कहानी बुरी पर नौटंकी अच्छी!
रावणलीला एक बेहतरीन नाटकीय प्रस्तुति है, जिसमें फिल्म का हीरो निर्देशक और रावण, दोनों की भूमिकाएं निभाता है। मंचसज्जा और वेशभूषा दोनों भव्य नजर आते...
इस फिल्म में सर रिचर्ड एटेनबोरो (जिन्हें पूरा देश गांधी फिल्म के निर्देशक के रूप में जानता है) ने एक मल्टी बिलिनेअर जॉन हैमंड की भूमिका निभाई है। उन्होंने जेनेटिक म्यूटेशन की एक...
यदि अपुष्ट सूत्रों से मिल रही खबरों पर विश्वास करें तो कथा और स्पर्श जैसी फिल्मों की निर्देशिका सई परांजपे, जिन्होंने वर्ष 1981 में ओरिजिनल चश्मे बद्दूर बनाई थे, पिछले कुछ महीनों...
यह 1980 के दशक में आधारित फिल्म नहीं है, यह 1980 के दशक में बनी फिल्मों के दायरे में रहने वाली फिल्म है, लिहाजा इसे एक विचित्र पीरियड फिल्म ही कहा जा सकता है।
अधिकांश रीमेक्स में, जैसे कि...
सेलेब्रिटीज़ क्रिएट करना कठिन नहीं है, बस पैसे खर्च करने को तैयार रहना चाहिए। आपकी तस्वीर या वीडियो मीडिया में जितनी बार दिखता है, उतनी ही आपको ख्याति मिलती रहती है, बशर्ते आप इस सबके लिए...
भारतीय परिवेश और एक भिन्न कालखंड में, मान लीजिए 1990 के दशक के अंतिम दिनों में, क्या निर्देशक अनिल शर्मा इस फिल्म के साथ न्याय कर पाते? शायद हां। इस फिल्म का जिंगोइज़्म ‘गदर’ के...
हम दर्शकों की चहल-पहल से अंदाजा लगा सकते हैं कि कोई हॉरर फिल्म उन्हें डराने में कामयाब हो पा रही है या नहीं। इससे फर्क नहीं पड़ता कि फिल्म बहुत अच्छी है या बहुत बुरी, दर्शक हंसते जरूर...
अगर समय हो तो ड्राइव पर चलें
इससे पहले कि हम इस फिल्म को पसंद करना प्रारंभ करें, हमें इस विचार से छुटकारा पाना होता है कि शायद यह हमारे द्वारा अब तक देखा गया किसी ऑटोमोबाइल उत्पाद का सबसे...
लॉ के लॉ लग गए!
कुछ हद तक जोनाथन लिन की फिल्म 'माय कजिन्स विन्नी' (1992) से प्रेरित यह फिल्म हमारी न्यायिक प्रणाली पर व्यंग्य करती है, ठीक वैसे ही, जैसे 'मुन्नाभाई एमबीबीएस'...
सिनेमा में रिटर्न होने लायक
सीक्वेल अब एक बॉलीवुड फॉर्मूला बन चुके हैं। आम तौर पर बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के सीक्वेल बनाए जाते हैं, लेकिन ऐसा जरूरी भी नहीं है। सीक्वेल को...