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ऋतिक ने समारोह छोड़ क्यों भागने में समझी भलाई?

बॉलीवुड के सुपरस्टार यदि शाहरुख ख़ान हैं तो ऋतिक रोशन नि:संदेह सुपर हीरो बन चुके हैं।

धर्मेन्द्र प्रताप सिंह | Last Modified - Jan 10, 2018, 07:29 PM IST

ऋतिक ने समारोह छोड़ क्यों भागने में समझी भलाई?

मुंबई। बॉलीवुड के सुपरस्टार यदि शाहरुख ख़ान हैं तो ऋतिक रोशन नि:संदेह सुपर हीरो बन चुके हैं... 'कृष3' ने बिजनेस करने के मामले में 'चेन्नई एक्सप्रेस' को तो काफी पीछे छोड़ा ही था, ऋतिक को उससे पहले भी कई मौकों पर शाहरुख की शान बिगाड़ने में सफलता मिल चुकी है! याद कीजिए, जब 'कोई... मिल गया' से ऋतिक ने बतौर हीरो अपनी पारी का आगाज किया था... कट्‌टरपंथियों ने शाहरुख के जवाब में उन्हें 'हिंदू हीरो' तक घोषित कर दिया था!! असल में ऋतिक की पहली फिल्म जब सफलता के कीर्तिमान बना रही थी, तब एक हफ्ते बाद ही आई शाहरुख की फिल्म 'फिर भी दिल है हिंदुस्तानी' को दर्शकों का अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिल पाया था। संयोगवश कुछ समय बाद ही ऋतिक ने निर्माता-निर्देशक संजय ख़ान की बेटी सुजैन से विवाह कर लिया तो दर्शकों के एक वर्ग ने इसे भी हिंदू बनाम मुस्लिम बनाकर प्रचारित किया, क्योंकि शाहरुख की शादी हिंदू लड़की (गौरी) से हुई है। बेशक, 2001 में आई 'कभी खुशी कभी ग़म' में शाहरुख और रितिक साथ-साथ नज़र आए। लेकिन इनके बीच की 'प्रतिद्वंद्विता' इसलिए भी बढ़ती गई कि ऋतिक ने बारी-बारी से शाहरुख के सारे बैनर्स में सेंध लगा ली... अपने घरेलू बैनर के साथ-साथ सुभाष घई, आशुतोष गोवारीकर, 'यशराज', संजय लीला भंसाली, करण जौहर आदि उन तमाम फिल्मकारों के भी वे चहेते बन गए, जहां काम करते हुए शाहरुख ने अपना उत्थान किया।


यह बात अलग है कि बॉक्स ऑफिस ने शाहरुख और ऋतिक के बीच का फासला धीरे-धीरे बड़ा कर दिया, पर एक वक्त था कि इनके दरम्यान भक्त और भगवान का रिश्ता हुआ करता था... शाहरुख उन दिनों राकेश रोशन की फिल्मों के अनिवार्य सितारा हुआ करते थे तो पिता की फिल्मों- 'किंग अंकल', 'करण अर्जुन' और 'कोयला' के सेट पर असिस्टेंट की हैसियत से ऋतिक चाय पिलाने से लेकर स्टारों की खातिर कुर्सियों तक का अरेंजमेंट करते थे। सुना है कि ऋतिक को बॉडी बनाने की प्रेरणा सलमान ख़ान से तब मिली, जब वे 'करण...' की शूटिंग के दौरान सल्लू के संपर्क में आए। लेकिन जहां तक अभिनय की बात है तो 'किंग...' के समय से ही ऋतिक पर शाहरुख का खासा प्रभाव रहा। माना जाता है कि 'कोयला' ने इन दोनों के बीच भक्त और भगवान का रिश्ता कायम कर दिया... अब यह 'भक्त' हर उस जगह पहुंचने की कोशिश करने लगा था, जहां उसके 'भगवान' को पूजने (सम्मान मिलने) की संभावना होती थी।


इसी बीच एक ऐसा वाकया हुआ कि भक्त को अपने भगवान का दर्शन किए बगैर ही उस मंदिर (समारोह) से भागना पड़ गया था! दरअसल, जुहू (मुंबई) स्थित 'सेंटॉर' होटल में आयोजित वह 'ज़ी सिने' अवॉर्ड की शाम थी... आज से करीब 20 साल पहले शाहरुख वहां शायद 'दिल तो पागल है' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की ट्रॉफी लेने आए थे, जहां दर्शक दीर्घा में पिता गुड्‌डू के साथ बैठे डुग्गू का उत्साह देखते बनता था। जाहिर है कि वे अपने 'भगवान' शाहरुख को अवॉर्ड ग्रहण करते देखना चाहते थे। आपको बता दें, ऋतिक तब न तो कसरती बदन के धनी थे और न ही उनका चेहरा आज के जैसा लंबा और नाक नुकीली थी- ग्रीक गॉड की तरह! एक लिहाज से मासूम ऋतिक तब और भी ज्यादा हैंडसम थे!! ऐसे में शाहरुख का दीदार करने पहुंचीं लड़कियां उनके भक्त की खूबसूरती पर कुछ यूं फिदा हुईं कि चिकोटी काट-काट के उनका बुरा हाल कर दिया। राकेश ने अपने बेटे को संभालने-बचाने का बहुत प्रयास किया, मगर सब व्यर्थ... आज ऋतिक को वह घटना याद कर हंसी जरूर आती होगी कि शाहरुख मंच पर आते, पापा संग पहले ही वहां से रफू चक्कर होने में उन्हें अपनी भलाई समझ आई थी!

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Web Title: ritik ne smaaroh chhoड़ kyon bhaagane mein smjhi bhlaaee?
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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