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Movie Review: एक विलेन

dainikbhaskar.com | Jun 27, 2014, 06:43 PM IST

Critics Rating
  • Genre: एक्शन थ्रिलर
  • Director: मोहित सूरी
  • Plot: मोहित सूरी की फिल्म एक विलेन को लेकर सब कुछ परफेक्ट लग रहा था, जब कि हम सिनेमाहॉल में एंटर नहीं हो गए।
फिल्म का ट्रेलर बेहद शानदार है और इसके गाने बॉलीवुड फैन्स की प्लेलिस्ट में हैं। फिल्म के फर्स्ट डे शो भी बुक्ड हैं। हमें इसकी टिकट के लिए लाइन में भी लगना पड़ा, लेकिन फिल्म शुरू होने के आधे घंटे बाद ही सारा रोमांच, सारी उम्मीदें ताश के पत्तों की तरह बिखर जाती हैं। फिल्म की पटकथा में कुछेक हिस्से इतने बचकाने ढंग से लिखे गए हैं कि गले नहीं उतरते। फिल्म की नायिका आयशा (श्रद्धा कपूर) जिसके बारे में सब यह मानकर चल रहे थे कि वह रितेश देशमुख से ज्यादा साइको निकलेगी, वह 'आशिकी 2' की आरोही की एक अतिरंजित संस्करण निकली। दर्शक यह सोचकर सिनेमाहाल में घुसे थे कि फिल्म एक सस्पेंस थ्रिलर होगी, लेकिन यह भ्रम भी इंटरवल से पहले ही टूट जाता है। ऐसा लगता है जैसे डायरेक्टर को फिल्म यहीं खत्म कर देनी चाहिए थी, क्योंकि सेकेंड हाफ में डायरेक्टर के पास कहने को कुछ भी नहीं है। 'एक विलेन' की कहानी कोरियाई फिल्म 'आई सॉ द डेविल' पर आधारित है। तुषार हीरानंदानी की लिखी कहानी दिलचस्प जरूर है लेकिन कहानी के कई वीक प्वाइंट्स भी हैं।

कहानी
'एक विलेन' गैंगस्टर गुरू (सिद्धार्थ मल्होत्रा) की कहानी है, जो एक माफिया के लिए काम करता है। वह इतना खूंखार है कि उसका अतीत उसे दहशत से भर देता है। एक दिन उसकी मुलाकात आयशा (श्रद्धा कपूर) से होती है, जिससे वह बेहद प्यार करने लगता है। आयशा भी गुरू से प्यार करती है। आयशा एक खुशमिजाज लड़की है। आयशा के आते ही गुरू की जिंदगी एक नया मोड़ लेती है और वह खतरनाक गैंगस्टर से एक दीवाने प्रेमी में बदल जाता है। दोनों की जिंदगी बेहद मजे में आगे बढ़ रही होती है कि तभी राकेश (रितेश देशमुख) उनकी जिंदगी में प्रवेश करता है। यही कहानी का टर्निंग प्वाइंट भी है। राकेश उनकी जिन्दगी में जहर घोलता है की, गुरु के अंदर का गैंगस्टर जाग जाता है।
दरअसल राकेश जो कि अपनी पत्नी (आमना शरीफ) से बेहद खराब रिश्ते की वजह से औरतों से नफरत करने लगता है और वो सीरियल किलर बन जाता है। कौन है राकेश? राकेश का मकसद क्या है? क्या गुरू राकेश के इरादे को समझ पाएगा? क्या गुरू फिर से गैंगस्टर बन जाता है? क्या गुरू अपने मकसद में कामयाब होता है? राकेश का क्या होगा? आयशा का क्या होता है? इन्ही सवालों को समेटती हुई मोहित सूरी की फिल्म 'एक विलेन' अपने अंत तक पहुंचती है।
एक्टिंग
सिद्धार्थ मल्होत्रा एक्शन हीरो के तौर पर डायरेक्टर की गलत पसंद हैं। लाख कोशिशों के बावजूद मोहित सूरी सिद्धार्थ को स्क्रीन पर डेविल दिखा सकने में नाकामयाब हो गए। यह फिल्म सिद्धार्थ के करियर का टर्निंग प्वाइंट हो सकती थी, लेकिन उन्होंने इसे मिस कर दिया। सिद्धार्थ मल्होत्रा अच्छा अभिनय करते हैं, लेकिन यहां उनके किरदार ने उनको रमने नहीं दिया। श्रद्धा ने अपने रोल के मुताबिक खूबसूरती से काम किया है। ऑनस्क्रीन श्रद्धा अपने रोल में जंच रही हैं। रितेश देशमुख ने 'हमशकल्स' के घटिया अभिनय के ठप्पे से खुद को बचा लिया और इस फिल्म से उन्होंने दर्शकों का ध्यान खींचा है।
डायरेक्शन
मोहित सूरी का निर्देशन ठीक है, लेकिन इसमें 'आशिकी 2' जैसी कोई बात नहीं। फिल्म के फर्स्ट हाफ तक मोहित फिल्म के साथ दर्शकों को बांधे रखते हैं, लेकिन सेकेंड हाफ में सिनेमाहाल के अंदर खुसुर-पुसुर सुनाई देने लगती है। इससे साफ लगता है कि दर्शकों का ध्यान फिल्म की ओर कम और निष्कर्ष निकालने में ज्यादा लग जाता है। मोहित फिल्म को और बेहतर बना सकते थे।
फिल्म क्यों देखें
बहुत सारी कमियों को नजरअंदाज कर दिया जाए तो 'एक विलेन' वन टाइम देखे जा सकने वाली फिल्म है। इस फिल्म को आप मोहित सूरी स्टाइल के सिनेमा को देखने के लिए जा सकते हैं।
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Web Title: Movie Review: Ek villain
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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