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Movie Review: 'चल भाग'

dainikbhaskar.com | Jun 13, 2014, 04:43 PM IST

Critics Rating
  • Genre: एक्शन कॉमेडी
  • Director: प्रकाश बलवंत सैनी
  • Plot: 'चल भाग' के डायलॉग फिल्म का प्लस प्वाइंट है, जबकि बचकानी स्क्रिप्ट इस पर पानी फेर देती है। प्रकाश सैनी का डायरेक्शन मामूली है।
फर्जी एनकाउंटर पुलिस का वह भद्दा चेहरा है, जो कई दफा बेनकाब हो चुका है। भारतीय फिल्मकारों को पुलिस की वर्दी और उससे जुड़ी कहानियां अक्सर अपनी ओर आकर्षित करती रही हैं। 'चल भाग' भी फर्जी एनकाउंटर की ही कहानी बयां करती है, लेकिन इस कहानी से नयापन गायब है। फर्जी एनकाउंटर जैसे सब्जेक्ट को लेकर लिखी गई फिल्म की पटकथा कमजोर है। किसी के निजी नफा-नुकसान के लिए फर्जी एनकाउंटर गंभीर मुद्दा है, जिसे डायरेक्टर ने हास्य का रंग देने के चक्कर में हास्यास्पद ज्यादा बना दिया। प्रकाश बलवंत सैनी का डायरेक्शन बेहद रूटीन टाइप का है।
फिल्म पर डायरेक्टर की पकड़ कई दृश्यों से नदारद नजर आती है। फिल्म के डायलॉग जरूर बेहतर लिखे गए हैं, लेकिन पटकथा उतनी ही बचकानी है। कई जगह फिल्म वास्तविकता से परे लगती है। फिल्म देखकर सिनेमा की मामूली समझ रखने वाला शख्स भी यह कहे - 'ऐसा भी कभी होता है' तो कोई हैरानी की बात नहीं। फिल्म के एक सीन में साफ नजर आ रहा है कि जहां फिल्म शूट की जा रही है, वहां लोग इकठ्ठा होकर शूटिंग देख रहे हैं। भीड़ फ्रेम में अटपटी नजर आती है। इसे देखकर यह यकीन करना थोड़ा मुश्किल है कि डायरेक्टर ने फिल्म अपने मनोरंजन के लिए बनाई या फिर दर्शकों के...?

