Home »Reviews »Movie Reviews» Movie Review: The Great Gatsby

MOVIE REVIEW: 'THE GREAT GATSBY'

Mayank Shekhar | May 18, 2013, 09:30 AM IST

Critics Rating
  • Genre: ड्रामा
  • Director: बाज़ लुर्मैन
  • Plot: बॉलीवुड को हॉलीवुड की भेंट

यह तुलना अजीब लग सकती है कि लेकिन द ग्रेट गेट्सबी अमेरिका के लिए वही है, जो भारतीयों के लिए देवदास है : दोनों साहित्यिक क्‍लासिक कृतियां हैं, जिनकी पृष्‍ठभूमि 20वीं सदी का पूर्वार्द्ध है।

यह वह दौर था, जब सभी सामाजिक संबंधों पर वर्गभेद हावी रहता था और जहां पुरुष का भाग्‍य पूरी तरह से उस महिला के हाथों में होता था, जिसे उसने अपनी प्रेमिका के रूप में चुना है। वास्‍तव में ये दोनों ही सतही किताबें हैं और शायद यही कारण है कि उन पर बनाई गई फिल्‍में दर्शकों को बांधे रखती हैं।

शरत चंद्र चट्टोपाध्‍याय की देवदास पर भारतीय सिनेमा में कम से कम 14 फिल्‍में बनाई जा चुकी हैं। वहीं एफ स्‍कॉट फिट्जगेराल्‍ड की द ग्रेट गेट्सबी पर भी यह पांचवीं फिल्‍म है। वर्ष 2002 में संजय लीला भंसाली ने देवदास का खासा भव्‍य संस्‍करण बनाया था। मॉलिन रॉउग, रोमियो प्‍लस जूलियट जैसी फिल्‍में बनाने वाले बाज़ लुर्मैन भी भंसाली स्‍कूल से ही वास्‍ता रखते हैं और उन्‍हें हर लिहाज़ से एक बॉलीवुडीय निर्देशक कहा जा सकता है। लुर्मैन की बेहद उबाऊ फिल्‍म ऑस्‍ट्रेलिया (2008) के बाद शायद निर्माता उनमें अपना भरोसा गंवा बैठे थे, शायद इसीलिए हम उन्‍हें यहां 1920 के दशक के अमेरिका के फिल्‍मांकन के साथ एक अधिक सचेत प्रयास करते देखते हैं। थ्री-डी ग्‍लास से इस फिल्‍म को देखने पर उसका प्रभाव लगभग जादुई होता है।

लियोनार्दो डी काप्रियो ने इस फिल्‍म में जे गेट्सबी की भूमिका निभाई है। काप्रियो एक अन्‍य सुपर बॉलीवुडीय फिल्‍म टाइटैनिक में हीरो की भूमिका निभाकर सितारा बन गए थे, हालांकि वे तब से अब तक एक लंबा सफर तय कर चुके हैं। इस फिल्‍म में वे राजकुमार भी हो सकते हैं, जासूस भी हो सकते हैं और हत्‍यारे भी हो सकते हैं।

हमें जितना कुछ जानने को मिलता है, उसकी बुनियाद पर हम उनके बारे में कोई अनुमान नहीं लगा सकते। पटकथा की हुनरमंदी इस बात में है कि वह हीरो के पुराने दिनों की कहानी को कब तक रोके रखती है। लिहाजा हमारी दिलचस्‍पी बनी रहती है। उसके आशियाने पर शहर के सबसे शानदार जलसे होते हैं। फिल्‍म का नैरेटर निक (टोबे मैगिरे) गेट्सबी का पड़ोसी है।

वह डेज़ी (कारे मुलीगन) का कजिन भी है, जिसकी खातिर ही गेट्सबी ये तमाम जलसे आयोजित करता है, इस उम्‍मीद में कि शायद वह भी कभी वहां आए, लेकिन ऐसा कभी नहीं होता। डेज़ी ही गेट्सबी की चाहत है। उसका विवाह एक कुलीन भद्रजन से हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद गेट्सबी उसे हासिल करने का नामुमकिन सपना देखता रहता है।

शायद उसके और लड़की के बीच सामाजिक हैसियत का फासला है, ठीक वैसे ही, जैसे फिल्‍म के दर्शकों के बीच आमतौर पर लैंगिक विभाजन होता है। यह एक भावुक रोमानी फिल्‍म है, हल्‍की-फुल्‍की, महिलाओं को लुभाने वाली, जो लियो डी काप्रियो को देखकर आहें भरने लगती हैं।

यह फिल्‍म उन्‍हें निराश नहीं करेगी। एकतरफा प्रेम की कहानी से हम भारतीय वैसे भी एक सीधा जुड़ाव महसूस करते हैं। ऐसे में यदि संवाद अच्‍छे हों तो हम मुख्‍य चरित्र की तकलीफों के साझेदार भी बन जाते हैं।

नहीं, मैं भूला नहीं हूं। जी हां, फिल्‍म में अमिताभ बच्‍चन भी हैं। वे इसमें एक यहूदी माफिया मेयेर वूल्‍फशीम की भूमिका निभा रहे हैं। यह इन मायनों में एक महत्‍वपूर्ण किरदार है कि उसी के मार्फत हमें पता चलता है कि गेट्सबी अपनी आजीविका कैसे चलाता है। उनकी एंट्री एक धुंधुआते बार में होती है।

उनकी चाल में रुआब है, वे लोगों को कनखियों से देखते हैं और बहुत ज़हीन अंग्रेज़ी बोलते हैं। हम उम्‍मीद करते हैं कि काश हम उन्‍हें परदे पर और लंबे समय तक देख पाएं। यदि क्लिंट ईस्‍टवुड को शोले में सांबा का रो‍ल मिला होता तो अमेरिकी भी यही उम्‍मीद करते। लेकिन शायद केवल हॉलीवुड ही इस तरह के कैमियो रोल्‍स को अफोर्ड कर सकता है!

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! डाउनलोड कीजिए Dainik Bhaskar का मोबाइल ऐप
Web Title: movie review: the great gatsby
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

Trending

Top
×