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मूवी रिव्यू :'कॉकटेल'

Mayank Shekhar | Jul 13, 2012, 19:42PM IST

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    Critics Rating
    • Genre: रोमांस/ड्रामा
    • Director: होमी अदजानिया
    • Plot: पढ़िए दैनिकभास्कर.कॉम से जुड़े फिल्म समीक्षक मयंक शेखर द्वारा लिखा गया रिव्यू।

दो लड़कियां वेरोनिका और मीरा (दीपिका, डायना) एक कॉफीशॉप के टायलेट में एक-दूसरे से अभी-अभी मिली हैं। एक लड़की नशे में है तो दूसरी निराशा में है। अगले ही पल नशे में डूबी लड़की निराशा में डूबी लड़की को अपने घर ले जाने का फैसला कर लेती है। ‘सुनो,’ घर पहुंचकर किचन में ‘सती सावित्री’ मीरा कहती है, ‘तुमने कुछ खाया भी नहीं। मैं बनाऊं?’
तेजतर्रार नाइटलाइफ बिताने वाली खुशमिजाज लड़की होने के बावजूद वेरोनिका के कोई दोस्त नहीं हैं। मीरा उसकी सबसे अच्छी दोस्त, लैट पार्टनर और लगभग लाइफ पार्टनर बन जाती है।इसके बाद वेरोनिका एक और भलेमानुष गौतम (सैफ) को एक डिस्कोथेक से उठाकर अपनेघर ले आती है। और इससे पहले कि हम पूछें ‘आर यू सीरियस?’, वह उसके साथ अपने घर की चाबियां और अपने टूथब्रश शेयर करने लगती है।
गौतम आशिक आवारा है, लेकिन अचानक उसकी दिलचस्पी दुनिया की किसी और चीज में नहीं रह जाती, सिवाय मीरा के। शायद यह एक रोमांस कहानी है। चूंकि हम किरदारों को जानते हैं, इसलिए हम यह भी जानते हैं कि मुसीबत कहां पैदा होने वाली है। निश्चित ही यह हिंदी फिल्मों का एक और प्रेम त्रिकोण होगा। दो लड़कियों और एक लड़के की कहानी में भला और हो भी या सकता है।
तो माजरा यह है कि लड़का-लड़की से प्यार करता है और लड़की अभी सिंगल है। दूसरी लड़की उन दोनों के साथ सैर-सपाटे पर जा सकती है। लेकिन दर्शक इन तीनों में से किसी के भी बारे में फिक्र नहीं करते। न ही उन्हें इस बात की परवाह होती है कि अंत में कौन-किसके साथ होगा।और जितने लचर ढंग से इन किरदारों को हमारे सामने रखा गया है, उससे तो यही लगता है कि शायद फिल्मकार को भी इन किरदारों की कहानी में कोई दिलचस्पी नहीं है। लेकिन इसके बावजूद यह एक बिग बजट फिल्म तो है ही।बॉलीवुड में असर बजट और विषयवस्तु का आपस में कोई नाता नहीं होता।
यह फिल्म(2005) छोटे बजट की होने के बावजूद बहुत अच्छी फिल्म थी। चूंकि इस फिल्म की कहानी में कोई दम नहीं था, इसलिए निर्माता को फिल्म की वैल्यू बढ़ाने के लिए अपनी ओर से कुछ कोशिशें तो करना ही थीं।
मेरा याल है कि ‘रॉकस्टार’ और ‘जब वी मेट’ जैसी फिल्में बनाने वाले लाजवाब इम्तियाज़ अली को इसीलिए फिल्म के लिए चुटीले संवाद लिखने का जि मा सौंपागया था। कुछ मौकों पर फिल्म के संवाद वाकई मजेदार हैं। पॉपुलर प्रीतम ने संगीत की कमान अच्छे से संभाली है। ‘तु हीं हो बंधु’ पहले ही हिट हो चुका है।
अलीफ लोहर के सुपर सॉन्ग‘जुगनी’ को पाकिस्तान के कोक स्टूडियो से इस फिल्म के साउंडट्रैक में शामिल किया गया है।लंदन के बाहर की खूबसूरत लोकेशन फिल्माने के लिए क्रू को दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन ले जाया गया था।
और यहीं पर गौतम की साइको मां (डिंपल कपाडिया) अपने बेटे को वेरोनिका को किस करतेदेख लेती है। उसे तो मीरा के साथ होना चाहिए था। हीरो इस सिचुएशन को इस तरह समझाता है कि वह अपने मुंह से वेरोनिका के मुंह में सांसें देकर उसे बचाने की कोशिश कर रहा था। यह एक जबर्दस्त सीन है। हम ठहाका लगाकर हंसते हैं और मन ही मन सोचते हैं कि काश पूरी फिल्म ही गैरजरूरी रूप से गंभीर होने के बजाय इसी तरह खिलखिलाहट भरी होती।
इस फिल्म के लिए हम जितना बुरा महसूस करते हैं, उससे भी बुरा 43 साल के सैफ के लिए महसूस करते हैं। यह बताना मुश्किल है कि आखिर फिल्म में उससे मिलने वाली हर लड़की उस पर लट्टू कैसे हो जाती है। दुनिया उसका खेल का मैदान है, लेकिन सैफ हमें पूरी तरह से कंविंस नहीं कर पाते।
सैफ एक बड़े अभिनेता हैं और वे फिलहाल अपने शिखर पर हैं। जरा उनकी पिछली फिल्मों पर नजर डालिए : एजेंट विनोद, आरक्षण, कुर्बान। इन फिल्मों को भी भूल जाएं और केवल सैफ की परफॉर्मेस को याद करें। वे इससे कहीं बेहतर फिल्में कर सकते हैं। यकीनन।बेशक।

(मयंक शेखर जाने-माने फिल्म समीक्षक हैं, वे www.dainikbhaskar.com से जुड़े हैं)

Web Title: movie review: cocktail
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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