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भारतीय तड़के का जवाब नहीं

Jay Prakash Chouksey | Oct 31, 2012, 10:26 IST

भारतीय तड़के का जवाब नहीं

अनुराग कश्यप व रोनी स्क्रूवाला की फिल्म ‘लव शव ते चिकन खुराना’ जल्द प्रदर्शित होने जा रही है। अनेक लोग टेलीविजन पर लजीज व्यंजन बनाने का कार्यक्रम देखते हैं और सभी देशों में पाककला पर आधारित कार्यक्रम लोकप्रिय हैं। एक विद्वान का कथन है कि किसी व्यक्ति के प्रिय भोजन की जानकारी उसके पूरे व्यक्तित्व की कुंजी है।


शेक्सपीयर ने संगीत की प्रशंसा में जो बात कही है, वह भोजन से भी जुड़ी है कि अगर संगीत प्रेम का भोजन है तो उसे जारी रखा जाए। प्रेम और भोजन के विषय में यह लोकप्रिय बात कही जाती है कि पुरुष के हृदय का रास्ता उसके पेट से गुजरता है। यह तक कहा जाता है कि सिरदर्द भी अपच के शिकार पेट की सांकेतिक शिकायत है। भूखे पेट भजन भी नहीं गाए जाते।

भाषा में भी भोजन को लेकर अनेक बातें हैं। पेटू उस व्यक्ति को कहते हैं, जो बहुत अधिक खाता है, परंतु असली भोजनप्रेमी सिर्फ चखता है और उसे चटोरा कहते हैं। कुछ लोगों की भोजन देखते ही लार टपकने लगती है। जरूरत से अधिक या कम खाने के कारण ही अनेक डॉक्टर बेहद अमीर हो जाते हैं।

अभिनय और फैशन की दुनिया में नाम कमाने का अरमान रखने वाली लड़कियां ‘जीरो फिगर’ की खातिर स्वयं को इतना प्रताड़ित करती हैं कि कई बार उन्हें चक्कर आने लगते हैं। इसके विपरीत कुछ लोग इतना अधिक खाते हैं कि उनका मोटापा उन्हें चलने की इजाजत भी नहीं देता और अनेक रोग लग जाते हैं।

इंदौर के डॉ. मोहित भंडारी इस तरह के लोगों का एक ऑपरेशन करते हैं, जिसे बेरियाट्रिक सर्जरी कहते हैं, जिसके बाद व्यक्ति अधिक खा ही नहीं पाता। अनेक लोगों को इससे लाभ हुआ है। बढ़ता हुआ वजन आयु घटा देता है, अर्थात
आप नहीं खा रहे हैं, वरन भोजन ही आपको खा रहा है। कुछ लोग खाने के लिए जीते हैं, कुछ जीने के लिए
खाते हैं।


पाक-शास्त्र पर अनगिनत किताबें हैं और यह लोकप्रिय भी होती हैं। दरअसल हमारे देश में स्वादिष्ट भोजन की विधि अनेक लोग अपने साथ ही ले जाते हैं। दूसरों को पकाने के नुस्खे नहीं देने का एक कारण यह भी है कि परिवार में अपनी लोकप्रियता के घट जाने का भय होता है।

अनुराग कश्यप की इस फिल्म में भी खुराना साहब अपने चिकन पकाने की विधि किसी को नहीं बताते और उनके मरने के बाद उस विधि की खोज में सारा परिवार लग जाता है। उनका ढाबा था, अत: विरोधियों को भी खुराना चिकन पकाने की विद्या चाहिए। इसकी खोज कुछ इस पैमाने पर होती है, मानो हाइड्रोजन बम का फॉमरूला खोजा जा रहा हो।
भोजनप्रेमी लोग जुनूनी भी हो जाते हैं। स्वादिष्ट भोजन की तलाश में मीलों का सफर करते हैं। भोजन
जीवन और सोच का केंद्र हो जाता है।

आजकल के फिल्म सितारे तो अपने शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए स्वाद के मोह से मुक्त हो चुके हैं, परंतु गुजश्ता दौर के सितारों का भोजनप्रेम उनके फिल्म बनाने के प्रेम से कम नहीं था। कपूर खानदान के सारे सदस्य भोजनप्रेमी
रहे हैं और देश-विदेश के प्रसिद्ध ठियों की उन्हें गहरी जानकारी रही है। निर्माता नासिर हुसैन(आमिर खान के
ताऊ) लखनऊ से बिरयानी की विधि लाए थे और उनके घर की बिरयानी की बड़ी तारीफ होती थी। उन्होंने ताउम्र
न फिल्म का मसाला बदला और न ही अपनी बिरयानी का। इन तमाम भोजनप्रेमियों में संजीव कुमार शिखर पर
रहे हैं।

दरअसल भोजन ही उन्हें असमय मार गया। वे छुट्टी के दिन बांद्रा के गजेबो ओरिएंटल में दोपहर के
खाने के लिए एक बजे पहुंचते थे और उनका यह भोजन सूर्यास्त तक ही खत्म होता था। विश्वविख्यात संगीतज्ञ
जुबिन मेहता भी भोजनप्रेमी रहे हैं। दरअसल आंचलिक भोजन विविध होते हैं और स्थान की जलवायु का प्रभाव भी भोजन पर पड़ता है। राजस्थान के गट्टे प्रसिद्ध हैं, क्योंकि वहां सब्जियां ज्यादा नहीं उगती थीं। पेशावर का मनुष्य मांसाहारी होने के लिए मजबूर है। मालवा के लोग दाल-बाफले के शौकीन रहे हैं।

दक्षिण भारत का इडली-सांभर और डोसा अब विदेशों में भी लोकप्रिय हो चुका है। भारत में जो चायनीज भोजन के नाम से बेचा जाता है, वह चीन में पके भोजन से अलग है। हमने उसमें भारतीय तड़का लगाया है। दरअसल यह भारतीय तड़का विदेश से चुराई कहानियों में भी लगाया जाता है।

इतना ही नहीं, हमने तो राजनीति में भी भारतीय तड़का लगाकर ऐसी व्यवस्था कायम की है कि हमारा गणतंत्र दुनिया के सभी गणतंत्र प्रणाली वाले देशों से अलग है। इसमें सामंतवाद भी है, वंशवाद भी है और यह लोकप्रिय लहरों पर आधारित प्रणाली है, जिसमें तर्क के लिए स्थान नहीं है।

भारत की राजनीति के बाजार में विविध ढाबे हैं, अजीबोगरीब ठिए हैं। हर पार्टी के अपने मसाले, अपने जायके हैं, परंतु भारत के भूखों के लिए इस पाकशाला में कुछ भी नहीं है। सारे रसोइयों की तोंद निकल आई है। वे बनाते-बनाते इतना चखते हैं कि
किसी के लिए कुछ नहीं बचता।

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Web Title: parde ke peeche
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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