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अधूरी रह गई थीं ओम पुरी की ये Wish, इस जगह लेना चाहते थे आखिरी सांस

6 जनवरी, 2017 की सुबह ओम पुरी अपने फ्लैट पर मृत मिले थे।

RJ Alok | Last Modified - Jan 06, 2018, 05:12 PM IST

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    ओम पुरी।

    मुंबई।बॉलीवुड एक्टर ओम पुरी की शनिवार को फर्स्ट डेथ एनिवर्सरी है। 6 जनवरी, 2017 की सुबह वो अपने फ्लैट पर मृत मिले थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया था कि ओमपुरी के सिर में डेढ़ इंच गहरा और 4 सेंटीमीटर लंबा जख्म का निशान था। ओम पुरी को थिएटर से बहुत लगाव था। एक बार तो नाटक में पार्टिसिपेट करने के लिए उन्हें छुट्टी नहीं मिली तो उन्होंने नौकरी ही छोड़ दी थी। 2014 में खुद ओम पुरी ने यह बात 'द अनुपम खेर शो' में बताई थी।


    - मौत से एक दिन पहले ओम पुरी ने अपनी PRO स्मिता सिंह से बातचीत की थी। स्मिता ने Dainikbhaskar.com को बताया था कि ओम पुरी अज्ञातवास के लिए लुंबिनी (नेपाल) जाना चाहते थे। वहीं वे शरीर छोड़ना चाहते थे। पुरी अपनी नेगेटिव इमेज बनने से भी दुखी थे। स्मिता के मुताबिक, ओम नसीरउद्दीन शाह से आखिरी दिनों में खफा थे।


    आगे की स्लाइड्स पर, ओमपुरी की वो इच्छाएं जो पूरी नहीं हो पाईं...

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    ओम पुरी।

    अधूरी रह गईं ओम पुरी की ये ख्वाहिशें...

    - स्मिता के मुताबिक, "करीब एक हफ्ते से मुझे ओम साहब कह रहे थे- मुझे अज्ञातवास पर लुंबिनि जाना है। जहां गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। मैं 15 दिन के लिए वहां जाऊंगा और किसी को नहीं बताऊंगा कि मैं कहां जा रहा हूं। वहां गांव में रहूंगा, मोमबत्ती और टॉर्च के सहारे गुजारा करूंगा। मैं वहां उसी पेड़ के पास बैठूंगा, जहां गौतम बुद्ध बैठा करते थे। मैं अपने शरीर को वहां त्याग दूंगा।"
    - स्मिता ने बताया, “ओम पुरी पॉलिटिक्स में जाना चाहते थे। वे कहते थे- मैं एक पॉलिटिकल पार्टी भी बनाना चाहता हूं, जिसका नाम 'इंसानियत' रखा है। पार्टी के तहत कुछ खास नियम बनाऊंगा, जैसे कि अगर कोई एम्बुलेंस में जा रहा हो तो वो जल्दी से हॉस्पिटल पहुंच जाए।”
    “देरी और ट्रैफिक की वजह से उसकी मौत ना हो। इस बात की मोदी जी भी सराहना करेंगे। एक बात और कहना चाहता हूं कि जब मेरी डेथ होगी ना, तो देखना मोदी जी ही पहले इंसान होंगे, जो शोक जताएंगे।” बता दें, ओम पुरी की मौत के बाद नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके शोक जताया था।

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    नसीरुद्दीन शाह के साथ ओम पुरी।

    ओमपुरी को रहे ये 3 मलाल...

    1. स्मिता के मुताबिक- ओम ने मुझसे कहा था, “नसीर साहब मुझे नहीं समझ पाए, मेरे बहुत पुराने मित्र हैं। पहले मुझे ओम पुरी के नाम से बुलाते थे और अब ओम कहकर बुलाते हैं। अब चाहे फिल्म इंडस्ट्री के लोग हों या मीडिया के लोग, मेरे जाने के बाद ही मेरी अहमियत समझेंगे और मेरे बारे में चीजों को खोजेंगे।”
    2. स्मिता के मुताबिक ओम कहते थे, “मैं एक दिन पूरी मीडिया से बात करूंगा कि आखिर मेरे लिए आप नेगेटिव खबरें ही क्यों छापते हैं? मेरी अच्छी बातें भी लिखें। शहीद वाले बयान पर मुझे बहुत दुख हुआ था। पछतावे के लिए मैं इटावा में शहीद के घर गया। 10 लाख रुपए का चेक दिया और माफी भी मांगी। इस पर किसी ने बात नहीं की।”
    3. स्मिता बताती हैं कि ओम जी ने मुझसे कहा था, “तुम्हें पता है आज तक की मेरी सबसे पसंदीदा फिल्म 'देव' रही है। जिसमें मैंने बढ़िया काम किया था। लेकिन उसकी कहीं भी सराहना नहीं की गई। मेरी पॉजिटिव चीजों के बारे में कभी नहीं बोला जाता।”

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    फिल्म 'जाने भी दो यारो' में ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह।

    तंगहाली में बीता था बचपन...