कहानी: डायलॉग बढ़िया, पटकथा बोझिल
दिल्ली की पृष्ठभूमि पर बनी 'चल भाग' की कहानी तीन किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है। मुन्ना (दीपक डोबरियाल) और बंटी (तरुण बजाज) को पुलिस अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार कर जेल में बंद कर देती है। मुन्ना एक छोटा-मोटा टपोरी टाइप स्वघोषित गुंडा है, जबकि बंटी भी एक मामूली चोर है। दोनों की मुलाकात जेल में पहले से बंद दलेर सिंह (वरुण मेहरा) से होती है। तीनों में यहां दोस्ती हो जाती है। इसी दौरान एक पूर्व एमएलए की हत्या हो जाती है, जिससे दिल्ली की सियासत हिल जाती है। तीन लोग दिनदहाड़े एमएलए को गोली मार कर फरार हो जाते हैं। पुलिस एमएलए के हत्यारों को पकड़ लेती है, लेकिन उनके कद्दावर बॉस के इशारे पर फिर छोड़ भी देती है। इधर थानेदार सत्यपाल शर्मा (यशपाल शर्मा) पर दबाव है कि वह एमएलए के हत्यारों को बेनकाब करे। सत्यपाल शर्मा इस मुसीबत से बचने और पुलिस का रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए एमएलए की हत्या का सारा दोष मुन्ना, बंटी और दलेर के सिर मढ़ देता है। थानेदार सत्यपाल शर्मा अपने सहयोगियों किशन (मुकेश तिवारी) और रामलाल (अतुल श्रीवास्तव) के साथ मिलकर तीनों को शूट करने का प्लान बनाता है, लेकिन तीनों किसी तरह जेल से भागने में कामयाब हो जाते हैं। तीनों जब पुलिस की गिरफ्त से भाग रहे होते हैं तो एक पुलिस ऑफिसर की गोली इस दौरान अंडरवर्ल्ड डॉन ममूल (मनीष खन्ना) के भाई उस्मान (कुवंर अजीज) को लग जाती है, जिससे उसकी मौत हो जाती है। पुलिस इस मर्डर को भी तीनों के ही माथे मढ़ देती है।
इसके बाद मुन्ना, बंटी और दलेर अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए डॉन के घर जाते हैं कि उन्होंने उसके भाई की हत्या नहीं की, लेकिन उन्हें यह भी लगता है कि पुलिस पहले ही डॉन को बता चुकी होगी कि उसके भाई की हत्या इन तीनों ने ही की। तीनों इसके बाद कजरी (कीया खन्ना) के घर शरण ले लेते हैं। कजरी उस्मान की प्रेमिका है, लेकिन दलेर भी कजरी से प्रेम करता है। कजरी को पता चलता है कि उस्मान की हत्या हो चुकी है और इन तीनों को पुलिस ढूंढ रही है। इसके बाद क्या कजरी तीनों की सच्चाई जान पाती है...? क्या डॉन को असलियत का पता चलता है...? क्या थानेदार अपने प्लान को पूरा करने में कामयाब हो जाता है...? क्या बंटी, दलेर और मुन्ना अपनी बेगुनाही साबित कर पाते हैं, यही फिल्म की कहानी है।
एक्टिंग: दीपक डोबरियाल ने फिल्म की पटकथा के लिहाज से मुन्ना सुपारी के किरदार को बढ़िया से निभाया है। वरुण मेहरा अपने रोल में जम रहे हैं। दलेर ने भी ठीक काम किया है। कीया खन्ना का फिल्म में छोटा-सा रोल है, जिसमें उन्होंने ठीक-ठाक अभिनय किया है। 'चल भाग' के जरिए एक दफा फिर यशपाल शर्मा ने थानेदार के रूप में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया है। यशपाल का काम नोटिस करने लायक है। मुकेश तिवारी भी अपने किरदार में फिट बैठे हैं। मनीष खन्ना अंडरवर्ल्ड डॉन की भूमिका में सामान्य नजर आ रहे हैं।
डायरेक्शन: प्रकाश बलवंत सैनी का डायरेक्शन समझ से परे है। जब आप एक पेशेवर के तौर पर फिल्म शूट कर रहे होते हैं तो आपको कई छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखना पड़ता है, लेकिन यह सब सैनी शायद भूल गए। फिल्म के कई सीन बेहद कमजोर और कामचलाऊ ढंग से शूट किए गए हैं। प्रकाश सैनी का निर्देशन सामान्य है। यहां तक कि प्रकाश सैनी ने एडिटिंग टेबल पर भी सारी जिम्मेदारी शायद एडिटर के कंधों पर ही छोड़ दी। फिल्म की कोरियोग्राफी की चर्चा नहीं की जा सकती, जबकि बैकग्राउंड म्यूजिक भी अपीलिंग नहीं है।
क्यों देखें:मुन्ना के किरदार में दीपक डोबरियाल और थानेदार के किरदार में यशपाल के बीच कई संवाद प्रभाव छोड़ जाते हैं। टाइमपास करने के लिए यह फिल्म देखी जा सकती है, लेकिन आप दमदार कहानी और बेहिसाब कॉमेडी, जैसी कि फिल्म के ट्रेलर में नजर आ रही है, को देखकर सिनेमाघरों में जाएंगे तो आपको निराशा ही हाथ लगेगी। फिल्म की कमजोर कड़ी इसका डायरेक्शन और पटकथा है, तो ऐसे में आप तय कर लीजिए कि आप फिल्म देखने जा रहे हैं या नहीं...?
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Web Title: Movie Review: Chal Bhaag
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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