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Movie Review: 'पीके'

शांति भूषण | Dec 19, 2014, 12:22 PM IST

Critics Rating
  • Genre: कॉमिक ड्रामा
  • Director: राजकुमार हिरानी
  • Plot: dainikbhaskar.com के लिए आमिर खान को भोजपुरी सिखाने वाले शांति भूषण ने किया PK का रिव्यू।
संसार में भगवान एक नाहीं दूइ तरह के होते हैं.... एक जउन हमलोगो को बनाये हैं अउर दूसरा जेकरा के संसार के बाबा लोग बना के मन्दिर में बइठा दिये हैं......हम लोगो को जो बनाए हैं उनका हम नहीं देखे हैं....लेकिन जउने भगवान को तपस्वी जी जइसे बाबा लोग बनाए हैं , उन्हीं के जइसा हैं,रिश्वत लेबे वाला अउर काम न करे वाला बेइमान.....जो झूठी तारीफ़ अउर महंगा चढ़ावा से खुश हो जाता है... गरीबों को लाईन में खड़ा कराता है और अमीरन से जल्दी मिल लेता है।
कुछ अइसही क्रांतिकारी अउर निडर संवाद फिल्म पीके में बा, जवन दर्शक लोग के हिला दीही। राजकुमार हिरानी के फिलिम 'पीके' में भगवान के नाम पर चले वाला धार्मिक उद्योग-धंधा के जबर्दस्त तरीका से पर्दाफाश कइल गइल बा।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में इ पहिली फिलिम ह, जउन एतना निडर तरीका से धार्मिक व्यवसाय में बुरी तरह से फंसल भगवान के मुक्त करावे के पहल करत बा। भगवान के नाम पर लोगन के साथ चाहे कतनो लूट खसोट हो जाव, लेकिन हमनी के कबहु ना सोची ना जा कि लोगन के साथे गलत होखत बा। काहे से कि हमनी के भगवान से ओतने डेराइना जा, जेतना कि भूत से। एह चल्ते (कारण) जब भगवान के नाम पर हमनी के कोई लूटेला त हमनी के विरोध कइला के जगह लुटाइल पसंद करीनाजा। काहे कि हमनी के डेराइ ना जा कि भगवान जी खीसीया (गुस्सा) जइहन।
धरम के धुरंधर भी हमनी मानसिकता के एतना कमजोर कर देले बाड़ सन कि ओकनियो से हमनी के सवाल करे के हिम्मत ना जुटा पाई ना जा। अउर गलती से कोई कहियो दिही त चटाक से गाल पर थप्पड़ पड़ जाई कि धार्मिक आस्था पर सवाल ना उठावे के, काहें से कि इ विश्वास के मामला ह। कए बार त गाली भी खाए के पड़ जाला। लेकिन फिलिम पीके में निर्देशक राजकुमार हिरानी धरम अउर भगवान पर आताना सवाल उठइले बाड़ें कि फिलिम खतम होत-होत लागे लागता कि हमनी के भगवान के ऊ मूर्ती के धो के साफ कर देनी जा, जवना के कए साल से धर्माधिकारी गंदा कर देले रह सन।
पटकथा
राजकुमार हिरानी अउर अभिजात जोशी अपना लेखनी से एगो देसी कहानी के ताना-बाना बुनले बाड़न जा, जवना में एगो आम आदिमी के दरद बखूबी उभर के सामने आइल बा। आम आदिमी अपना देश के सरकारी दफ्तर में कभी आधार कार्ड त कभी राशन कार्ड, त कभी कुछु अउर खातिर भटके ला, लेकिन हर जगह पर ऊ आताना परेशान हो जाला कि ओकरा अपने जमीन पराया लागे लागे ला। ऊ अपने धरती पर कवनो एलियन के जइसे हो जाला, बिलकुल अपरिचित। कभी ऊ मंदिर-मस्जिद में जाला, त कभी तिरिथस्थान पर भागेला। कभी घरे में पूजा करावेला त कभी दान देला, काहे से कि ऊ हर समय परेशान रहेला, अउर ओकरा से निजात पावे खातिर इ सब करेला।
