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बेहद बुरी कंडीशन में गुजरे इन एक्टर्स के आखिरी दिन, ऐसी हो गई थी हालत

फिल्म 'लगान' के ईश्वर काका उर्फ श्रीवल्लभ व्यास (60) का लंबी बीमारी के बाद रविवार को जयपुर में निधन हो गया।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 15, 2018, 02:26 PM IST

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    आखिरी वक्त में ऐसी हो गई थी परवीन बाबी की हालत।

    मुंबई।आमिर खान की पॉपुलर फिल्म 'लगान' के ईश्वर काका उर्फ श्रीवल्लभ व्यास (60) का लंबी बीमारी के बाद रविवार को जयपुर में निधन हो गया। कुछ साल पहले एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें पैरालिसिस अटैक आया था, जिसके बाद से उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी और वे सिर्फ लिक्विड डायट पर थे। 2013 में उनकी फैमिली इलाज के लिए जैसेलमेर से जोधपुर शिफ्ट हुई थी। श्रीवल्लभ व्यास की पत्नी शोभा के मुताबिक, इनकी बीमारी की वजह से उन्हें 2 साल में तीन घर बदलने पड़े। लोग कहते थे, बीमार शख्स साथ है, हम नहीं रख सकते।


    वैसे, श्रीवल्लभ व्यास ही नहीं, बल्कि ऐसे कई एक्टर्स रहे हैं, जिनकी हालत जिंदगी के आखिरी वक्त में बेहद खराब थी। इनमें गुजरे जमाने की एक्ट्रेस परवीन बॉबी से लेकर 'शोले' के रहीम चाचा यानी एके हंगल तक शामिल हैं। इस पैकेज में हम बता रहे हैं कुछ ऐसे ही एक्टर्स के बारे में जिनकी जिंदगी का आखिरी वक्त बेहद मुश्किलों में बीता।


    परवीन बाबी
    20 जनवरी, 2005 को परवीन बाबी ने दुनिया को अलविदा कहा। वे सिजोफ्रेनिया नाम की मानसिक बीमारी से पीड़ित थीं। ये अनुवांशिक बीमारी थी, जिसके ठीक होने की संभावना न के बराबर थी। परवीन डायबिटीज और गैंगरीन से भी पीड़ित थीं। इस वजह से उनकी किडनी और शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। उनकी मौत किसी बीमारी से हुई या उन्होंने आत्महत्या की, ये बात अब तक राज ही है। परवीन बॉबी के पड़ोसियों ने पुलिस को इन्फॉर्म किया था कि उनके घर के बाहर अखबार और दूध के पैकेट दो दिन से पड़े थे। इसके बाद पुलिस ने एक नकली चाबी से उनके घर का दरवाजा खोला था।

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    रामी रेड्डी

    बॉलीवुड और साउथ की कई फिल्मों में विलेन का रोल प्ले कर चुके एक्टर रामी रेड्डी को उनके क्रूर किरदारों के लिए जाना जाता है। फिर चाहे 1993 में आई फिल्म 'वक्त हमारा है' में कर्नल चिकारा का रोल हो या 'प्रतिबंध' में अन्ना का, रामी विलेन के हर किरदार में जान डाल देते थे। हालांकि, 250 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके रामी को लिवर की बीमारी ने घेर लिया था, जिसकी वजह से वो अक्सर बीमार रहने लगे थे। लिवर की बीमारी के चलते रामी का ज्यादा वक्त घर पर ही बीतता था और धीरे-धीरे वो पब्लिक में जाने से बचने लगे। हालांकि, एक बार वो एक इवेंट में नजर आए थे, जहां उन्हें पहचानना मुश्किल हो गया था। रामी को लिवर के बाद किडनी की बीमारी ने भी घेर लिया था, जिसकी वजह से मौत के पहले वो सिर्फ हड्डियों का ढांचा रह गए थे। हालांकि, कहा जाता है कि उन्हें कैंसर भी हो गया था। कुछ महीनों तक इलाज चलने के बाद 14 अप्रैल, 2011 को सिकंदराबाद के एक प्राइवेट अस्पताल में रामी रेड्डी की मौत हो गई।

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    गैविन पैकर्ड

    'त्रिदेव' (1989), 'चमत्कार' (1992), 'मोहरा' (1994) और 'खिलाड़ियों का खिलाड़ी' (1996) जैसी फिल्मों में नजर आए एक्टर गैविन पैकर्ड की जब डेथ हुई तो कोई भी बॉलीवुड स्टार उनकी अंतिम विदाई में शामिल नहीं हुआ। आखिरी वक्त में उनकी हालत बेहद खराब हो गई थी। डेथ के समय वे 47 साल के थे। पैकर्ड का जन्म 8 जून 1964 को महाराष्ट्र के कल्याण में हुआ था। वे पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उनके पिता अर्ल कम्प्यूटर एक्सपर्ट थे और मां बारबरा हाउसवाइफ, जो कोंकणी महाराष्ट्रियन थीं। गैविन का उनकी पत्नी से सेपरेशन हो गया था और जिंदगी के आखिरी दिनों में वे छोटे भाई डेरिल पैकर्ड के साथ रह रहे थे। गैविन की दो बेटियां (एरिका पैकर्ड और कैमिली कायला पैकर्ड) हैं। 18 मई 2012 को वसई, महाराष्ट्र में रेस्पिरेटरी डिसऑर्डर की वजह से गैविन की डेथ हो गई।

