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यशजी ने 'सिलसिला' में ब्रेक दिया तो मैं बना गीतकार

अमित पाठे | Feb 23, 2013, 16:24 PM IST

गीतकार जावेद अख्तर ने भोपाल में समन्वय भवन ऑडिटोरियम में आयोजित लेक्चर ‘द टॉक’ में ‘100 इयर्स ऑफ सिनेमा एंड इट्स इफेक्ट ऑन इंडियन सोसायटी’ पर अपने विचार रखे। इसके बाद कॉफी टेबल पर उन्होंने सिटी भास्कर से बात की..

"यदि यश जी मुझे सिलसिला में ब्रेक नहीं देते तो मैं बॉलीवुड में कहानीकार के रूप में जाना जाता। जो शायरी सिर्फ मेरी डायरी तक सीमित थी, वह दुनिया के सामने आई और काफी पसंद भी की गई इसमें भी एक दोस्त की अहम भूमिका रही।"

दोस्तों ने हर समय दिया साथ

रिश्ते- भोपाल में पहली क्लास में एडमिशन हुआ। एक-दो सालों के बाद लखनऊ चला गया और 15 साल के बाद भोपाल लौटा। 15 से 19 साल की उम्र भोपाल में ही बीती। जिंदगी का यह समय ही आपको बनाता बिगाड़ता है। यह समय वो खजाना देता है जो ताउम्र काम आता है। इस दौरान मैं अपनी फैमिली से फिजिकली और इमोशनली दूर था। सिर्फ दोस्त मेरे साथ थे जिन्होंने मेरी रोटी, कपड़ा और मकान की जरूरतों का ख्याल रख मानो जैसे मुझे जिंदा रखा। कहिए फिर ऐसी दोस्ती पर यकीन कैसे न रहेगा।

संघर्ष- मैं डिबेटर था और 1963 में उज्जैन में होने वाले नेशनल यूथ फेस्टिवल में मेरा सिलेक्शन हुआ। वहां जाने के लिए मेरे पास ढंग के कपड़े और स्वेटर नहीं था। मेरे पास एक स्वेटर और सिर्फ दो जोड़ी कपड़े हुआ करते थे। मेरे पास तो अपना बिस्तर भी नहीं होता था। दोस्तों के यहां सोया करता था। तब एक स्टूडेंट लीडर जिनसे उस समय तक मेरा कोई खास नाता नहीं रहा था उसने यूनिवर्सिटी फंड आदि से मेरे लिए कपड़े सिलवाए।

सफलता-1981 में यश जी सिलसिला बना रहे थे और किसी दोस्त ने उनसे कह दिया कि आप इस फिल्म के लिए जावेद अख्तर से गीत लिखवाओ। यश जी ने मुझे बंगले पर बुलाया और कहा कि तुम शायरी भी करते हो, यह पता नहीं था। उन्होंने मुझे ‘सिलसिला’ के गीत लिखने के लिए कहा इस तरह ‘सिलसिला’ के गीतों ने मुझे सिर्फ कहानी लेखक जावेद के नाम से नहीं बल्कि गीतकार जावेद अख्तर के नाम से पहचान दिलाई।
Web Title: yash raj gives me opportunity to become lyricist
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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