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मुंबई बैंक सेंधमारी : बैंक लूटने के शॉर्टकट तरीके दिखाती फिल्में कितनी जायज है?

ऐसी कई फिल्में आईं जो चोरों को चोरी करने के अलग अलग स्टाइल सिखा कर सुपरहिट बन गई।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 14, 2017, 12:58 PM IST

मुंबई बैंक सेंधमारी : बैंक लूटने के शॉर्टकट तरीके दिखाती फिल्में कितनी जायज है?

नवी मुंबई के जुईनगर में बैंक ऑफ बड़ौदा में फिल्मी स्टाइल में सुरंग खोदकर लुटेरे करोड़ों रुपए ले गए। चोरों ने किसी फिल्म की कहानी से प्रेरणा लेते हुए बगल की दुकान से बैंक के लॉकर रूम तक 30 फीट की सुरंग खोदी और करोड़ों का कैश और लाखों के जेवरात लूट कर ले गए।

सवाल उठता है कि चोरों को सुरंग खोदने की प्रेरणा कहां से मिली। जवाब भी है - फिल्मों से। ऐसी कई फिल्में आईं जो चोरों को चोरी करने के अलग अलग स्टाइल सिखा कर सुपरहिट बन गई। हालांकि कहा तो यही जाता है कि ऐसी फिल्मों पर रोक लगनी चाहिए लेकिन फिर भी थीम के अभाव में ऐसी फिल्में बनती रहती हैं और गजब इस बात पर है कि हिट भी हो जाती हैं।

ऐसी ही फिल्मों पर नजर डालते हैं जिनकी थीम या कहानी ने चोरों को महाचोर बनने को उकसाया। इन फिल्मों की थीम में नायक का चोर बनना बेहद सामान्य बात है। ये नायक के चोर होने पर सवाल खड़ा नहीं करती बल्कि नायक के चोरी करने और लूटने के खास अंदाजों की प्रशंसा करती हैं।

'धूम'


फिल्म 'धूम' की सफलता का राज भी शायद यही रहा हो कि हीरो जैसा दिखने वाला चोर, हाइटेक चोर जो दिलफरेब भी है और कुछ ईमानदार भी। 'धूम' के पहले दूसरे और तीसरे सीक्वल में डायरेक्टर ने हीरो को चोर बना डाला है। पहले भाग में जॉन अब्राहम चोर बने हैं, दूसरे में ऋतिक रौशन बैंक और कीमती चीजें लूटते और तीसरे पार्ट में आमिर खान बैंकों को कंगाल करते हैं। चोरी और लूट के नए नए अनोखे अंदाज सिखाने में फिल्म 'धूम' का एक बहुत बड़ा हाथ है। कई बैंक चोरियो का जब खुलासा हुआ तो आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने चोरी करने का तरीका इस फिल्म से सीखा।

'बैंक चोर'


पिछले दिनों आई ये फिल्म हास्य पर आधारित थी लेकिन हीरो से बैंक चोरी करवाकर इस फिल्म ने भी गलत संदेश देने की कोशिश की। फिल्म में तीन लड़के बैंक चोरी के लिए तरह तरह की तरकीबें लगाते हैं औऱ नाकामयाब होते हैं।

'किक'


'किक' जैसी सुपरहिट फिल्म में भी नायक बने सलमान खान किसी खास मकसद के लिए अमीरो और बैंकों को लूटते हैं। वो इतने आराम से चोरी करते हैं जैसे उनके हाथों में कोई हुनर छिपा हो। फिल्म में निर्देशक ने चोरी करने और लूटने को इतनी आसाम टर्म में समझाया है मानों सलमान खान कोई पुण्य का काम कर रहे हों।

'हैप्पी न्यू ईयर'


चोरी के मोह से शाहरुख खान भी नहीं बच पाए औऱ हैप्पी न्यू ईयर में उन्होंने चोर के घर चोरी कर डाली। इस चोरी में कई लोगों की स्पेशियलाइज्ड टीम, पूरी प्लानिंग, भेष बदलना, हीरोइन का इस्तेमाल तक कर डाला। कुछ नाकाम लोग मिलकर एक चोरी को अंजाम देते हैं और अपनी अपनी नजर में हीरो बन जाते हैं। फिल्म ने संदेश दिया 'चोर के घर मोर' लेकिन फिर भी चोरी को जस्टिफाई नहीं कर पाई।

'आंखें'


अमिताभ बच्चन अभिनीत आखें तो आपको याद ही होगी। इसमें बैंक से रिटायर हो चुका बैंक मैनेजर कुछ अंधों को मजबूर करके उनसे बैंक लुटवाता है। इसमें भी बैंक लूटने के नए और अनोखे तरीके को ईजाद किया गया था।

'सिमरन'


हाल ही में कंगना रनौत अभिनीत फिल्म सिमरन में भी हीरोइन को अमीर बनने के लिए बैंक लूटने की जरूरत पड़ जाती है और वो दिलेरी से बैंक लूट लेती है। हालांकि वो बाद में पकड़ी जाती है लेकिन फिल्म में उसे नायिका की तरह प्रस्तुत करके डायरेक्टर ने चोरी और लूट को बहुत सहज घटना करार दिया है।

'रांची डायरीज'


फिल्म देखकर बैंक लूटने की कोशिश करते कुछ लड़के और उनकी कहानी। ये रांची डायरीज की स्क्रिप्ट थी जिसे डायरेक्टर ने इसी समाज से देखकर समझकर उठाना जरूरी समझा।

स्पेशल 26


अक्षय कुमार अभिनीत स्पेशल 26 में जिस नए और अनोखे अंदाज से लूट दिखाई गई है, वो शायद समाज का आइना कहा जा सकता है क्योंकि अखबारों में नकली अधिकारी बनकर धनाड्यों को लूटने की खबरें आती रहती हैं। लेकिन किस तरीके से लूटा जाए, ये फिल्म ने इतने विस्तार से दिखाया कि नासमझ लोग भी समझ जाएं कि किसी को कैसे लूटना है।

'बंटी और बबली'


जहां हीरो और हीरोइन दोनों ही चोर निकले तो क्या कहेंगे। जिस प्यार की आधारशिला ही चोरी पर रखी हो तो फिल्म की थीम क्या होगी। फिल्म में हीरो हीरोइन जिस इत्मीनान से चोरियां करते हैं, उनके चेहरे औऱ जमीर पर कोई असर नहीं दिखता, उसे देखकर दर्शक क्या सीखेंगे, ये सवाल हमेशा खड़ा होता है।

इसके अलावा 'कैश' 'प्लेयर्स', 'ब्लफ मास्टर', 'ज्वैल थीफ', 'डॉन सीरीज', 'लेडीज VS विक्की बहल' जैसी फिल्में इस बात की गवाह हैं कि फिल्म हिट कराने के लिए या कुछ सेंसेशन लाने के लिए हीरो को चोर बनाना डायरेक्टर के लिए बाएं हाथ का खेल है।

चोरी और लूट को इतनी फुटेज देने और उनके लिए नित नए नए काल्पनिक तरीके दिखाने वाली ये फिल्में जो गुनाह कर रही हैं, उससे फायदा तो किसी को नहीं होगा, नई पीढ़ी चोर और हीरो में फर्क करना भूल जाएगी।

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