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पठान ’संजय’ के सामने आते ही राम चरन तेजा भूले एक्टिंग !

Dainikbhaskar.com | Sep 06, 2013, 01:30 AM IST

Critics Rating
  • Genre: एक्शन
  • Director: अपूर्व लाखिया
  • Plot: साल 1973... इंडियन सिनेमा में बदलाव की वो आंधी लेकर आया कि रोमांटिक फिल्मों का ट्रेंड ही बदल गया और लोगों को एक्शन फ़िल्म पसंद आई।

साल 1973 इंडियन सिनेमा में बदलाव की वो आंधी लेकर आया कि फिल्मों का ट्रेंड ही बदल गया। रोमांटिक फिल्मों की जगह एक्शन फ़िल्मों का दौर शुरू हो गया। यह नया ट्रेंड शुरू करने वाली फिल्म थी ज़ंजीर, जिसमें अहम भूमिका निभाई थी अमिताभ बच्चन ने। इस फ़िल्म के बाद से ही बिग बी को ‘द एंग्री यंग मैन’ का खिताब मिला।

ज़ंजीर 1973 की वो सुपरहिट फ़िल्म थी, जिसने न सिर्फ उस साल सबसे ज़्यादा कमाई की, बल्कि राजेश खन्ना के स्टारडम पर भी फुल स्टॉप लगा दिया। बॉलीवुड को अमिताभ बच्चन के रूप में नया सुपर स्टार मिला। इसी फिल्म के साथ बिग बी का इंडस्ट्री में संघर्ष का दौर भी ख़त्म हुआ और उन्होंने दिन-दोगुनी, रात-चौगुनी तेजी से तरक्की की। डायरेक्टर और प्रोड्यूसर प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘ज़ंजीर’ इंडियन फ़िल्म इंडस्ट्री की क्लासिक फ़िल्मों में गिनी जाती है।

अमिताभ की इस फ़िल्म का रीमेक बनाने का माद्दा दिखाया डायरेक्टर अपूर्व लाखिया ने। इस हफ्ते बॉक्स ऑफिस पर ज़ंजीर रिलीज़ हुई है। लेकिन इस री-मेक के बारे में बात कहां से शुरू करें, हमें खुद समझ नहीं आ रहा। सदी के महानायक को चुनौती तो शाहरुख़ ख़ान भी नहीं दे पाए, फिर रामचरन तेजा की तो यह डेब्यू फ़िल्म है। कहानी में नाम विजय खन्ना रख लिया, बिग बी जितना कद है, बिग बी जैसी ड्रेस पहन ली तो क्या हुआ, सदी के महानायक की शख्सियत को परदे पर किसी और के ज़रिए दोबारा ज़िंदा करना कितना नामुमकिन है। यह इस फिल्म से साबित होता है।

अब ज़ाहिर-सी बात है कि क्लासिक फिल्म का रीमेक किया है तो कहानी से लेकर एक्टर्स, म्यूज़िक, हर पैमाने पर तुलना की जाएगी ही। इसके बारे में न चाहते हुए डायरेक्टर साहब भी कुछ नहीं कर सकते, वरना किसी फ्रेश स्क्रिप्ट पर काम न कर लेते। खैर, इतनी बड़ी फिल्म का रीमेक बनाया है, तो अब दर्शक भी जान लें कि इस फिल्म का रिज़ल्ट क्या है और रिपोर्ट कार्ड में कितने स्टार्स मिले हैं?

पहले यह कहानी उनके लिए जिन्होंने ज़ंजीर कभी नहीं देखी। और जिन्होंने देखी है, उन्हें बता दें कि कहानी में आज के हिसाब से हर किरदार और प्लॉट को लेकर थोड़े बहुत फेर-बदल किए गए हैं।

कहानी शुरू होती है एसीपी विजय खन्ना के उस भयानक सपने से जो उन्हें हर रात सताता है। बांह पर टैटू, हाथ में चाकू, सफेद घोड़ा, बरसात की रात और नकाब में ढका चेहरा जो विजय के मां-बाप का कातिल होता है। लेकिन कौन है वो शख़्स, कहां से आया है, कैसा दिखता है? बचपन की यह घटना विजय को अब पूरी तरह से याद नहीं। पुलिस की 5 साल की ड्यूटी में विजय का 17 बार ट्रांसफर हो चुका होता है, लेकिन इस बार का तबादला काफी अलग था। उन्हें हैदराबाद से मुंबई ट्रांसफर किया गया।

