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#पद्मावत: भंसाली बोले- मैंने करणी सेना को खूब समझाया, जब नहीं माने तो...

'पद्मावत' की शूटिंग की शुरुआत से ही संजय लीला भंसाली को कई तकलीफों का सामना करना पड़ा।

शुभा शेट्‌टी साहा | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:56 PM IST

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    मुंबई. 'पद्मावत' की शूटिंग की शुरुआत से ही संजय लीला भंसाली को कई तकलीफों का सामना करना पड़ा। ...पर इतने कड़े विरोध के बाद ना सिर्फ भंसाली ने फिल्म रिलीज की बल्कि उनकी यह फिल्म जबरदस्त कमाई भी कर रही है। अब एक बार फिर से स्वरा भास्कर के 'कॉन्ट्रोवर्शियल ओपन लेटर' के चलते फिल्म चर्चा में है। इस बातचीत में भंसाली ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कई मुद्दों पर बात की...

    >> क्या बीते दिनों आपको ऐसा महसूस हुआ कि आपने एक युद्ध लड़ा है?

    हां, बिल्कुल। एक फिल्ममेकर के तौर पर मुझे जख्मी किया गया, डराया गया और मुझे पीटा भी गया पर इसके बावजूद भी मैंने अपनी डिगनिटी मेंटेंन रखी और भगवान पर भरोसा रखा। स्ट्रगल जिंदगी का हिस्सा है और यही हमें मजबूत बनाता है। जब कोई आपके पैशन और कमिटमेंट पर सवाल उठाए, तब उसे पूरी ताकत से जवाब देना चाहिए। जब आपके साथ कुछ गलत होता है तब आपको एहसास होता है कि आपके अंदर कितनी ताकत है और वैसे भी लोग तो ताज महल पर भी उंगली उठा देते हैं, फिर मैं क्या चीज हूं।

    >> स्ट्रगल तक तो ठीक था पर यह कुछ ज्यादा ही पागलपन की हद तक नहीं चला गया?

    मेरे हिसाब से जब कहीं प्रोटेस्ट या विरोध किया जाए तो उसे तब तक ही एक्सेप्ट किया जाना चाहिए जब तक वह तमीज के साथ किया जाए। मैंने उन्हें (करणी सेना) बार-बार समझाने की कोशिश की कि इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है जो आपके सम्मान और गौरव को ठेस पहुंचाए पर वे सुनने को ही राजी नहीं थे। इसके बाद मैंने ही बोलना बंद कर दिया। मुझे एक ऐसी फिल्म पर ध्यान देना था जिस पर हम सभी गर्व कर सकें। मेरे पास भी लड़ने का ऑप्शन था पर मैंने चुप रहने का रास्ता चुना। यह मेरी लाइफ का सबसे बड़ा टेस्ट था, क्योंकि मुझे लगातार फोन पर धमकियां मिल रही थीं और मैंने अपना पूरा ध्यान अपनी फिल्म पर लगाने की कोशिश कर रहा था। हम तो उस सिचुएशन से भी गुजरे है जब अक्सर डर लगा रहता था कि कोई हमारा पीछा कर रहा है।

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    >> कभी ऐसा महसूस हुआ कि आपने गलत सब्जेक्ट चुन लिया है?

    नहीं, चाहे कोई इसे पसंद करे या ना करे, हमने वह फिल्म बनाई जिसपर हमें यकीन था। अपने सब्जेक्ट को लेकर आप केयरफुल नहीं रह सकते, लोग तो कॉमेडी फिल्म पर प्रोटेस्ट कर लेते हैं। मैं आशा करता हूं कि कोई और निर्देशक इस तरह की स्थिति से ना गुजरे जिससे मैं गुजरा हूं। हिंदी सिनेमा के इतिहास में आज तक किसी भी डायरेक्टर पर अटैक करके उसका सेट नहीं जलाया गया। मैंने इन सबसे गुजरने के बाद फिल्म बनाई और आगे जाकर मैं और मजबूत फिल्में बनाऊंगा।

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    >> स्वरा भास्कर के लेटर के बारे में आपका क्या कहना है?

    हर किसी के पास अपनी राय रखने का अधिकार है। फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन जरूरी है पर टाइमिंग गलत हो सकती है। यह कहानी 700 साल पुरानी है। मैंने इसे इसलिए बयां किया क्योंकि मुझे इससे इंस्पिरेशन मिली। एक युद्ध में महिलाएं छेड़छाड़ का शिकार होने के बजाय अग्नि में प्रवेश करना पसंद करती हैं। उन्होंने वही किया जैसा उन्हें सिचुएशन ने करने को मजबूर किया। ऐसा करके उनको लगता है कि उन्होंने दुश्मन को हरा दिया। स्वरा ने लेटर में जो लिखा वो ठीक है पर मुझे नहीं लगता कि वे उस बारे में बात कर रही हैं जो मैंने किया है।

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    इधर स्वरा बोलीं- 'नेशनल डिस्कशन का हिस्सा होना चाहिए मेरा सवाल'

    अपने ओपन लेटर के लिए इंडस्ट्री के तमाम लोगों का पलटवार झेल चुकीं स्वरा भास्कर आज भी अपनी बात पर कायम है। वे कहती हैं, "जब से फिल्म को लेकर विवाद शुरू हुआ, तबसे मैं करणी सेना की परवाह किए बगैर भंसाली और 'पद्मावत' की टीम से साथ खड़ी रही हूं। फिल्म देखने के बाद मेरे मन में जो भी सवाल उठे, मैंने बस उन्ही सवालों को सामने रखा है और भंसाली जी से जवाब मांगे हैं। मेरे हिसाब से बहस और बातचीत होनी ही चाहिए, कला का मकसद ही वाद-विवाद होता है। इस मुद्दे पर बहस इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इस फिल्म की वजह से ही बाकी तमाम मुद्दों पर भी बहस हुई है। मैं चाहती थी कि मेरे सवाल भी नेशनल डिस्कशन का हिस्सा बने।"

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