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'रेस 2' में तो तुम्हारे बाप हैं!

Mayank Shekhar | Jan 25, 2013, 17:32PM IST

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    Critics Rating
    • Genre: एक्शन थ्रिलर
    • Director: अब्बास-मस्तान
    • Plot: रेस २ में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं, नाम है सैफ खान : सैफ को इस फिल्मस में अपने को-स्टावर जॉन अब्राहम से यही कहना चाहिए। वेल, वे उनसे यह तो नहीं कहते, लेकिन इतना तो कह ही देते हैं कि तुम मुझे क्याय बाहर करोगे, मैं इस रेस में शुरू से शामिल हूं। पता नहीं, इस डायलॉग में कोई अंदरूनी मजाक छिपा हुआ है या नहीं, लेकिन सैफ क्यास कहना चाहते हैं, यह हम तक अच्छीक तरह पहुंच जाता है।

'रेस 2' में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं, नाम है सैफ खान : सैफ को इस फिल्म में अपने को-स्टार जॉन अब्राहम से यही कहना चाहिए। वेल, वे उनसे यह तो नहीं कहते, लेकिन इतना तो कह ही देते हैं कि तुम मुझे क्या बाहर करोगे, मैं इस रेस में शुरू से शामिल हूं। पता नहीं, इस डायलॉग में कोई अंदरूनी मजाक छिपा हुआ है या नहीं, लेकिन सैफ क्या कहना चाहते हैं, यह हम तक अच्छी तरह पहुंच जाता है।



सैफ इस फिल्म के पहले भाग में भी थे। बजट के मामले में यह फिल्म रेस की बाप है। इस सीक्वल में सैफ के हिस्से में बेहतरीन स्टंट सीन आए हैं। वे बिल्डिंगों से छलांग लगा जाते हैं, तीरंदाजी करते हैं, उनके चेहरे पर हमेशा उदासी का भाव रहता है और उनकी दोनों आंखों के बीच माथे पर एक अजीब-सी सिलवट बनी रहती है।



इसकी तुलना में फिल्म में जॉन की भूमिका केवल शर्ट उतारने, हैंडफाइट करने या मोर्टल कॉम्बैट ऑपरेशन में शामिल होने तक ही सीमित हैं। इसके बावजूद दोनों हीरो को बराबर का महत्व दिया गया है, या कम से कम दोनों के बीच की रेस तो बराबरी की ही है। जॉन इस फिल्मै में कैसिनो की एक श्रृंखला के मालिक की भूमिका निभा रहे हैं।


फिल्म के नैरेटर के मुताबिक उसकी जिंदगी हवा से बातें करती है, लेकिन यह तो भगवान ही जानता है कि वह हवा से आखिर क्या बात करती होगी। उसे दो चीजों से नफरत है : दूसरों की बेईमानी और खुद की ईमानदारी। दूसरी तरफ सैफ एक ठग है, इस अमीरजादे को नेस्तनाबूद कर देना चाहता है। जॉन को पता है कि सैफ के इरादे क्या हैं, लेकिन सैफ अपने इरादे में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाता है।



अब्बास-मस्तान की फिल्म‍ रेस वर्ष 2008 में रिलीज हुई थी। पता नहीं, किसी को उस फिल्म की कहानी याद होगी या नहीं। वह वर्ष 1998 में आई रोलैंड जोफ की हॉलीवुड फिल्म 'गुडबाय लवर' से प्रेरित थी। अब्बास-मस्तान की पिछली फिल्मॉ प्लेयर्स (2012) भी इटैलियन फिल्म 'जॉब' (2003) की कॉपी थी, लेकिन 'रेस 2' ऑरिजिनल है। हम ऐसा इसलिए कह सकते हैं, क्योंकि इस फिल्म की कहानी इंटरवल के बाद खत्म हो जाती है।


पता नहीं, हमारे फिल्म निर्माताओं को स्क्रीनप्ले पर थोड़ा और काम करने के बजाय अतिरिक्ति करोड़ों रुपए खर्च कर देना क्यों आसान लगता है। 'रेस' हिट थी, लेकिन 'रेस 2' बनने में बहुत समय लग गया। किसी सीक्वल को इससे बहुत पहले रिलीज हो जाना चाहिए।



एक टिकट में तीन बिकिनी (दीपिका पादुकोण, जैकलीन फर्नांडीज, अमीषा पटेल) बुरा सौदा नहीं कहा जा सकता। फिल्म में अमीषा पटेल अनिल कपूर से इश्क लड़ाती हैं। अनिल ने अपनी चेस्ट शेव करवाई है। लगा तो यह था कि इस फिल्म में अनिल कपूर को कॉमेडी के लिए रखा गया होगा।


वे टिफिन बॉक्स से खाना चुरा लेते हैं और अपने बौड़म असिस्टेंट के साथ मिलकर डबल मीनिंग जोक्स सुनाते हैं। लेकिन जब हमें ऐसा लगता है कि इस फिल्म को कुछ और कैरेक्टर्स की जरूरत है, ऐन तभी गॉडफादर राजा (आदित्य पंचोली) की एंट्री होती है। उनकी बांहों में तीन हसीनाएं हैं और वे अरबों डॉलर उड़ा देने से भी नहीं हिचकते हैं। वैसे भी इस फिल्म में लाखों और करोड़ों की कोई अहमियत नहीं है। तो फिर आखिर इस फिल्म में अहमियत किस चीज की है? क्योंकि फिल्म के सभी किरदार आखिर पैसों के पीछे ही तो भाग रहे हैं। और फिल्म का प्रोड्यूसर भी।



कहानी कुल-जमा बस इतनी ही है कि सैफ अपनी गर्लफ्रेंड (बिपाशा बसु) की मौत का बदला लेना चाहता है। वह चाहे तो चंद ही मिनटों में ऐसा कर सकता है, लेकिन यदि वह ऐसा कर देगा तो हेलिकॉप्टर शॉट्स, कार रेस, जर्मन ऑटो-मेकर ऑडी के विज्ञापनों, आतिफ असलम के गाने, जिसमें सांसें सिमटने लगे, सैलाब बहने लगे, जिस्म और रूह जैसे अल्फाज का इस्तेमाल किया गया हो और पार्टी-शार्टी डांस ट्रैक्स का क्या होगा?



आखिर हम थिएटर में इन चीजों को ही तो देखने गए थे। यदि ऐसा है, तो कोई बात नहीं। बस इतना ही है कि हॉल से बाहर निकलते समय अपना आईक्यू चेक करने की जहमत मत उठाइएगा।

Web Title: movie review: race 2
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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