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'सेक्स और न्यूडिटी वाली फिल्में ज्यादा समय तक नहीं चलेंगी'

Subhash K.Jha | Oct 24, 2012, 15:37PM IST

दैनिक भास्कर डॉट कॉम के सुभाष के झा को दिए इंटरव्यू के अंश, जिनमें यश चोपड़ा ने बताया था सफलता का राज..


सत्तर के दशक में आपने त्रिशूल, काला पत्थर और दीवार जैसी फिल्में बनाईं जो एक्शन थीं इनमें रोमांस कम ही था।


अगर आप दीवार देखें तो उसमें सिर्फ एक ही फाइट सीन था। फिल्म मां और बेटे के इमोशनल सीन के कारण हिट हुई है न कि एक्शन के कारण।


इसके बाद मेरी रोमांटिक फिल्में परंपरा, विजय और फासले नहीं चल सकीं। इसका उत्तर मुझे एक होर्डिग देखकर मिला। मैंने देखा कि फिल्म का एक कैरेक्टर रिवॉल्वर लिए दिख रहा है.. मुझे गलती समझ में आई और मैंने चांदनी बनाई।


लोगों ने कहा कि यह नहीं चलेगी, लेकिन फिल्म हिट हुई। मेरा नजरिया सही साबित हुआ। जब चांदनी के गानों को मैंने उस फिल्म का यूएसपी कहा तो इस पर भी आपत्ति उठाई गई थी लेकिन फिल्म के गाने भी जबरदस्त हिट हुए।



फिल्मों में जिस तरह से रोमांस को आजकल दिखाया जा रहा है उसपर आप क्या कहेंगे।
हमारे यहां वे फिल्में ही चल सकती हैं जिनमें इंडियन वैल्यूज हों। दुर्भाग्य से वैसी फिल्में आजकल नहीं बन रही हैं। इसलिए सेक्स और न्यूडिटी का सहारा लिया जा रहा है। इस तरह की फिल्मों का चलना काफी मुश्किल
होता है। ऐसी फिल्मों का दौर जल्द ही चला जाएगा।



लम्हे मेरी फेवरेट है।
मेरी दो फिल्में लम्हे और सिलसिला ज्यादा नहीं चल सकीं। शायद ये दोनों समय से पहले बनी थीं। ये दोनों फिल्में मेरी
फेवरेट हैं , विशेष रूप से सिलसिला। कुछ फिल्मों को समय के बाद ही हिट होने होता है जैसे कि गुरुदत्त की कागज के फूल। वैसे मुझे मेरी सारी ही फिल्में बहुत अच्छी लगती हैं धूल का फूल से वीर जारा तक।


ऐसा इसलिए है क्योंकि मैंने एक ही थीम पर फिल्में बनाने का निर्णय लिया था जो कि कभी आउट डेटेड नहीं हो सकता है , वो है ह्यूमन इमोशंस। अगर मैं किसी एक व्यक्ति का दिल भी छू सकता हूं तो मैं सबसे खुश फिल्ममेकर हूं।



क्या आपको ऑडिएंस की उम्मीदों से घबराहट होती है।
शुरू के दिनों में मुझे बीआर चोपड़ा के छोटे भाई के रूप में ही पहचाना जाता था। 1973 में जब मैंने अपने ही प्रोडक्शन में दाग बनाई तो मैं बहुत नर्वस था। यह उस समय के लिए बहुत ही कॉन्ट्रोवर्शियल टॉपिक था। लेकिन लोगों ने मुझे सराहा। फिल्म हिट हुई, भगवान तब भी मेरे साथ था, आज भी है। मैं चाहता हूं कि ऑडिएंस की उम्मदों पर खरा उतरूं।


आपके क्रिटिक कहते हैं कि आपकी फिल्मों में रिएलिटी नहीं दिखती।
मैं ऐसा नहीं मानता, चाहे वो अरेंज मैरिज हो , किसी आदमी के भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष की कहानी हो मेरी फिल्मों के हिस्से हैं। मेरी फिल्म वक्त में यह दिखाया गया कि कैसे भाग्य के आगे आदमी निर्बल हो जाता है, यह भी तो जीवन का हिस्सा है।

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Web Title: sex and nudity will not sell for longer time: yash chopra
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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