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रंगरेज

Mayank Shekhar | Mar 23, 2013, 05:22 PM IST

Critics Rating
  • Genre: रोमांस
  • Director: प्रियदर्शन
  • Plot: सेलेब्रिटीज़ क्रिएट करना कठिन नहीं है, बस पैसे खर्च करने को तैयार रहना चाहिए।

सेलेब्रिटीज़ क्रिएट करना कठिन नहीं है, बस पैसे खर्च करने को तैयार रहना चाहिए। आपकी तस्‍वीर या वीडियो मीडिया में जितनी बार दिखता है, उतनी ही आपको ख्‍याति मिलती रहती है, बशर्ते आप इस सबके लिए अपनी जेब ढीली कर सकते हों। फिल्‍म प्रोड्यूसर और रियल एस्‍टेट डेवलपर वासु भगनानी के सुपुत्र जैकी ऐसी ही सेलेब्रिटी हैं। और निश्चित ही, भारत में अनेक और ऐसी सेलेब्रिटीज सामने आने को तैयार होंगी।

यह फिल्‍म पूरी तरह से जैकी के ही इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्‍म के सभी अन्‍य किरदारों का अस्तित्‍व इसीलिए है कि जैकी को अच्‍छा और विनम्र साबित किया जाए। फिल्‍म में जैकी के पिता उसे बहुत चाहते हैं, क्‍योंकि वह ईमानदार है। पड़ोसी उसे चाहते हैं, क्‍योंकि वह बहुत गुणवान है।

यह फिल्‍म हमें 1980-1990 के दशक की राम लखन, दीवाना किस्‍म की फिल्‍मों की याद दिलाती है, जिनमें हीरो के टपोरी दोस्‍त लगभग उसके भक्‍तों की तरह हुआ करते थे। वे स्‍पॉटलाइन के नीचे उसके साथ कैरम खेलते थे, उसके साथ जहां चाहें वहां चले जाते थे, और यदि कभी-कभार वह उन्‍हें चपत लगा दे तो उसका भी ज्‍यादा बुरा नहीं मानते थे। दूसरी तरफ हीरो ‘यारों का यार’ है, सेक्‍स के बारे में शर्माता है, लेकिन बहादुरी में पूरा मर्द है और वह किसी भी किस्‍म की नाइंसाफी को कतई बर्दाश्‍त नहीं कर सकता।

फिल्‍म में हम देखते हैं कि सब तरफ शोषण ही शोषण है। चूंकि यह दो दशक पुरानी फिल्‍मों की तरह है, लिहाजा जाहिर है इसमें किसी का प्‍यार हासिल करना सबसे बड़ी चुनौती है। एक लड़की घर में कैद है, एक लड़का उससे ब्‍याह करना चाहता है। लड़की के जमींदार पिता नहीं चाहते कि लड़का-लड़की मिलें।

लड़का हीरो से मिलता है, जो पूरी तरह दबंग, या दिलेर या रंगरेज है। उसके पास इस समस्‍या का एक ही समाधान है : लड़की को उठा लेंगे। सभी सहमत हो जाते हैं। चूंकि यह ‘प्‍यार का मामला’ है, इसलिए एक बंदा इसके लिए अपनी कार भी मुफ़्त में रेंट पर दे देता है।

लिहाजा चार बेरोजगार लड़के एसयूवी पर सवार हो जाते हैं और लड़की को उसके बाप के जुल्‍मों से मुक्‍त कराने निकल पड़ते हैं। इस दौरान एक बंदे की सुनने की ताकत चली जाती है। उसके सिर पर एक रॉड से हमला किया गया था, अलबत्‍ता मुझे अभी तक पता नहीं था कि सिर पर चोट लगने से सुनने की ताकत चली जाती है।

शायद वह वास्‍तव में इसलिए बहरा हो गया होगा, क्‍योंकि उसके आसपास मौजूद रहने वाले लोग हर समय जोरों से चिल्‍लाते रहते थे। इस ग्रुप का एक अन्‍य बंदा अपने पैर तुड़वा बैठता है, क्‍योंकि एक ट्रक उसके पैरों पर से होकर गुजर जाता है। लेकिन व‍ह बहुत जल्‍द अपने पैरों पर फिर से खड़ा भी हो जाता है।

इस फिल्‍म के जूनियर कलाकारों, जैसे जमींदार, पुलिस वाले, ढाबे वाले की भूमिका निभाने वाले अभिनेताओं का चयन अच्‍छा किया गया है। लेकिन हम इन कलाकारों के नाम भी नहीं जान पाते। वे बस फिल्‍म का हिस्‍सा बनकर ही खुश हैं। किसी भी फिल्‍म का। इससे एक फायदा यह भी होता है कि फिल्‍म की कहानी और कैमरा पूरी तरह से हीरो पर अपना ध्‍यान केंद्रित कर सकता है।

हीरो आग में से होकर गुजर जाता है और जीप पर लटके हुए एक घोड़े पर काबू पा लेता है। वह अपने परिवार के लिए अपने बचपन की मोहब्‍बत की भी कुर्बानी देने से नहीं चूकता। हम उम्‍मीद करते हैं कि वह जिस तरह से अपने घर और अपनी बस्‍ती को प्‍यार करता है, वे लोग भी उसे उसी तरह प्‍यार करेंगे, लेकिन फिल्‍म में अंत में जब वह गैंगनम स्‍टाइल का एक डांस करता है तो हम समझ जाते हैं कि इस बात का अंदाजा लगाना बहुत कठिन है कि लोगों को क्‍या पसंद आता है और क्‍या नहीं। पेड सेलेब्रिटी बिजनेस बढि़या है।

आखिरकार आप एक स्‍टार बन जाते हैं या नहीं बन पाते हैं, आपके फैन्‍स होते हैं या नहीं होते हैं, लेकिन कोशिश करने में क्‍या हर्ज है। महत्‍वाकांक्षा चीज ही ऐसी है। लेकिन मुसीबत यह है कि इसकी वजह से कभी-कभी दर्शकों को तकलीफ झेलना पड़ती है, बशर्ते वे वह इस तरह की सेलेब्रिटी की फिल्‍मों के टिकट पर पैसा बर्बाद करना चाहें।

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Web Title: movie review: rangrezz
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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