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'बैंडिट क्वीन' में यह सीन करने के बाद रात-रात भर रोती रहती थी ये एक्ट्रेस

एक्ट्रेस सीमा परिहार को असली पहचान 'बैंडिट क्वीन' (1994) में की गई दमदार एक्टिंग की वजह से मिली।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Aug 10, 2016, 12:01 AM IST

  • एंटरटेनमेंट डेस्क। असम में जन्मीं सीमा बिस्वास ने यूं तो अपने करियर में वाटर और हजार चौरासी की मां जैसी कई चर्चित फिल्मों में एक्टिंग की, लेकिन उन्हें असली पहचान 'बैंडिट क्वीन' (1994) में की गई दमदार एक्टिंग की वजह से मिली। यह फिल्म डकैत फूलनदेवी की लाइफ पर बेस्ड थी। फूलन देवी का जन्म 10 अगस्त, 1963 को हुआ था। भले ही आज वो इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन अब भी फूलन का नाम लेते ही चंबल के लोग सिहर उठते हैं। फूलन देवी को कई लोग खतरनाक डकैत तो कई रॉबिनहुड मानते थे। न्यूड सीन के कारण खड़ा हुआ था बखेड़ा...

    फिल्म 'बैंडिट क्वीन' में फूलन देवी का किरदार निभाने वालीं एक्ट्रेस सीमा बिस्वास के मुताबिक फिल्म में न्यूड सीन करने के कारण बहुत बखेड़ा भी खड़ा हुआ था। जिस फिल्म से वो देश भर में फेमस हुई थीं, उनके मुताबिक़ उसी फिल्म के एक न्यूड सीन के कारण उन्हें रात-रात भर रोना पड़ा था। जब यह सीन फिल्माया गया तो वहां डायरेक्टर, कैमरामैन के अलावा सभी की एंट्री बैन थी। सीमा के मुताबिक, 'उस समय फिल्म के बारे में लोगों का रिएक्शन काफी बुरा था। खासतौर पर फिल्म के न्यूड सीन को लेकर।
    आगे की स्लाइड्स में, बैंडिट क्वीन में न्यूड सीन शूट करते समय सभी को कर देते थे बाहर...
  • सीन के दौरान सभी को कर देते थे बाहर...

    सीमा के मुताबिक, कई लोग इस रोल की वजह से मुझसे नफरत करने लगे थे। हालांकि, मैंने कभी इस बारे में सफाई नहीं दी। सीमा के मुताबिक बोल्ड सीन मैंने नहीं, बल्कि बॉडी डबल ने किए थे। इस बारे में मेरे घरवालों को पता था, इसलिए किसी को कोई सफाई नहीं दी। फिल्म में उस सीन के बाद पूरी फिल्म यूनिट रोई थी। सीन के दौरान सभी को सेट से बाहर कर दिया गया था।
  • डायरेक्टर ने कहा- फिल्म में न्यूड सीन रखना जरूरी...

    सीमा के मुताबिक उन्होंने शेखर कपूर से कहा था कि फिल्म से न्यूड सीन हटा दिए जाएं, लेकिन शेखर कपूर ने कहा था कि सत्य घटना पर आधारित इस फिल्म में लोगों की असंवेदनशीलता को दिखाने के लिए वह सीन फिल्म में रखना जरूरी है।
  • फूलन ने खुद किया था विरोध...

    बता दें कि अपनी कहानी के चलते फिल्म को काफी क्रिटिसिज्म झेलना पड़ा था। फूलन देवी ने खुद इस फिल्म का विरोध किया था। हालांकि बाद में कोर्ट की स्वीकृति के बाद फिल्म रिलीज हो सकी थी। सीमा परिहार के मुताबिक, आज भी हॉलीवुड एक्टर्स फिल्म के उस सीन के लिए मुझे सलाम करते हैं, जबकि वह सीन मैंने किया ही नहीं था, लेकिन भारत में लोग उस फिल्म को दूसरी नजर से देखते हैं।
  • कौन थी फूलन...

    1976 से 1983 तक चंबल के बीहड़ में फूलन ने राज किया। बेहमई कांड के बाद उसने 12 फरवरी, 1983 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने अपनी शर्तों पर सरेंडर कर दिया था। बाद में वह राजनीति में आईं और सांसद बनीं। 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में उनके सरकारी निवास के सामने उनकी हत्या कर दी गई। फूलन ने बचपन से लेकर डकैत बनने तक जिस हालात का सामना किया वह दिल दहला देता है। इन हालातों ने फूलन को इतना कठोर बना दिया कि उसने बदला लेने के लिए बहमई में एक साथ लाइन में खड़ा कर 22 ठाकुरों को मौत के घाट उतार दिया था।
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