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7 कारण: जायसी के काव्य पर बेस्ड नहीं, बल्कि काल्पनिक है 'पद्मावत' की कहानी

जानिए ऐसी 7 वजह, जो बताती हैं कि भंसाली ने जायसी के काव्य से अलग कल्पना को बनाया कहानी का आधार।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 01, 2018, 12:02 AM IST

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    मुंबई.डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' को लेकर खूब विवाद हुआ। राजपूत करणी सेना और कुछ हिंदू संगठनों द्वारा फिल्म का विरोध यह कहते हुए कहा गया कि भंसाली ने एतिहासिक तथ्यों को तोड़मरोड़ का पेश किया है। जबकि भंसाली का कहना था कि उन्होंने कहानी इतिहास से ली ही नहीं। बल्कि मलिक मोहम्मद जायसी के काव्य 'पद्मावत' के आधार पर फिल्म बनाई है। हालांकि, फिल्म देखने के बाद पता चलता है कि भंसाली ने काव्य को आधार नहीं बनाया, बल्कि प्रेरणा ली है। काव्य से मेल नहीं खाते कई तथ्य...

    - 'पद्मावत' के कई ऐसे सीन हैं, जो जायसी के काव्य से मेल नहीं खाते। यह बात और है कि भंसाली ने फिल्म शुरुआत में ही डिसक्लेमर देकर यह बता दिया है कि फिल्म काल्पनिक है और 'पद्मावत' से सिर्फ प्रेरित है। लेकिन इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि फिल्म पर मच रहे बवाल की शुरुआत से ही वे यह कह रहे हैं कि 'पद्मावत' फिल्म का आधार है और सेंसर बोर्ड ने इसी को ध्यान में रखकर फिल्म का नाम 'पद्मावती' से 'पद्मावत' करवाया था।

    अब नजर डालते हैं ऐसे कुछ तथ्यों पर जो यह बताते हैं कि फिल्म 'पद्मावत' कोरी कल्पना मात्र है:-

    कारण नंबर 1.जायसी ने अपने काव्य में एक हीरामन सुए (तोते) के वर्णन किया है, जो सिंघलद्वीप के राजभवन में रहता है और पद्मावती को बहुत प्यारा होता है। यहां तक कि जब पद्मावती शादी के लायक होती है और उसके लायक कोई वर कहीं दिखाई नहीं देता तो हीरामन देश से बाहर जाकर पद्मावती के लिए वर की तलाश की योजना बनाता है और इसी सुए के जरिए रतनसेन को पद्मावती की खूबसूरती का पता चलता है। लेकिन भंसाली की फिल्म में इस हीरामन सुए कोई जिक्र नहीं है।

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    कारण नंबर 2:भंसाली की फिल्म के मुताबिक, रतनसेन अपनी पहली पत्नी नागमती के ससुराल से मिली एक की कीमती माला को दान में दे देते हैं। इस वजह से नागमती गुस्सा हो जाती हैं और कहती हैं कि वह माला सिघल राज्य से आई थी, इसलिए रतनसेन को वहीं से लाकर दूसरी माला उन्हें देनी होगी। पत्नी की इसी जिद के चलते रतनसेन सिंघल जाते हैं। जबकि जायसी के 'पद्मावत' की कहानी के मुताबिक, हीरामन सुए के मुंह से पद्मावती की सुंदरता का वर्णन सुन रतनसेन सिंघल जाते हैं।

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    कारण नंबर 3: भंसाली की फिल्म के अनुसार, पद्मावती जंगल में शिकार करने जाती हैं और गलती से उनका तीर रतनसेन को लग जाता है, जो वहां(सिंघल) उन्हें देखने के उद्देश्य से पहुंचे हैं। यह दोनों की पहली मुलाक़ात होती है। जबकि जायसी के पद्मावत में लिखा है कि रतनसेन सुए के साथ ही सिंघल पहुंचे थे और महादेव के एक मंदिर में बैठकर पद्मावती का इंतजार कर रहे थे। क्योंकि सुए ने उन्हें बताया था कि पद्मावती वसंत पंचमी पर महादेव के उसी मंदिर में पूजा करने जाती हैं। जायसी ने अपने काव्य में यह भी लिखा है कि सुआ रतनसेन को मंदिर में छोड़कर पद्मावती के पास जाता है और उनके बारे में सबकुछ बता देता है। यानी कि रतनसेन से पहली मुलाक़ात से पहले ही पद्मावती उनके बारे में सब जान चुकी थीं।

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    कारण नंबर 4:भंसाली की कहानी के मुताबिक, रतनसेन पद्मावती का तीर लगने के बाद मूर्छित हो जाते हैं। जबकि जायसी का काव्य कहता है कि रतनसेन जैसे ही मंदिर में पद्मावती की पहली झलक देखते हैं तो उनकी सुंदरता का तेज नहीं सह पाते और बेहोश हो जाते हैं। बाद में पद्मावती उन्हें होश में लाने के लिए उनपर चंदन छिड़कती हैं। लेकिन जब वे होश में नहीं आते तो पद्मावती उनकी छाती पर यह लिखकर चली जाती हैं , 'जोगी (क्योंकि रतनसेन मंदिर में जोगी के रूप में ही रहते हैं) तूने भिक्षा प्राप्त करने योग कुछ नहीं सीखा, जब भिक्षा पाने का समय आया तो तू सो गया।' जब रतनसेन को होश आता है तो वे बहुत पछताते हैं।

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    कारण नंबर 5 :भंसाली की कहानी कहती है कि राघव चेतन चित्तौड़ का राजपुरोहित था और जब रतनसेन विवाह के बाद पद्मावती को उससे मिलवाने ले जाते हैं तो वह रानी पर मोहित हो जाता है। जबकि जायसी के काव्य में राघव चेतन को तांत्रिक बताया गया है, जिसे सिद्धियां प्राप्त हैं। इसके अलावा, उसे स्त्रीलोलुप भी जायसी ने नहीं बताया है।

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    कारण नंबर 6 :भंसाली की कहानी के मुताबिक, राघव चेतन को इसलिए राज्य से बाहर निकाला जाता है, क्योंकि वह रतनसेन और पद्मावती के एकांत पलों को छुपकर देखता है। जबकि जायसी का काव्य कहता है कि राघव चेतन को राज्य से इसलिए निकाला जाता है, क्योंकि वह खुद को महान दिखाने के लिए तंत्र विद्या के जरिए एक दिन पहले ही आकाश में दूज का चांद दिखा देता है। राघव का झूठ दूसरे दिन तब पकड़ा जाता है, जब असल में दूज का चांद निकलता है और दूसरे पंडित इसके लिए राजा से उसे राज्य से निकालने की मांग करते हैं।

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    कारण नंबर 7 : भंसाली की कहानी कहती है कि रतनसेन राघव को सिर्फ राज दरवार से निकलने का आदेश देता है और पद्मावती यह कहकर उसे राज्य से निकलवा देती हैं कि वह अगर यहां रहेगा तो दूसरी महिलाओं के लिए ख़तरा हो सकता है। जबकि जायसी का काव्य कुछ और ही कहता है। जायसी के 'पद्मावत' के मुताबिक, राघव को देश से निकालने का आदेश राजा रतनसेन का था। जब पद्मावती को लगता है कि इतने गुणी ब्राह्मण को राज्य से निकालना ठीक नहीं है तो वह राघव को सोने का कंगन देकर रोकने की कोशिश करती हैं। हालांकि, प्रतिशोध की आग में जलता राघव चेतन रानी के लालच में नहीं आता और राज्य से निकल जाता है।

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