उस दौरान प्रियंका उर्फ माला भी मुंबई आई होती हैं। लेकिन कहानी में जया की तरह प्रियंका सड़कों पर नाच-गाना करने वाली लड़की नहीं, बल्कि न्यूयॉर्क की पढ़ी-लिखी मॉड लड़की है, जो मुंबई में अपनी फेसबुक फ्रेंड की शादी अटेंड करने आती है। जहां ऑरिजनल कहानी में जया उन मासूमों की जान जाने की गवाह बनती है, जो तेजा के आदमियों द्वारा कुचले जाते हैं, वहीं इस बार माला उर्फ प्रियंका एक मासूम आदमी को तेजा के आदमी द्वारा जलाते हुए देख लेती है। यहीं से होता है माला और विजय खन्ना का लव कनेक्शन, जब माला पुलिस में रिपोर्ट करती है और तेजा के डर से इंस्पेक्टर विजय के घर पनाह लेती है।

आपको बता दें कि तेजा फिल्म में ऑयल माफिया है। जहां साल 1973 में यह किरदार निभाकर अजीत काफी पॉपुलर हो गए थे, वहीं इस किरदार को इस बार जिया है साउथ इंडियन स्टार प्रकाश राज ने। लालची, हत्यारे तेजा की 1973 में और 2013 में भी पैसों के अलावा जो कमज़ोरी है, वो है मोना डार्लिंग। बिंदू के इस फेमस कैरेक्टर को निभाया है माही गिल ने।

अब बात फिल्म के एक महत्वपूर्ण किरदार शेर ख़ान की। प्राण साहब ने पठान के इस किरदार में जहां जान डाल दी थी, वहीं इस बार प्राण को बखूबी कॉपी किया है संजय दत्त ने। शेर ख़ान उर्फ संजय, जो बेईमान तो हैं ही, लेकिन दिल के साफ हैं। चोरी की गाड़ियों का खरीददार है तेजा। विजय के जज़्बे, जोश, ईमानदारी और ताकत के आगे शेर खान को भी घुटने टेकने पड़ते हैं और दोनों जिगरी दोस्त बन जाते हैं। फिर कैसे पुलिस की वर्दी खोकर भी विजय शेर खान की मदद से तेजा तक पहुंचता है और खुद पर लगे बेबुनियाद इल्ज़ामों को मिटाकर सम्मानपूर्वक पुलिस की नौकरी वापस पाता है, अपने माता-पिता की मौत का बदला लेता है। यही है ज़ंजीर की कहानी।

लेकिन अफसोस, कहानी में जिस तरह से किरदारों को बुना गया है, उससे साफ है कि फिल्म का स्क्रीनप्ले बहुत ढीला है। कहानी को आगे बढ़ाने के लिए जो प्लॉट रचा गया है, वो ज़ंज़ीर जैसी फिल्म के तो बिल्कुल लायक नहीं है। जैसे न्यूयॉर्क से आई प्रियंका को वैसे तो रहने के लिए फाइव स्टार होटल चाहिए, लेकिन झाड़ियों के पीछे बाथरूम जाने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं। कहने को तो फिल्म आज के हिसाब से बनाई गई है, लेकिन रामचरन तेजा के कैरेक्टर को इस्टैब्लिश करने के लिए ’रघुपति राघव राजा राम’ ट्यून कहीं से भी फिट नहीं बैठती। फिल्म हीरो सेंट्रिक है, लेकिन हीरो की जगह लोग विलेन को देखना पसंद करेंगे।

इस फिल्म को देखने के बाद यह बात तो साफ है कि रामचरन तेजा बॉलीवुड में लीड हीरो की भूमिका आगे न निभाएं, तो बेहतर है। चॉकलेटी और माचो लुक्स न होने के बावजूद धनुष ने अपने एक्सप्रेशन्स और एक्टिंग से अपने बॉलीवुड डेब्यू में ही साबित कर दिया था कि एक परफॉर्मर किसी भी भाषा की फिल्म में फिट हो सकता है, लेकिन रामचरन तेजा ने अपनी एक्टिंग से लोगों को निराश किया है। ख़ासकर तब जब जनता विजय खन्ना के रोल में रामचरन तेजा और अमिताभ में तुलना करेगी, तो रामचरन तेजा खुद को इतना पीछे पाएंगे कि कहीं नज़र नहीं आएंगे। प्रियंका ने भी इस बार निराश किया है। बर्फी में दमदार परफॉर्मेंस के बाद प्रियंका ने इस फिल्म में बहुत ओवर एक्टिंग की है।

