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इस एक्ट्रेस को मिला था संजीव कुमार से प्यार में धोखा, खो बैठीं मानसिक संतुलन

dainikbhaskar.com | Mar 03, 2017, 20:08 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स

सुलक्षणा पंडित।

एंटरटेनमेंट डेस्क। सूरत, सीरत और फन जैसी खूबियां ईश्वर बड़ी मुश्किल से ही किसी एक को बख्शता है। हिंदी सिनेमा के आकाश में ऐसी कम ही शख्सियतें हैं, जो तीनों विधाओं की दौलत से नवाजी गई हों। सुलक्षणा पंडित, एक ऐसी ही अदाकारा हैं। बेहद नफासत भरा अंदाज, मखमली आवाज़ और अपने समय के लगभग हर बड़े हीरो के साथ काम करने वाली सुलक्षणा बेहद संवेदनशील एक्ट्रेस हैं। सुलक्षणा की छोटी बहन विजेयता के मुताबिक, सुलक्षणा संजीव कुमार से बेइंतहा मोहब्बत करती थीं। लेकिन संजीव के दिलोदिमाग पर तो हेमा मालिनी छाई हुई थीं। उन्होंने सुलक्षणा के प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इसके बाद से वो मानसिक संतुलन खो बैठीं। अब मुंबई के अपने बड़े से फ्लैट में अकेली हैं सुलक्षणा...
कभी प्रसिद्धि और चकाचौंध में रहने वाली शोख, मस्तमौला और बेलोस अंदाज वाली यह अदाकारा आज मुंबई के अपने बड़े से फ्लैट में अकेली हैं। दो बड़े फ्लैट को मिलाकर बने उनके घर में उदासी हर कोने में दिखाई देती है। फिल्मों में अक्सर फिल्माए गए अपने चरित्रों की तरह वास्तव में वो संघर्षरत एक मध्यमवर्गीय महिला ही लगती हैं। अवसाद से भरी, अपनी बड़ी बहन माया और वरुण के साथ रह रही हैं सिर्फ कहने को। दिल से तो वे अपनी रसोई के एक मात्र गैस स्टोव की तरह अकेली हैं। खुद जलने के लिए तन्हाई मैं तरन्नुम के साथ...!
घर का राशन और बिजली बिल भरती हैं बहनें...
कभी अपनी खूबसूरत आंखों, फ्रेशनेस, गोरे रंग और डिज़ाइनर कपड़ों के लिए ढेर सारे कॉम्प्लीमेंट्स पाने वाली सुलक्षणा की बेबसी का आलम यह है कि उनके लिए घर का राशन बहन विजेयता पंडित, बिजली का बिल संध्या भर्ती हैं, जबकि जतिन-ललित हर महीने कुछ रुपए देते हैं। अपने परिवार में सबसे ज्यादा उन पर अपनी मां का प्रभाव है। उनके आध्यात्मिक स्वभाव की चर्चा सुलक्षणा अपने सहकर्मियों के साथ करती थीं। सुलक्षणा के पिता को मृत्यु के बाद उन्होंने कलकत्ता में बड़े साहस के साथ उनके 7 भाई-बहनों को पाला। यही जिम्मेदारी का भाव बाद में सुलक्षणा में भी दिखा। खुद को भूलकर परिवार के लिए जो उनसे बन पड़ा उन्होंने किया। बाद में अपने कई इंटरव्यू में उन्होंने माना कि कभी अपने लिए सोचने का वक़्त ही नहीं निकाल पाई और वह उम्र निकल गई जब कोई लड़की सुनहरे जीवन के सपने बुनती है। एक कसक सी रही। अपने प्यार तक को नहीं पा सकीं। शादी तो सपना ही रहा। किस्मत ने हर मोड़ पर दगा दिया।

जब भाई ही नहीं पूछ रहे हैं तो फिर...
अपनी गायिकी को लेकर कुछ समय पहले ही सुलक्षणा ने कहा था-मैं आज भी गाना चाहती हूं लेकिन पता नहीं क्यों संगीतकार मुझे मौका नहीं देते। मेरे भाई जतिन-ललित भी गवाना चाहते हैं- ऐसी बात नहीं है...सुलक्षणा बचाव करते हुए कहती हैं। शायद उन्हें लगता है कि मैं आज स्थापित नाम नहीं हूं, लेकिन मैं आज भी अच्छा गाती हूं। जब लताजी को 70 के पार भी संगीतकार मौका दे रहे हैं तो मैं तो सिर्फ 50 से कुछ ही ज्यादा हूं। मैं एआर रहमान और अनु मलिक के साथ गाना चाहती हूं, लेकिन जब भाई ही नहीं पूछ रहे तो...मज़बूरी और लाचारी शायद उनके जीवन के स्थायी भाव बन गए हैं।

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, अब समंदर किनारे गुजरती है सुलक्षणा की शाम...
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Web Title: Sanjeev Kumar left Sulakshana Pandit and She Mentally depressed
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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