Home »Gossip» Telugu Comedy Actor Brahmanandam Charges Rs 1 Crore Per Film

साउथ की 1000 फिल्मों में काम कर चुका है ये एक्टर, एक फिल्म के लेता है 1 करोड़

आन्ध्रप्रदेश के साटेनापल्ली जिले के मुपल्ला गांव में ब्रह्मानंदम का जन्म 1 फरवरी 1956 को हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक हालत बेहद खराब थी। जिस वजह से पूरे परिवार में वे एकलौते ऐसे शख्स थे, जिन्होंने एमए तक शिक्षा ली।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 03, 2016, 12:01 AM IST

  • एंटरटेनमेंट डेस्क। फ़िल्मी दुनिया में कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक छोटे रोल से की और आज वो सिनेमा की दुनिया में बुलंदियों पर पहुंच चुके हैं। ऐसी ही शख्सियतों में से एक हैं जाने-माने कॉमेडियन ब्रह्मानंदम। आन्ध्रप्रदेश के साटेनापल्ली जिले के मुपल्ला गांव में ब्रह्मानंदम का जन्म 1 फरवरी 1956 को हुआ था। उनके परिवार की आर्थिक हालत बेहद खराब थी। जिस वजह से पूरे परिवार में वे इकलौते ऐसे शख्स थे, जिन्होंने एमए तक शिक्षा ली। पोस्ट ग्रैजुएशन के बाद उन्होंने एक तेलुगु लेक्चरर के रूप में अत्तिल्ली कॉलेज में नौकरी शुरू कर दी। कॉलेज में वे अक्सर छात्रों को मिमिक्री कर हंसाया करते थे।

    एक दफा उन्हें इंटर कॉलेज ड्रामा प्रतियोगिता में बेस्ट सपोर्टिंग आर्टिस्ट का प्राइज मिला, जिसके बाद उनकी रूचि ड्रामा की ओर और भी बढ़ गई। इसी दौरान जाने-माने तेलुगु फिल्मों के डायरेक्टर जन्धयाला ने ब्रह्मानंदम को 'मोद्दाबाई' नाम के ड्रामा में एक्टिंग करते हुए पहली बार देखा। उनकी एक्टिंग से जन्ध्याला इतने इम्प्रेस हुए कि उन्होंने 'चन्ताबाबाई' नाम की फिल्म में ब्रह्मानंदम को एक छोटा सा रोल ऑफर कर दिया और इसी फिल्म से ब्रह्मानंदम के फिल्मी करियर की शुरुआत हुई।

    इसके बाद जन्ध्याला की दूसरी फिल्म 'आहा न पेल्लानता' में लोगों द्वारा ब्रह्मानंदम की एक्टिंग बेहद पसंद की गई। इस फिल्म के बाद वे फ़िल्मी दुनिया में मशहूर हुए। अब तक ब्रह्मानंदम 1000 से भी ज्यादा फिल्में कर चुके हैं।

    हर फिल्म के चार्ज करते हैं 1 करोड़ रुपए...
    ब्रह्मानंदम ने जुलाई, 2015 में अपनी फीस बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए की है और अब वो हर फिल्म के लिए 1 करोड़ रुपए चार्ज करते हैं। उन्होंने ये डिसीजन अपनी पॉपुलैरिटी और हिट फिल्मों की वजह से लिया है। किसी भी कॉमेडियन को इतनी फीस मिलना बड़ी बात है।
    आगे की स्लाइड्स में, ब्रम्हानंदम को ऐसे मिला पहला ब्रेक...
  • ब्रम्हानंदम को ऐसे मिला पहला ब्रेक...

    ब्रम्हानंदम अपने माता-पिता की 8 संतानों में से 7वें नंबर के हैं। उनके मुताबिक, भगवान का शुक्र है कि मैं बचपन से ही लोगों को हंसाने में कामयाब रहा हूं। मेरे बहुत अच्छे दोस्त एमसीवी शशिधर जो कि डीडी-8 में चीफ प्रोग्रामिंग ऑफिसर थे, वो मुझे पॉपुलर राइटर आदि विष्णु के घर ले गए। उन्होंने कहा कि मैं काफी अच्छी स्टैंड कॉमेडी कर सकता हूं जिसे टीवी पर ऑनएयर किया जा सकता है। इसके बाद मुझे जन्ध्याला ने देखा और इस तरह मुझे 1985 में पहला ब्रेक मिल गया।
  • भगवान ने मुझे हंसाने के लिए ही भेजा है...

    मुझे लगता है कि हर एक्टर मेरी ही तरह हार्ड वर्क करता है। लेकिन मुझे लगता है कि लोग अभी मुझे देखते हुए थके नहीं हैं। यही वजह है कि मुझे लगता है कि भगवान ने मुझे दुनिया में लोगों को हंसाने के लिए ही भेजा है।
    ब्रह्मानंदम के मुताबिक, एक बार मेरे फ्रेंड के बेटे ने मुझसे यह पूछा कि आपका नाम ब्रम्हानंदम किसने रखा? मेरे डैड ने भी मुझे कभी नहीं बताया था कि उन्होंने मेरा नाम ब्रह्मानंदम ही क्यों रखा। वैसे मेरे नाम का मतलब है (द हैप्पीनेस ऑफ द यूनिवर्स) पूरे ब्रम्हांड का आनंद।
  • मैं पानी में उस काई की तरह हूं जो लंबे समय तक जमी रहती है...

    तीन दशकों बाद भी ब्रम्हानंदम फिल्म इंडस्ट्री में उतने ही बिजी हैं। इस सवाल पर उनका कहना है- एक कहावत है, ताजा पानी हमेशा बासी पानी को रिप्लेस कर देता है लेकिन काई हमेशा वहीं रहती है। मैं फिल्म इंडस्ट्री में अपने लंबे करियर को उसी काई की तरह मानता हूं। डायरेक्टर त्रिविक्रम श्रीनिवास ने एक बार कहा था- आप भगवान के दर्शन के लिए घंटों इंतजार करते हैं, लेकिन एक वक्त आता है जब आप गॉड से कनेक्ट होकर सबकुछ भूल जाते हो। मैं तुम्हें भगवान से कम्पेयर नहीं कर रहा हूं लेकिन लोग जब भी तुम्हें देखते हैं तो सबकुछ भूलकर सिर्फ हंसते हैं।
  • गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है नाम...

    ब्रह्मानंदम का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। यह रिकॉर्ड 2007 में एक ही भाषा में 700 से अधिक फिल्मों में एक्टिंग करने के लिए दर्ज किया गया था। इतना ही नहीं सिनेमा में ब्रह्मानंदम के योगदान को देखते हुए उन्हें 2009 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। 60 वर्षीय यह एक्टर तीन दशक लंबे करियर में 1000 से अधिक फिल्में कर चुके हैं। उनकी कुछ सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में ‘अहा ना पेल्लानता’, ‘अप्पुला अप्पा राव’, ‘किंग’, ‘रेड्डी’, 'रच्चा' 'आर्या 2' और ‘बपालू’ शामिल हैं।
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