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Movie Review: कमजोर कहानी में जान डालती रणबीर-अनुष्का की केमिस्ट्री

dainikbhaskar.com | May 15, 2015, 11:44 AM IST

Critics Rating
  • Genre: पीरियड क्राइम ड्रामा
  • Director: अनुराग कश्यप
  • Plot: डायरेक्टर अनुराग कश्यप को लीक से हटकर फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है।

(फिल्म के पोस्टर में अनुष्का शर्मा और रणबीर कपूर)

'बॉम्बे वेलवेट' के जरिए एक बार फिर वे एक नई सोच के साथ ऑडियंस के बीच आए हैं। फिल्म की कहानी इतिहासकार ज्ञान प्रकाश की पुस्तक 'मुंबई फेबल्स' से प्रेरित है।

क्या है कहानी

कहानी शुरू होती है भारत-पाक विभाजन के दो साल बाद यानी 1949 से। बंटवारे का दर्द झेलते हुए जॉनी बलराज (रणबीर कपूर) बचपन में ही अपनी मां के साथ बॉम्बे आ आता है। वह गरीबी में जीता है, लेकिन उसका एक ही सपना होता है 'बिग शॉट' यानी बड़ा आदमी बनने का। जैसे-जैसे जॉनी बड़ा होता है, उसका यह सपना भी बड़ा होता जाता है। इस बीच उसकी मुलाकात होती है मीडिया मुगल कैजाद खंबाटा (करन जौहर) से, जो उसे अपने क्लब 'बॉम्बे वेलवेट' का मैनेजर बना देता है। जॉनी को क्लब में काम के साथ-साथ प्यार भी मिल जाता है। दरअसल, वह यहां की जैज सिंगर रोजी (अनुष्का शर्मा) को दिल दे बैठता है। इस बीच मुंबई को महानगर बनाने की कवायद शुरू होती है। जहां नेता और बिजनेसमैन सहित सभी महानगर बनने जा रहे बॉम्बे में अपना हक चाहते हैं। वहीं, जॉनी की चाहत भी अपना हिस्सा पाने के लिए बलवती होने लगती है। यहां से फिल्म की कहानी में ट्विस्ट आता है, जो धोखा, छल-कपट, सियासती दांव और मारकाट से भरा हुआ है। क्या है यह ट्विस्ट, इसे देखने के लिए आपको सिनेमाघरों का रुख करना होगा।

अनुराग कश्यप का डायरेक्शन

60 के दशक के मुंबई शहर को दिखाने में अनुराग कश्यप ने कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी, जिसकी तारीफ भी बनती है। हालांकि, कहानी कहीं-कहीं इतनी धीमी है कि बोरियत होने लगती है। फर्स्ट हाफ में आपको कहानी नई लगेगी, लेकिन इसे भी लंबा खींचा गया है, जबकि सेकंड हाफ देखकर आपको लगने लगेगा कि यह सब तो पहले भी कई फिल्मों में देखा जा चुका है। अनुराग कश्यप की पिछली निर्देशित फिल्मों के मुकाबले यह फिल्म काफी फीकी है और निराश करती है।

स्टार कास्ट और एक्टिंग

रणबीर कपूर जॉनी बलराज के किरदार में फिट बैठे हैं उनका टपोरी वाला स्टाइल और स्ट्रीट फाइटर का अंदाज फिल्म में जान डालता है। वहीं जैज़ सिंगर रोज़ी के रोल को अनुष्का शर्मा ने भी बखूबी निभाया है। दोनों की केमिस्ट्री भी काफी अच्छी रही।
करन जौहर को कैजाद खंबाटा के किरदार के लिए चुन फिल्ममेकर ने कोई गलती नहीं की। वे इस रोल में अच्छे दिखे हैं और एक्टिंग भी शानदार की है। एक्टिंग में रणबीर के दोस्त(चिमन) का रोल निभाने वाले सत्यदीप मिश्रा का जिक्र किया जाना भी जरुरी है। उनकी एक्टिंग बेहतरीन है। हालांकि, एक्टर्स की अच्छी एक्टिंग भी फिल्म को बचा नहीं पाएगी, कहीं-कहीं तो ऐसा लगता है कि फिल्म कब होगी।

फिल्म का संगीत

अमित त्रिवेदी ने 'बॉम्बे वेलवेट' में संगीत देने के लिए दो साल तक मेहनत की है और उनकी यह फिल्म में दिखती भी है। बैकग्राउंड स्कोर इतना अच्छा है कि इसे सुनने के बाद आप अपने आपको 60 के दशक में खड़ा पाएंगे। इसके अलावा, 'जाता कहा हैं दिवाने' और 'मोहब्बत बुरी बीमारी' सहित सभी सॉन्ग्स भी आपको 5 दशक पहले की याद दिलाएंगे।

देखें या नहीं

फिल्म रणबीर कपूर की बढ़िया एक्टिंग की वजह से देखी जा सकती है। अगर आप अनुराग कश्यप के डायरेक्शन के फैन रहे हैं, उन्हें फिल्म निराश करेगी।
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Web Title: Bombay Velvet Movie Review
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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