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गुड्डू की गन

bhaskar network | Oct 31, 2015, 11:34 AM IST

Critics Rating
  • Genre: एडल्ट कॉमेडी
  • Director: शांतनु रे छिब्बर और शीर्षक आनंद
  • Plot: एडल्ट कॉमेडी अभी भी भारत में वर्जित जॉनर सा है।
एडल्ट कॉमेडी अभी भी भारत में वर्जित जॉनर सा है। इसमें फिल्में डर-डर के संकोच के साथ बन रही हैं। गुलशन दैवय्या स्टारर हालिया "हंटर’ इस मामले में अच्छा प्रयास थी।
जो फूहड़, अश्लील, फिजिकल हुए बगैर मजेदार थी। ये फिल्म मजेदार नहीं बन पाती लेकिन बाकी सब मर्यादाओं का ख़याल रखती है। कहीं चीप नहीं होती।
कहानी गुड्‌डू के इर्द-गिर्द घूमती है जिसके शरीर का एक हिस्सा सोने का हो जाता है और वो परेशान है। उसे सच्चा प्यार मिला तो सही हो जाएगा। मिलती है चेहरे पर दाग वाली लड़की।
अच्छा संदेश देने की कोशिश करती ये फिल्म स्मार्ट नहीं है, चुस्त नहीं है। इसकी कॉमेडी प्रभावी नहीं है। सिर्फ कई सारे डायलॉग ही हैं जो बहुत बार हंसा जाते हैं। लेकिन अंत तक हमें बिखरा
मनोरंजन, कई जम्हाइयां और घटिया जोक्स ही मिल पाते हैं। जिद है तभी देखें, अन्यथा इसे डीवीडी पर देखना बुद्धिमानी होगी।
Story [2/5] गुड्डू (खेमू) घर-घर सर्फ बेचता है और कैजुअल रिश्ते बनाता चलता है। फिर उसे एक शाप मिलता है जिसका उपाय है सच्चा प्यार हासिल करना।
direction [1.5/5] काफी बिखरा है। कहीं सीन अधपके हैं। फनी होने की कोशिश करते हैं पर हंसी नहीं आती। क्लाइमैक्स "जाने भी दो यारों’ की बुरी नकल है।
music [2/5] सब गाने औसत हैं। बिहारी वैलेंटाइन फनी है। रेहबरा वे सूदिंग नंबर है। कुछेक बार सुन सकते हैं। डिंग डॉन्ग, कोलकाता कुतुब मीनार पेपी नंबर हैं।
acting [2.5/5] खेमू की एक्टिंग इतनी ही अच्छी है कि वे फिल्म को खींच ले जाते हैं। सुमीत सहयोगी भूमिका में ठीक हैं। सबसे मजेदार हैं डॉक्टर बने बृजेंद्र काला।
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Web Title: movie review: Guddu Ki Gun
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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