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एक्सपर्ट की राय : बुरे शहरी सपने की अल्टीमेट कहानी है फिल्म 'ट्रैप्ड'

Anupama Chopra | Mar 17, 2017, 16:02 IST

एक्सपर्ट की राय : बुरे शहरी सपने की अल्टीमेट कहानी है फिल्म 'ट्रैप्ड'
Critics Rating
  • Genre: थ्रिलर ड्रामा
  • Director: विक्रमादित्य मोटवानी
  • Plot: Plot: साल 2002 में हॉलीवुड में 'ट्रैप्ड'फिल्म बनी थी और अब नाम वही है लेकिन नई सोच के साथ विक्रमादित्य मोटवानी ने अलग अंदाज में यह फिल्म बनाई है।
'ट्रैप्ड' रिलीज हो गई है। इसपर जानी-मानी फिल्म क्रिटिक अनुपमा चोपड़ा से dainikbhaskar.com ने जाना, कैसी है ये फिल्म...
कैरेक्टर
राजकुमार राव - फिल्म में राजकुमार राव ने शौर्य का कैरेक्टर प्ले किया है। जो कि ट्रैवल एजेंसी में काम करने वाला साधारण सा व्यक्ति होता है।
डायरेक्शन
एक एक्टर, एक लोकेशन और छोटा बजट.. जिसमें डायरेक्टर विक्रमादित्य मोटवानी ने ये सारी कहानी क्रिएट की है। 'ट्रैप्ड' एक अचानक से डर जगाने वाली कहानी है जिसमें उन्होंने एक ब्यूटीफुल और निर्दयी मुंबई को दिखाया है। 'ट्रैप्ड' इसलिए लोगों के कनेक्ट करेंगी, क्योंकि ये आज के सिनेरियो को बताती है। राइटर अमित जोशी और हार्दिक मेहता ने हमें जो कैरेक्टर दिया। उसका नाम शौर्य (राजकुमार राव) है। शौर्य एक ट्रेवल एजेंसी में काम करता है। जिसका फिल्म में थोड़ा रोमांस भी दिखाया गया है। शौर्य एक अपार्टमेंट की तलाश में रहता है। तभी एक संदेहपूर्ण ब्रोकर की एंट्री होती है। जो शौर्य को कोर्ट के लफड़े में फंसी एक बिल्डिंग में सस्ता अपार्टमेंट दिला देता है। जहां सिर्फ एक वॉचमैन रहता है जो मुश्किल से सुन पाता है।
कहानी
'ट्रैप्ड' एक बुरे शहरी सपने की अल्टीमेट कहानी है। जिसमें मुंबई के एक खाली अपार्टमेंट में शौर्य (राजकुमार राव) फंस जाता है। जहां ना तो पानी है ना ही इलेक्ट्रिसिटी। वहां कंपनी के लिए होते हैं तो सिर्फ चूहे और कॉकरोच जो कैसे खत्म होते हैं ये आप नहीं जानना चाहेंगे। फिल्म में विक्रम, सिनेमेटोग्राफर सिद्धार्थ दीवान, एडिटर नितिन वैद ने पूरी परिस्थिति को बखूबी बयान किया है। बैकग्राउंड म्यूजिक की बात करें तो आलोकनंदा दासगुप्ता ने बेहतरीन काम किया है। एक सीन में सूर्या अपने आपको काटता है ताकि वो अपने ब्लड से साइन क्रिएट कर सके। ये सीन आपको आंखें बंद करने पर मजबूर कर देगा। फिल्म में थोड़ी सी हॉलीवुड की झलक मिलती है लेकिन ये पूरी तरह से मुंबई मूवी है। जहां हर कोई हजारों लोग से घिरा हुआ है लेकिन फिर में अकेला है। 'ट्रैप्ड' एक कड़क बिजली का तार है जो बिना राजकुमार राव के गिर जाता। शुरुआत में शौर्य एक साधारण सुलझा शख्स होता है जो वेजेटेरियन है और पाव भाजी उसका ड्रीम फूड है। लेकिन बाद में इस सिचुएशन के कारण शौर्य में आए बदलाव को राजकुमार राव ने परदे पर बखूबी उतारा है।
रेटिंग
मैं बहुत खुश हूं कि 'ट्रैप्ड' बिना इंटरवल के रिलीज हुई। फिल्म की ड्यूरेशन 103 मिनिट है। फिल्म में ऐसा दौर दिखाया है जब आप पेशेंस हो देते हैं। लेकिन शौर्य की डरावनी कहानी इसे टाइमली रिकवर कर लेती है। मैं इस फिल्म को 3.5 स्टार देना चाहूंगी।
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Web Title: Trapped Review
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
 

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