राजू हिरानी आम आदिमी के एही दरद के अपना फिलिम में देखइले बाड़ें। हिरानी बाड़ा सफाई से एगो एलियन के माध्यम से हमनी के समाज के भीतर मौजूद धार्मिक अंधविश्वास पर अंगुली उठवले बाड़ें। अपना फिलिम में ऊ इ देखावे के सफल कोशिश कइले बाड़ें कि दूसर ग्रह से एगो आइल इंसान अउर एह धरती पर मौजूद इंसान के दरद कतना एक-दूसरा से मिलत-जुलत बा।
डाइरेक्शन
राजू हिरानी एक बार फिर अपना फिलिम पीके में दर्शन के कथा के आधार बनइले बाड़न, जइसे लगे रहो मुन्ना भाई में ऊ गांधी जी के विचार के आज के युग में प्रासंगिक देखवले रहन। ओकरा बारे में सोचे अउर इस्तेमाल करे के देखवले रहन, जवना के देशव्यापी असर भी भईल रहे। अइसन लागता कि ठीक ओइसही फिलिम पीके में भी संत कबीर के दर्शन के दोबारा व्याख्या करल गइल बा। जब हम इ फिलिम देखत रहीं, त कए बार हमरा मन में खयाल आइल कि जब संत कबीर रहल होइहन त उनकर बात भी लोगन के ओइसही अटपटा लागत होई, जैसे पीके के भूमिका में आमिर खान के बात लागत बा। पीके में कबीर दास के विचार के पुरजोर वकालत कइल गइल बा। राजू हिरानी के डाइरेक्शन शानदार बा।
एक्टिंग
बात अभिनय के कइल जाव त पीके के भूमिका में आमिर खान कभी ना भूलाए ओला एक्टिंग कइले बाड़ें। बाकी के कलाकार लोग भी आपन सर्वश्रेष्ठ अभिनय कइले बाड़न जा। अनुष्का शर्मा बहुते प्यारी लागल बाड़ी अउर अभिनय भी लाजवाब कइले बाड़ी। पूरा फिलिम उनके प्वाइंट ऑफ व्यू पर बनल बा। संजय दत्त भी अनूठा लागल बाड़ें। बोमन ईरानी अउर सौरभ शुक्ला बहुत मजेदार त सुशांत सिंह राजपूत बहुते फ्रेश लागल बाड़ें।
काहें देखे के चाहीं
अभिजात जोशी अउर राजकुमार हिरानी मिलके अद्भुत फिलिम लिखले बाड़ें, जवना के राजू हिरानी ओतने खूबसूरत तरीका से निर्देशित कइले बाड़ें। हिरानी के सिनेमा एक बार फिर आपन अलगे संसार रच रहल बा। जवना में ऊ ढेर सारा गंभीर मुद्दा के हंसी में पिरोके दर्शक लोगन के आपन बात समझा देत बाड़ें। लेकिन बता दीं कि पीके एगो अतिसंवेदनशील मुद्दा पर आधारित फिलिम ह, जवना में राजू पैनापन के साथे आपन बात कहत नजर आइल बाड़ें। लोगन के हंसावतो बाड़ें, रोआवतो बाड़ें अउर बतावत बाड़ें कि कइसे एगो इंसान धार्मिक दुश्चक्र में फंसके एलियन बन जाला। फिलिम दर्शक के खूब मनोरंजन करे ओला बा अउर जात-जात मन में कएगो सवाल छोड़ देता जवना के नजरअंदाज ना कइल जा सकेला।
पीके के भूमिका में आमिर खान अपना भोलापन से एकबार फिर साबित कर देले बाड़न कि ऊ हिंदुस्तान के महान अभिनेता लोगन में एक बाड़ें। कुल मिलाके इ कहल जा सकत बा कि प्रत्येक दर्शक के इ फिलिम एक बार जरूर देखे के चाहीं।
(कौन हैं शांति भूषण -शांति भूषण पिछले दो सालों से फिल्म PK के लिए आमिर खान को भोजपुरी सिखा रहे थे। शांति भूषण बॉलीवुड में बतौर लेखक सक्रिय हैं। इस दौरान उन्होंने कई सीरियल्स की पटकथाएं लिखीं, जिनमें 'अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजे', 'प्रतिज्ञा' आदि शामिल हैं। हाल में शांति भूषण द्वारा लिखे गए दो सीरियल्स ‘महाकुंभ’ (लाइफ ओके) और ‘डोली अरमानों की’ (जीटीवी) प्रसारित हो रहे हैं।)
आगे देखें 'पीके' के रिव्यू का वीडियो...
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Web Title: PK Movie Review in Bhojpuri
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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