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Movie Review: 'इक्कीस तोपों की सलामी'

dainikbhaskar.com | Oct 10, 2014, 11:20 AM IST

Critics Rating
  • Genre: ड्रामा
  • Director: रविन्द्र गौतम
  • Plot: 'तमंचे' के अलावा बॉक्स ऑफिस पर 10 अक्टूबर को 'इक्कीस तोपों की सलामी' भी रिलीज़ हुई है।
कहानी:
पुरुषोत्तम जोशी (अनुपम खेर) नगरपालिका में जमादार (सफाईकर्मी) के पद पर कार्यरत है। वह अपनी तनख्वाह से अपने दो नाकारा बेटों सुभाष (दिव्येंदु शर्मा) और शेखर (मनु जोशी) को भी पाल रहा होता है। पुरुषोत्तम जोशी के जीवन को लेकर अपने कुछ उसूल हैं और उन्हीं उसूलों का पालन करते हुए वह 37 सालों से ईमानदारी से अपने काम को निपटा रहा होता है। इधर, सुभाष एक राजनीतिक पार्टी का अदना-सा कार्यकर्ता है। सुभाष की गर्लफ्रेंड तान्या (अदिति शर्मा) सीएम की पीआरओ है और वह सीएम के लिए भाषण लिखती है।
सीएम अपनी रखैल जयाप्रभा (नेहा धूपिया) को एक बंगला गिफ्ट करने के चलते 12 करोड़ रुपए के घोटाले में फंसा हुआ है। सीएम को दुख इस बात का नहीं होता कि उस पर घोटाले के आरोप लगाए जा रहे हैं, बल्कि वह इस बात से दुखी है कि 12 सौ करोड़ रुपए का घोटाला करने के बावजूद उसे महज 12 करोड़ रुपए के लिए बदनाम किया जा रहा है। इसी बीच पुरुषोत्तम जोशी के रिटायरमेंट का दिन भी आ जाता है। अपने रिटायरमेंट से एक दिन पहले जब वह अपना फॉगिंग पंप (मच्छर मारने के लिए दवा छिड़काव करने वाली मशीन) ऑफिस में जमा करने पहुंचता है, तो बाबू फिल्म देख रहा होता है। वह पुरुषोत्तम को पंप बाहर ही रखकर रसीद अगले दिन लेने को कह देता है।
अगले दिन पुरुषोत्तम खुशी-खुशी अपने दफ्तर पहुंचता है तो वहां उसे सम्मानजनक विदाई देने के बजाय चोर कहकर अफसर निलंबित कर देता है। पुरुषोत्तम जोशी इसी सदमे में हार्ट अटैक से मर जाता है। उसके दोनों बेटों ने जिंदगी भर उसे कोई सम्मान नहीं दिया, लेकिन उसके मरने के बाद वे पुरुषोत्तम की अंतिम इच्छा पूरी करने की ठान लेते हैं।
पुरुषोत्तम की आखिरी इच्छा है कि उसे इक्कीस तोपों की सलामी दी जाए। इसके बाद की कहानी सीधी-सी है कि पुरुषोत्तम के बेटे उसे जैसे-तैसे इक्कीस तोपों की सलामी दिलवा देते हैं। लेकिन कहानी इतनी ही नहीं हैं। इस सबके बीच में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सलामी कैसे दिलवाई और उससे भी बढ़कर पुरुषोत्तम की अंतिम यात्रा से पहले ताबडतोड़ व्यंग्य और कॉमेडी।
निर्देशन:
टेलीविजन पर 'बड़े अच्छे लगते हैं', 'पवित्र रिश्ता' और 'मधुबाला' जैसे सफल धारावाहिकों का निर्देशन करने वाले रविन्द्र गौतम ने इस फिल्म का निर्देशन किया है। रविन्द्र गौतम के निर्देशन में अभी कमियां हैं। फिल्म कई दफा उठती और गिरती है। रविन्द्र फिल्म को और अधिक खूबसूरती से पेश कर सकते थे, लेकिन फिल्म से उनकी पकड़ कई जगह छूटती दिखी।
एक्टिंग:
फिल्म की एक ही कमजोर कड़ी है और वो है नेहा धूपिया। इस फिल्म में उन्हें क्यों कास्ट कर लिया गया, यह समझ से परे है। नेहा जब-जब परदे पर आती हैं, फिल्म को देखने का मजा किरकिरा हो जाता है। उनके अलावा, फिल्म में सभी का अभिनय शानदार है, खासकर अनुपम खेर और दिव्येंदु शर्मा की एक्टिंग तारीफ के काबिल है।
क्यों देखें:
आम आदमी की जिंदगी और उसके हौसले को सलाम करने वाली इस फिल्म को पूरी फैमिली के साथ देखा जा सकता है। बड़ा बजट या स्टार कास्ट न होने की वजह से यह फिल्म सिनेमाघरों तक भले ही दर्शकों को न खींच पाए, मगर दर्शक इसे देखकर बोर नहीं होंगे। फिल्म में राजनीति पर जमकर कटाक्ष किया गया है।
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Web Title: movie review: ekkees toppon ki salami
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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