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बॉलीवुड के सेक्सी संन्यासी की कहानी, जो ओशो के आश्रम में टॉयलेट तक धोता था

ओशो के नाम से फेमस आचार्य रजनीश को गुजरे हुए 28 साल हो गए हैं।19 जनवरी 1990 को 58 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 19, 2018, 12:19 PM IST

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    ओशो के आश्रम में विनोद खन्ना।

    मुंबई.ओशो के नाम से फेमस आचार्य रजनीश को गुजरे हुए 28 साल हो गए हैं।19 जनवरी 1990 को 58 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। ओशो के अनुयायी लाखों-करोड़ों हुए। इनमें दिवंगत एक्टर विनोद खन्ना भी शामिल रहे। कई सुपरहिट फिल्में देने के बाद विनोद ओशो से जुड़े थे। वे ओशो से इस कदर इंस्पायर थे कि उनके आश्रम में 5 साल गुजार दिए। वहां उन्होंने माली का काम किया। इतना ही नहीं कहा जाता है कि वे ओशो के आश्रम में टॉयलेट तक साफ किया करते थे। प्रोड्यूसर्स के साइनिंग अमाउंट लौटाने लगे थे विनोद...

    - पुणे के ओशो आश्रम में उन्हें 31 दिसंबर, 1975 को दीक्षा दिलाई गई।
    - 70 के दशक में ओशो से जुड़ने के बाद खन्ना की पर्सनल लाइफ ही बदल गई। वे हर वीकेंड पुणे में ओशो के आश्रम जाते थे। यहां तक कि उन्होंने अपने कई शूटिंग शेड्यूल भी पुणे में ही रखवाए थे। शूटिंग के लिए भी वे कुर्ता और माला पहनकर पहुंचने लगे थे। धीरे-धीरे वे प्रोड्यूसर्स को साइनिंग अमाउंट भी लौटाने लगे।
    - ओशो से जुड़ने के बाद उन्होंने कई जोड़ी सूट, कपड़े, जूते और दूसरे लग्जरी सामान लोगों में बांट दिए थे। वे पहले गेरुआ, फिर आश्रम का मरून चोगा पहनने लगे। दिसंबर 1975 में विनोद ने फिल्मों से अचानक ब्रेक लिया और संन्यासी बनने का फैसला किया।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़िए, विनोद खन्ना ओशो आश्रम में करते थे कैसे काम, साथ ही उनकी लाइफ से जुड़ी कुछ और बातें...

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    ओशो आश्रम में माली थे विनोद खन्ना

    - विनोद खन्ना, आचार्य रजनीश ओशो के साथ अमेरिका के ओरेगान में कम्यून स्थापित करने के लिए चले गए।
    - वहां पहुंचने पर ओशो ने उन्हें अपने पर्सनल गार्डन की देखभाल के लिए बतौर माली नियुक्त किया।
    - वहां वे तकरीबन चार साल तक रहे और अमेरिका द्वारा ओशो आश्रम बंद करने के बाद इंडिया आ गए।
    - एक इंटरव्यू में खुद विनोद खन्ना ने स्वीकार किया था कि, अमेरिका के ओशो आश्रम में वे कई साल माली रहे, इस दौरान उन्होंने आश्रम में टॉयलेट से लेकर थाली तक धोया। विनोद ने यह भी स्वीकार किया था कि 1982 के बाद ओशो के साथ उनके रजनीशपुरम आश्रम में खन्ना ने करीब 5 साल गुजारे।
    - जब विनोद खन्ना ने फिल्‍मों से रिटायरमेंट लेने की घोषणा की, तो किसी को विश्‍वास नहीं हुआ। उस समय लोग उन्हें 'सेक्‍सी संन्‍यासी' कहने लगे थे।

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    पत्नी से टूटा रिश्ता

    - 4-5 साल तक परिवार से दूर रहने वाले विनोद का परिवार पूरी तरह टूट गया था।
    - जब वो इंडिया लौटे तो पत्नी उन्हें तलाक देने का फैसला कर चुकी थीं।
    - फैमिली बिखरने के बाद 1987 में विनोद ने फिल्म 'इंसाफ' से फिर से बॉलीवुड में एंट्री की।
    - दोबारा फिल्मी करियर शुरू करने के बाद विनोद ने 1990 में कविता से शादी की।
    - दोनों के एक बेटा और एक बेटी है। विनोद का दूसरा बेटा साक्षी भी फिल्मों में आने की तैयारी कर रहा है।

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    1987 में फिल्मों में वापसी

    - 1987 में डिंपल कपाडिया के अपोजिट फिल्म 'इंसाफ' के जरिए उन्होंने बॉलीवुड में वापसी की। इसी साल फिल्म 'दयावान' में एंटी-हीरो के तौर पर उन्हें पसंद किया गया।
    - 90 के दशक में उन्होंने मुकद्दर का सिकंदर (1978), सीआईडी (1990), जुर्म (1990), लेकिन.. (1990), हमशक्ल (1992), खून का कर्ज (1991), पुलिस और मुजरिम (1992), इंसानियत का देवता (1993) जैसी फिल्मों में काम किया।
    - सलमान खान स्टारर 'दबंग' सीरीज की फिल्मों में उन्होंने अहम किरदार निभाया।
    - विनोद को आखिरी बार डायरेक्टर रोहित शेट्टी की फिल्म 'दिलवाले' (2015) में देखा गया था। इस फिल्म में शाहरुख खान, काजोल, वरुण धवन और कृति सेनन अहम भूमिका में थे।

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    1997 में पॉलिटिक्स में एंट्री

    - 1997 में बीजेपी का मेंबर बनने के बाद विनोद नेता भी बन गए। वे गुरदासपुर, पंजाब से बीजेपी सांसद रहे। जुलाई 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें संस्कृति और पर्यटन मंत्री बनाया।
    - 2003 में वाजपेयी ने उन्हें विदेश राज्य मंत्री का अहम जिम्मा सौंपा। इस पद पर रहते हुए खन्ना ने फिल्म इंडस्ट्री के जरिए भारत-पाक के बीच दूरियां कम करने की कोशिश की थी।

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Web Title: When Vinod Khanna Became Sanyasi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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