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FILM REVIEWS: प्राग, अल्कोहल-ड्रग और सेक्स से भी आगे

dainikbhaskar.com | Sep 27, 2013, 10:20 AM IST

Critics Rating
  • Genre: सॉयकोलॉजिक लव थ्रिलर
  • Director: आशीष शुक्ला
  • Plot: ये युवाओं की फिल्म है और फिल्म में ड्रग, अल्कोहल और सेक्स का मसाला जमकर परोसा गया है।
मल्टीपल रिलीज के बीच इस शुक्रवार फिल्म 'प्राग' रिलीज हुई। फिल्म के प्रोमो को देखकर कहा जा सकता है कि ये युवाओं की फिल्म है और फिल्म में ड्रग्स, अल्कोहल और सेक्स का मसाला जमकर परोसा गया है। वैसे, हकीकत यह भी है कि फिल्म इन सबसे ऊपर और भी बहुत कुछ कहती है।
इस फिल्म की कहानी चंदन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो प्राग में रहता है। वह एक जुनूनी आर्किटेक्ट है, जो अपने जीवन में प्यार के उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है। वह अपनी खास दोस्त आरती की मौत के लिए खुद को जिम्मेदार मानता है,जिसकी एक एक्सीडेंट में मौत हो जाती है। साथ ही, चंदन नाम का किरदार अपने दोस्त गुलशन को लेकर हीनभावना का शिकार भी है, क्योंकि चंदन को लगता है कि गुलशन लड़कियों को इंप्रेस करने में ज्यादा माहिर है और उसमें वो क्वालिटी क्यों नहीं है जो गुलशन में है। ये दो दोस्त प्राग में एक प्रोजेक्ट के लिए मिलकर काम करते हैं। यहां वे एक कजाक लड़की एलेना से मिलते हैं। चंदन को एलेना से मुहब्बत हो जाती है। बस कहानी यहीं से एक खास मोड़ लेती है और एलेना चंदन और गुलशन के बीच की कड़ी बन जाती है। यह देखने लायक है कि वह चंदन को प्यार करती है कि गुलशन पर मरती है।
फिल्म की शुरुआत वाकई बेहतरीन होती है। स्क्रीन-प्ले भी फिल्म का वाकई बड़ा पहेलीनुमा बन पड़ा है, जो फिल्म के प्रति दर्शकों की जिज्ञासा को बढ़ाता है। मजेदार लफ्जों में कहा जाए, तो किसी गूदेदार फल की तरह फिल्म के गूदे को निकालने पर उसके फ्लेशबैक की निरंतरता इसे और ज्यादा रोचक बनाती है। फिल्म के फर्स्ट हाफ में वाकई ड्रग्स, ड्रिंक और सेक्स की प्रधानता है।
फिल्म में निर्देशक आशीष आर शुक्ला की चतुरता भी देखने लायक है मतलब उनका चुतुराई से भरा निर्देशन। खासतौर पर उन्होंने गुलशन नामक पात्र को जिस बुद्धिमानी से प्रस्तुत किया है, वह देखने और तारीफ करने लायक है। फिल्म के क्लाइमेक्स तक गुलशन का कैरेक्टर कई पहेलियां सुलझाने पर मजबूर कर देगा दर्शकों को। सभी कैरेक्टर ने 'प्राग' में अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है। इस फिल्म को सॉयकोलॉजिकल थ्रिलर कहा जाए तो गलत नहीं होगा।
जहां फिल्म में कई मजबूत पक्ष हैं, तो कुछ कमजोरियां भी हैं। मिसाल के तौर पर इंटरवल के बाद का निर्देशन, जो अच्छे स्क्रीन-प्ले और कई तरह के मसाले होने के बावजूद भी फिल्म के ताने-बाने को थोड़ा कमजोर करता है। संगीत के साथ भी शुक्ला का कन्फ्यूजन फिल्म की सबसे बड़ी कमी है, जो कहानी के प्रवाह में बाधक बनता है।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि 'प्राग' एक खास माइंडसेट वाले ऑडियंस की फिल्म है। भाषा फिल्म की एक मात्र बाधक है, क्योंकि फिल्म में कई डायलॉग या तो अंग्रेजी में हैं या फिर कजाक में।
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Web Title: Prague is beyond alcohol,drugs and sex
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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