    - ओम पुरी को 'अर्ध सत्य' और 'आरोहण' मूवी के किरदार के लिए बेस्ट एक्टर के नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया था।
    - 1990 में पद्मश्री भी मिला था। ओम का बचपन तंगहाली में गुजरा था। उनको ढाबे में काम करना पड़ा। यहां तक कि चाय की दुकान में गिलास भी साफ करने पड़े।
    - अगस्त, 2014 में ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह एक्टर अनुपम खेर के शो 'द अनुपम खेर शो' में पहुंचे थे, जहां ओम पुरी ने अपनी लाइफ के कई रोचक किस्से शेयर किए थे।

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    ओम पुरी।

    वकील से कहा- अपनी नौकरी रख ले, मेरा हिसाब कर दे...

    -ओम पुरी के मुताबिक, "शुरुआती दिनों में मैं चंडीगढ़ में एक वकील के साथ मुंशी था। एक बार चंडीगढ़ में मेरे नाटक की परफॉर्मेंस थी, लेकिन वकील ने मुझे लगातार 3 छुट्टी देने से मना कर दिया। इस पर मैंने कहा कि अपनी नौकरी रख ले, मेरा हिसाब कर दे।"
    - "कॉलेज के लड़कों को पता चला कि मैंने नौकरी छोड़ दी तो उन्होंने प्रिंसिपल से बात की। इस पर प्रिंसिपल ने प्रोफेसर से कहा- कॉलेज में कोई जगह है क्या? इस पर उन्होंने कहा- है एक लैब असिस्टेंट की, लेकिन ये आज का स्टूडेंट है, इसे क्या पता साइंस के बारे में।"
    - "प्रिंसिपल बोले-कोई बात नहीं, लड़के अपने आप कह देंगे, नीली शीशी पकड़ा दे, पीली शीशी पकड़ा दे।"

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    ओम पुरी।

    रेलवे ड्राइवर बनना चाहते थे ओम पुरी...

    - ओम पुरी का जन्म 18 अक्टूबर 1950 को हरियाणा के अंबाला में हुआ था। पिता रेलवे में नौकरी करते थे, इसके बावजूद परिवार का गुजारा बामुश्किल चल रहा था।
    - ओमपुरी का परिवार जिस मकान में रहता था। उसके पास एक रेलवे यार्ड भी था। ओमपुरी को ट्रेनों से काफी लगाव था।
    - रात के वक्त वह अक्सर घर से निकलकर रेलवे यार्ड में जाकर किसी भी ट्रेन में सोने चले जाते थे। यही वह वक्त था, जब ओम पुरी सोचते थे कि में बड़ा होकर एक रेलवे ड्राइवर बनूंगा।

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    ओम पुरी और नाना पाटेकर।

    क्लर्क की सरकारी नौकरी छोड़ ज्वाइन किया था एनएसडी

    - ओम पुरी के मुताबिक, "मैंने डिवाना साहब से ख्वाहिश जाहिर की कि मैं एनएसडी (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) ज्वाइन करना चाहता हूं। उस वक्त मैं सरकारी नौकरी करने लगा था। लोअर डिविजन क्लर्क था।"
    - "डिवाना साहब ने मुझसे कहा- देखो तुम सरकारी नौकरी कर रहे हो और ऐसी नौकरी मिलना काफी मुश्किल है। थिएटर में पैसा नहीं है। तुम गरीब परिवार से हो, इसलिए तुम क्या कमाओगे।"
    - "बहरहाल, मैंने तो ठान ली थी, मैंने चुपके से अप्लाई कर दिया। इंटरव्यू आ गया और मैं सिलेक्ट हो गया। इसके बाद मैंने उनसे कहा- मैं एनएसडी में सिलेक्ट हो गया और मैं जा रहा हूं। सरकारी नौकरी मैंने छोड़ दी है।"

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    ओम पुरी।

    20 हॉलीवुड मूवी में किया था काम

    ओम पुरी को 'अर्ध सत्य' और 'आरोहण' मूवी के किरदार के लिए बेस्ट एक्टर के नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया था। उन्होंने 100 से ज्यादा हिंदी और 20 हॉलीवुड मूवी में काम किया था।

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