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    निशा नूर

    यह नाम सुनने में भले ही अनसुना लग रहा हो, लेकिन 80 के दशक में साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में बहुत पॉपुलर था। निशा की पॉपुलैरिटी कुछ ऐसी थी कि रजनीकांत और कमल हासन जैसे बड़े स्टार्स भी उनके साथ काम करना चाहते थे। कहा जाता है कि निशा को एक प्रोड्यूसर ने धोखे से प्रॉस्टिट्यूशन में धकेल दिया था। इसके बाद हुआ यह कि इंडस्ट्री के सभी लोग उनसे दूर हो गए। जब कोई चारा नहीं दिखा तो निशा ने हमेशा के लिए इंडस्ट्री छोड़ दी। लेकिन इसके बाद उनके हालात और खराब हो गए। इंडस्ट्री से कोई उन्हें देखने तक नहीं आया। धीरे-धीरे निशा के आर्थिक हालात बिगड़ते गए। कहा जाता है कि आखिरी दिनों में हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि उन्हें सड़क पर पड़ी पाया गया था। इस दौरान वे जिंदगी की आखिरी सांसें गिन रही थीं। आसपास के लोगों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया तो पता चला कि उन्हें एड्स था। 2007 में निशा जिंदगी की जंग हार गईं।

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    नीरज वोरा

    करीब 13 महीने तक कोमा में रहे नीरज वोरा का 14 दिसंबर, 2017 को निधन हो गया। नीरज पहले ही अपने लगभग पूरे परिवार को खो चुके थे। 2005 में उनके पिता की डेथ हुई। उनकी पत्नी की भी मौत पहले ही हो चुकी थी। तीन साल पहले उनकी मां का निधन हो गया था। बता दें कि नीरज की कोई संतान नहीं है। हां, उनका एक छोटा भाई जरूर है, जिसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। नीरज को अक्टूबर 2016 में ब्रेन स्टोक आया था। इसके बाद उन्हें दिल्ली के AIIMS में भर्ती कराया गया था। इसी साल मार्च में उनके दोस्त प्रोड्यूसर फिरोज नाडियाडवाला उन्हें मुंबई ले आए थे और उनका ख्याल रख रहे थे।

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    एके हंगल

    फिल्म शोले का पॉपुलर डायलॉग 'इतना सन्नाटा क्यों है भाई' लोगों को आज भी याद है। लेकिन इसे बोलने वाले एक्टर अब इस दुनिया में नहीं हैं। 'शोले' और 'बावर्ची' जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा चुके एके हंगल का 98 साल की उम्र में 26 अगस्त 2012 को निधन हो गया था। हंगल अपने अंतिम दिनों मे बेहद तंगी के दौर से गुजरे। उन्होंने अंतिम दिन किराए के एक टूटे-फूटे घर में गुजारे थे। मौत से पहले वो कई तरह की बीमारियों से जूझ रहे थे। बताया जाता है कि जब उनकी सेहत बेहद खराब थी, तब उनके पास इलाज तक के पैसे नहीं थे। उनके बेटे ने जब पिता के इलाज के लिए पैसे ना होने की बात बताई, तब अमिताभ बच्चन ने उन्हें इलाज करवाने के लिए 20 लाख रुपए दिए थे।

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    अचला सचदेव

    'ऐ मेरी ज़ोहरा ज़बीं तुझे मालूम नहीं तू अभी तक है हसीं...जी हां, वही गाना जो 'वक्त' फिल्म की अहम किरदार बीबी (अचला सचदेव) को देखकर बलराज साहनी ने गाया था। अचला सचदेव का निधन अप्रैल 2012 में हुआ। अचला 2002 में पति की मौत के बाद से अकेले पुणे में रह रही थीं। उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। एक दिन पीने का पानी लेने गई अचला फिसल गईं और उनकी जांघ की हड्डी टूट गई। अचला के फैमिली फ्रेंड राजीव नंदा के मुताबिक, उन्होंने बॉलीवुड की प्रमुख हस्तियों को फोन पर उनकी बीमारी के बारे में बताया, लेकिन उनकी खोज-खबर लेने कोई नहीं आया था। अचला का बेटा अमेरिका में और बेटी मुंबई में रहती थी, लेकिन वे भी मां के संपर्क में नहीं थे।

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    भगवान दादा

    भगवान दादा अपनी कॉमेडी फ़िल्म 'अलबेला' के लिए जाने जाते हैं। हिंदी फ़िल्मों में डांस का एक अलग स्टाइल लाने वाले भगवान दादा ऐसे 'अलबेला' सितारे थे, जिनसे अमिताभ बच्चन भी प्रभावित हुए। हालांकि कभी सितारों से अपने इशारों पर काम कराने वाले भगवान दादा का करियर एक बार जो फिसला तो फिर फिसलता ही गया। आर्थिक तंगी का यह हाल था कि उन्हें आजीविका के लिए कैरेक्टर रोल और बाद में छोटे-मोटे काम करने पड़े। उनके आखिरी वक्त में सी. रामचंद्र, ओम प्रकाश, राजिन्दर किशन जैसे कुछ ही दोस्त थे जो उनसे मिलने जाया करते थे। 4 फ़रवरी, 2002 को 89 साल की उम्र में अपना दर्द समेटे हुए बेहद खामोशी से वे इस दुनिया को विदा कह गए।

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