्त धमाके में बस में सवार स्कूली बच्चों के परखच्चे उड़ जाते हैं। विराट बम धमाके की इस साजिश को अपने ढंग से बेनकाब करने का फैसला करता है। यहीं से कहानी हास्यास्पद लगने लगती है।
बस में धमाका करने वाले एक आतंकी को विराट पकड़कर पुलिस को सौंपता है, लेकिन अगले ही दिन यह आतंकी पुलिस कस्टडी से भागने में कामयाब हो जाता है। इसके बाद विराट को पता लगता है कि कैसे इस साजिश में पुलिस के बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। यहीं से विराट आतंकियों के नेटवर्क में घुसने का प्लान बनाता है।
विराट को पता लगता है अगले कुछ दिनों में स्लीपर सेल बारह अलग-अलग स्थानों पर बम धमाके की साजिश करेंगे। विराट अपनी टीम के साथ आतंकियों की इस साजिश को नाकाम कर देता है। इसके बाद आतंकियों का सरगना (फ्रेडी दारूवाला) खुद काम को अंजाम देने के लिए मुंबई पहुंचता है।
एक्टिंग:पिछले लंबे समय से कामचलाऊ मसाला फिल्मों में नजर आ रहे अक्षय कुमार ने कैप्टन विराट बख्शी के किरदार को बखूबी निभाया। सोनाक्षी के हिस्से में चंद ही सीन आए हैं, जहां उनके पास करने को कुछ नहीं था। राघवन ने अपने किरदार को अच्छे ढंग से निभाया है, वहीं फ्रेडी दारूवाला की एंट्री तो किसी सरप्राइज से कम नहीं, लेकिन जब उनका किरदार आगे बढ़ता है तो वह आतंकियों के सरगना नहीं, बल्कि बेहद मामूली विलेन ही लगते हैं।
डायरेक्शन:ए.आर. मुरुगदास साउथ के सिनेमा के किंग हैं, लेकिन जब आप साउथ की रीमेक की एक बॉलीवुड फिल्म बनाने जा रहे हों तो आपको इसमें कई जरूरी बदलाव करने जरूरी हो जाते हैं। मुरुगदास ने एक्शन सीन्स को बेहद रोमांचक ढंग से कैमरे में कैद किया है, लेकिन कहानी का भटकाव उनकी मेहनत पर पानी फेर देता है।
क्यों देखें:यदि आप अक्षय कुमार के हार्डकोर फैन हैं, तभी इस फिल्म को देखने जाएं। लंबी अवधि और फिल्म में जबरदस्ती ठूंसे गए लव सीन्स पकाऊ लगते हैं। हम तो यही राय देना चाहेंगे कि अक्षय के फैन नहीं हैं तो यह फिल्म आपको निराश ही करेगी।
यह सवाल मन में उठे तो चौंकें नहीं!

- सोनाक्षी सिन्हा और गोविंदा फिल्म में क्या कर रहे हैं?
- क्या भारत में लड़कियों का सूट पहनना नॉर्मल नहीं है?
- क्या टेररिस्ट बिना ठोस प्लान के ही अपने प्रोजेक्ट पर काम करते हैं?
- पुलिस क्या तमाशा देखती रहती है, जबकि एक आर्मी सोल्जर छुट्टी पर आने के बाद अपना सारा काम-धाम छोड़कर आतंकियों को निपटा देता है।
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Web Title: Movie Review: Holiday
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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