इंटरनेशनल सिंगिंग स्टार होने और अपने म्यूज़िक एल्बम की सफलता का खुमार प्रियंका के सिर से अभी भी नहीं उतरा है, इसलिए कहानी में माला के खूबसूरत, सादगी भरे और मासूम किरदार में वो कहीं नहीं जमी। बात करें संजय दत्त की, तो उनकी स्क्रीन पर पहली झलक ने ही दर्शकों का दिल जीत लिया। लेकिन हां, पठान के एक्सेंट में कमी लगी। लेकिन फिर भी संजय के कॉन्फिडेंस, लुक और अभिनय ने प्रभावित किया। संजय के अलावा इस रोल के लिए सोनू सूद और अर्जुन रामपाल भी डायरेक्टर के दिमाग में थे। लेकिन फिर संजय को ही फाइनल किया गया। जेल जाने से कुछ दिनों पहले ही संजय ने ज़ंजीर की शूटिंग खत्म की थी।

अब आते हैं प्रकाश राज पर जिन्होंने तेजा की भूमिका निभाई। हालांकि, प्रकाश के एफर्टलेस एक्सप्रेशन्स में कमी तो कुछ नहीं थी, लेकिन जो मज़ा अजीत के मुंह से मोना डार्लिंग सुनने में आता था, वो इनके मुंह से नहीं आया। वैसे इस बार तो नई मोना डार्लिंग उर्फ माही गिल ने भी फिल्म में खूब अश्लीलता परोसी। लेकिन डायरेक्टर साहब को भी अब समझ लेना चाहिए कि ज़रूरी नहीं है कि फिल्म में अश्लीलता और बिना ज़रूरत के कॉमेडी डालने से फिल्म मसाला एंटरटेनर बन जाए और चल जाए। बिंदू हॉट तो थी हीं, लेकिन साथ ही माला के किरदार में उन्होंने हॉटनेस, बोल्डनेस और संजीदगी का जो एक साथ तड़का लगाया, वो सराहनीय था। बिंदू माला के रूप में कभी भी चीप नहीं लगीं और लोग आज भी उनके इस किरदार की तारीफ करते हैं। बिंदू के किरदार के लिए माही का चुनाव मल्लिका शहरावत, जैकलीन और मलाइका अरोड़ा खान के बीच से हुआ, लेकिन देव डी जैसी फिल्मों में इतनी बढ़िया एक्टिंग करने के बावजूद, इस बार माही खरी नहीं उतरीं।

25 दिनों तक फिल्म की शूटिंग हैदराबाद में भी चली। फिल्म का म्यूज़िक ठीक है। प्रियंका की एंट्री पिंकी नामक गाने से होती है, जिसे ममता शर्मा और मीट ब्रदर्स अनजन ने गाया है। हालांकि, गाने का लुक मुन्नी बदनाम हुई... से मिलता है, लेकिन उतना बढ़िया नहीं है। शुरुआत में फिल्म का टाइटल ट्रैक वाला गाना सुनकर आपको मज़ा आएगा, लेकिन कोई भी गाना ऐसा नहीं है जो देखने या सुनने के बाद आपकी ज़ुबां पर आ जाए।

क्यों इस फिल्म को हमारी तरफ से डेढ़ स्टार ?

1- ज़ंजीर की रीमेक के बारे में सोचना ही बड़ी बात थी। लेकिन अफसोस इसका स्टैंडर्ड बिल्कुल मैच नहीं हुआ। न एक्टर्स के टैलेंट को ठीक से इस्तेमाल किया गया और न ही फिल्म का लीड हीरो ऐसा चुना गया जो बिग बी के आस-पास भी कहीं टिके।

2- जिन्होंने ऑरिजनल ज़ंजीर नहीं देखी, उस नई जनरेशन को लुभाने के लिए फिल्म में अश्लीलता भरी है, जो कहानी को उसके ट्रैक से भटकाती है।

3- प्रियंका चोपड़ा पहले भी बिग बी की फिल्मों (डॉन, अग्निपथ) के रीमेक में काम कर चुकी हैं, लेकिन इस बार उन्होंने अपनी ओवरएक्टिंग से निराश किया है। ऐसा लग रहा है वो कैमरे के सामने अभिनय नहीं कर रहीं, बल्कि अपने ड्राइंग रूम में बैठकर अपने दोस्तों से गप्प लड़ा रही हैं। प्रियंका की डेडिकेशन मिसिंग थी।

4- फिल्म की एंडिंग भी इतनी आसानी से कर दी है, मानो डायरेक्टर साहब ने अपना संयम खो दिया हो और वो बस फिल्म को रील में देखना चाहते थे।

5- फिल्म में रामचरन तेजा और संजय ने एक्शन तो खूब किया है, लेकिन जब तक कहानी में मज़ा न आए, कहानी देखने में दमदार न लगे, तो ऐसे एक्शन का क्या फायदा !

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Web Title: movie review of janjeer
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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