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जब धर्मेंद्र के हाथों में आ गई थी सरदार की दाड़ी, टपकने लगा था खून

हम आपको उनका एक ऐसा किस्सा बता रहे हैं, जिसमें कॉमेडी भी है, ट्रेजडी भी है, इमोशंस भी हैं और ड्रामा भी है।

धर्मेन्द्र प्रताप सिंह | Last Modified - Dec 08, 2017, 04:21 PM IST

  • जब धर्मेंद्र के हाथों में आ गई थी सरदार की दाड़ी, टपकने लगा था खून
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    फिल्म 'प्रतिज्ञा' के एक सीन में धर्मेंद्र।

    मुंबई. धर्मेंद्र के यूं तो कई किस्से फेमस हैं। लेकिन आज हम आपको उनका एक ऐसा किस्सा बता रहे हैं, जिसमें कॉमेडी है, ट्रेजडी है, इमोशंस हैं और ड्रामा भी है। यह किस्सा उस वक्त का है, जब वे 1975 में फिल्म 'प्रतिज्ञा' की शूटिंग कर रहे थे। शूटिंग के लिए मुंबई से नासिक जाते वक्त धर्मेंद्र ने एक सरदार की दाढ़ी को इतने जोर से पकड़ा कि वह हाथ में आ गई थी और सरदार की ठुड्डी से खून पहने लगा था। पूरे किस्से पर डालते हैं एक नजर...

    - 'प्रतिज्ञा' को अजीत सिंह देओल ने प्रोड्यूस किया था, जबकि इसके डायरेक्टर दुलाल गुहा थे। दुलाल गुहा की खास पहचान यह थी कि वे अपनी हर फिल्म की शूटिंग नाशिक में करते थे।
    - जब 'प्रतिज्ञा' की यूनिट शूटिंग के लिए मुंबई से नाशिक रवाना हुई तो इसमें दो फिएट कार सहित 8-10 गाड़ियां थीं। एक फिएट में खुद धर्मेंद्र बैठे हुए थे, जो सबसे आगे चल रही थी और उनके पीछे वाली कार में थे उन दिनों धर्मेंद्र के बेहद ख़ास कहे जाने वाले भगवंत सिंह।
    - भगवंत धर्मेंद्र के लिए इतने खास थे कि उन्होंने उन्हें प्रोड्यूसर तक बनवा दिया था। भगवंत ने दो फिल्मों 'समाधि' और 'देशद्रोही' को प्रोड्यूस किया था।

    रेलवे क्रॉसिंग पर मिल गए सरदार जी

    - 'प्रतिज्ञा' की यूनिट का काफिला एक रेलवे क्रॉसिंग पर रुका। ट्रेन गुजरने वाली थी। तभी वहां मौजूद लोगों की नजर धर्मेंद्र पर पड़ी और वे उनके करीब आने लगे। धीरे-धीरे धर्मेंद्र की कार के आसपास भीड़ जमा हो गई।
    - धर्मेंद्र ने भी फैन्स को निराश नहीं किया। वे कार की खिड़की से ही सबसे हाथ मिलाने लगे। इसी बीच धर्मेंद्र की नजर वहां खड़े एक सरदारजी पर पड़ी। उन्होंने सरदारजी से पंजाबी में पूछ लिया- और क्या हाल है पा जी।
    - सरदारजी का मूड कुछ ठीक नहीं था। उन्होंने धर्मेंद्र का हाथ झटकते हुए जवाब दिया, "अजी छोड़िए...ये सारी चीजें सिर्फ पर्दे पर ही ठीक लगती हैं।"

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    धर्मेंद्र को बुरी लगी सरदारजी की बात और...

    - धर्मेंद्र को सरदारजी की बात कुछ हजम नहीं हुई। वे एकदम अवाक थे। इतने में रेलवे फाटक खुल गया और गाड़ियां आगे बढ़ गईं।
    - जाते-जाते धर्मेंद्र ने सरदारजी के चेहरे पर झपट्टा मारा और उसने बचने के लिए अपना चेहरा पीछे की ओर खींचा। इस खींचातानी में सरदारजी की दाढ़ी के कुछ बाल धर्मेंद्र के हाथ में आ गए । सरदारजी की ठुड्डी से टप-टप खून टपकने लगा।
    - धर्मेंद्र ने खून गिरते हुए देखा और फाटक क्रॉस होते ही कार रुकवा ली। किसी को कुछ समझ नहीं आया। तब धर्मेंद्र ने भगवंत सिंह को उन सरदारजी को पकड़कर लाने का इशारा किया। भगवंत के लिए धर्मेंद्र का आदेश मिलना था कि चंद मिनट बाद ही सरदारजी उनके सामने खड़े थे।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, फिर क्या किया धर्मेंद्र ने सरदारजी के साथ...

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    फिर क्या किया धर्मेंद्र ने सरदारजी के साथ

    - सरदारजी की दाढ़ी से अब भी खून गिरना बंद नहीं हुआ था। इसलिए धर्मेंद्र ने फौरन अपनी गाड़ी से ‘फर्स्ट एड’ किट निकाली।
    - आपको बताना चाहेंगे कि धर्मेन्द्र शुरुआत से ही अपने साथ ‘फर्स्ट एड बॉक्स’ लेकर चलने के लिए चर्चित रहे हैं। आज भी वे सफर करते समय अपनी इस आदत को बरकरार रखे हुए हैं।
    - बहरहाल, धर्मेंद्र ने सरदार जी की दाढ़ी पर अपने हाथों से मलहम-पट्‌टी की। फिर नसीहत देते हुए भावुक हो गए। उन्होंने सरदारजी से कहा- "मैं तो आपकी खैर-खबर पूछ रहा था, पर आप न जाने किस ख्याल में खोए हुए थे। अच्छा होगा कि आगे से आप किसी और के साथ ऐसे रिएक्ट न करें।"
    - आखिर में धर्मेंद्र ने सरदार जी के हाथ में सौ-दो सौ रुपए भी टिका दिए, जिसका लब्ब-ओ-लुआब यह था- "इस पैसे से दूध पीकर बह गए खून की भरपाई कर लेना!"

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